राम मंदिर के लिए तो फांसी भी चढ़ जाउंगी : उमा

लखनऊ. केद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने कहा है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए वे फांसी पर भी चढ़ सकती हैं. उन्होंने यह भी कहा कि अगर मुझे राम मंदिर मामले में जेल भी जाना पड़ेगा तो मैं इससे गुरेज नहीं करूंगी.

केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने यह बात शनिवार को राजधानी लखनऊ में आयोजित निर्मल गंगा को लेकर हुई बैठक के बाद पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए कही.

मंदिर मुद्दे पर उन्होंने कहा कि राममंदिर निर्माण में अपनी भूमिका के लिए मुझे कोई खेद नहीं है. मंदिर के लिए मुझे जेल जाना पड़े या फांसी पर लटकना पड़े तो भी मैं तैयार हूं.

उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ का सीएम बनना एक युग परिवर्तन जैसा है.

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी गंगा की सफाई को लेकर गहरी रूचि है. चूंकि अब योगी मुख्यमंत्री हैं, इसलिए अब गंगा की सफाई का काम तेजी से आगे बढ़ेगा.

मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने बताया कि वे आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलीं.

योगी से उन्होंने कहा कि गंगा-यमुना और सहायक नदी रामगंगा और काली की सफाई के लिए उत्तर प्रदेश के हिस्से का 7 हजार करोड़ रुपए देना चाहती हैं.

उन्हें आज नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और यूपी सरकार की एनओसी मिल जाए तो वह अक्तूबर 2018 तक गंगा के सफाई के काम को पूरा कर देंगी.

उत्तर प्रदेश के झांसी से सांसद उमा भारती ने कहा कि मुख्यमंत्री को उन्होंने बताया है कि सिंचाई परियोजनाओं के लिए 15-20 हजार करोड़ रुपए भी यूपी के लिए है. आप इस रकम से अपनी सिंचाई परियोजनाओं को मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और तेलंगाना की तरह पुरानी योजनाओं को चलाएं और नई परियोजनाओं को शुरू करें.

उन्होंने कहा कि इस बार गर्मी में बुंदेलखंड को लोगों को केन्द्र सरकार भरपूर पेयजल उपलब्ध कराने के लिए तैयार है. सरकार बुंदेलखंड में पानी के लिए अपनी हर प्रयास करेगी. बुंदेलखंड में चंदेलों और बुंदेलों के पुराने तालाबों को मिलाने की योजना है, ताकि वहां कोई तालाब सूखा न रह जाए.

उन्होंने कहा कि अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग करने वाले आंदोलनकारी पहले बुंदेलखंड का क्षेत्र तो निर्धारित करें. कारण कि मध्य प्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड के लोग अलग बुंदेलखंड के लिए तैयार नहीं हैं. ऐसे में राज्य पुनर्गठन आयोग को अलग बुंदेलखंड का प्रस्ताव कैसे दिया जा सकता है.

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