आप कहाँ खड़े हैं और किसके साथ खड़े हैं?

आठ गाड़ियों में लगभग चालीस गायें अवैध रूप से ले जायी जाती हैं… पुलिस इन्हें जाँच के लिए रोकती है… आठ में से छः गाड़ियों को पुलिस रोक पाने में सफल होती है, दो गाड़ियों के ड्राइवर पुलिस को चकमा देकर आगे निकल जाते हैं.

शेष छः गाड़ियों की जाँच होती है, जिसमें अवैध रूप से गो-तस्करी का मामला सामने आता है, 16 लोग गिरफ्तार किये जाते हैं.

पुलिस को चकमा देकर निकली गाड़ियों को कुछ नागरिकों द्वारा रोका जाता है, पूछताछ में मामला गो तस्करी का साबित होने पर कुछ अज्ञात लोगों द्वारा मारपीट की जाती है… एक घायल को अस्पताल ले जाया जाता है जहाँ दो दिनों बाद एक की मौत हो जाती है.

घटना बस इतनी सी है. यहाँ तक तो हिन्दू-मुस्लिम का जिक्र नहीं आया अब तक. तो कौन लाया हिन्दू-मुस्लिम को बीच में?

अमेरिका के न्यूयॉर्क टाइम्स के संपादक तक बात पहुँच गई, खबर छप गई अखबार में… हेडलाईन बनी…. “फंडामेंट्लिस्ट हिन्दुओं ने एक मुस्लिम की हत्या कर दी”…. अखबार की कॉपी हाथ में लहराते हुए गुलाम नबी आजाद ने राज्यसभा में सरकार पर आरोप भी लगा दिया कि मोदी सरकार हिन्दुओं का बचाव कर रही है.

क्या साबित करना चाहते हैं आप?… हिन्दुओं को आतातायी बताने की आपकी साजिश कब तक चलेगी?

क्या अखलाक के नाम पर बिहार फतह करने का भ्रम आपके दिमाग से अब तक नहीं निकला है?

अभी-अभी देश भर के चुनावों आपने मुँह की खाई है… जब आपकी लुटिया ही डूब गई थी…. क्या इस पर विचार किया है आपने?

हिन्दू और हिन्दुत्व के नाम से घृणा आपको कहाँ से कहाँ लेकर आ गई, ये बातें आप कब समझेंगे?

हिन्दू-राष्ट्र की परिकल्पना में सभी धर्मों के सम्मान की बात जब योगी जी करते हैं तो आपको क्यों चिढ़ होती है?

“सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया” को प्रतिपादित करने वाले धर्म के प्रति आपकी असहिष्णुता की वजह क्या है?

बात जब गो-हत्या के विरोध की होती है तब आखिर वो कौन सी वजह है कि आप गो-हत्यारों के पक्ष में खड़े दिखते हैं?

जबकि आप ना तो हिन्दू हितैषी हैं और ना ही मुस्लिम हितैषी..?? आप ना सिर्फ राजनीति कर रहे हैं बल्कि नंगे भी होते जा रहे हैं.

गोमांस एवं गो-हत्या के मुद्दे पर आप हाशिए पर धकेले जा रहे हैं… ये बातें आप कब समझेंगे?

क्योंकि तमाम मुस्लिम भी अब हिन्दुओं की भावनाओं को समझने लगे हैं पर आप नहीं समझ रहे हैं.

कुरान या हदीस में ऐसी कोई सूरा या आयत नहीं है जिसमें गोमांस को जायज बताया गया हो… बल्कि इसके खाने से होने वाले नुकसान का जिक्र अवश्य है.

सहारनपुर के गांव नंगला झंडा के डॉ. राशिद आपको याद नहीं होंगे जिन्होंने गौ-तस्करों के खिलाफ मुहिम छेड़ रखी थी जिनकी 2003 में हत्या कर दी गई थी इन्हीं तस्करों द्वारा.

दारूल उलूम देवबंद ने भी फतवा जारी कर गो हत्या ना करने की अपील की थी… कुछ दिनों पहले अजमेर के मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह के दीवान सैयद जैनुल आबेदीन अली ने भी गोमांस ना खाने की अपील की थी…

इनके अलावा अनेक शिया एवं मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने हिन्दुओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए गो हत्या का विरोध किया है.

परंतु आप कहाँ खड़े हैं और किसके साथ साथ खड़े हैं?

क्या उनके साथ जो जान बूझकर हिन्दुओं को नीचा दिखाने का काम कर रहे हैं?… और जब ऐसे लोगों का कोई विरोध करता है तो आप उन्हें हिन्दू आतंकवादी कहते हैं?

आप अपने एजेंडे पर पुनर्विचार करें…. “सबका साथ सबका विकास” ही एकमात्र एजेंडा हो सकता है भारत की 130 करोड़ जनता के लिए.

आजादी के पहले से चली आ रही आपकी बाँटने वाली राजनीति से कुछ अलग हटकर सोचने का प्रयास करें यदि देश की राजनीति में अपनी उपस्थिति को बनाये रखना चाहते हैं.

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