मुग़ल : भारतीय परम्पराओं का गुलशन गुलज़ार करते अक्षय

गुलशन कुमार का नाम आते ही जो सबसे पहला दृश्य सामने आता है वो है उनकी टी सीरीज कंपनी से निकली हज़ारों की संख्या में भक्ति और आराधना के कैसेट्स.

फिर उनकी शिव मंदिर से लौटते में हुई हत्या ने जैसे भक्ति गीतों की बहती सतत धारा को सुखा दिया…. उनके बाद भी उनकी परंपरा को चालू रखने का प्रयास किया गया परन्तु फिर वो जादू उत्पन्न नहीं हो पाया जो गुलशन कुमार ने पैदा किया था.

ऐसे में जब उनकी पत्नी  सुदेश कुमारी ने गुलशन कुमार के जीवन पर फिल्म बनाने का विचार किया तो उनकी भूमिका निभाने के लिए जो नाम चुना गया वो है अक्षय कुमार.

मोदी जी के आने के बाद जो सनातन धर्म की धारा सारे अवरोधों को तोड़कर फूटी तो गुलशन कुमार की सूखी नदी भी जीवित हो उठी. ऐसे में अक्षय कुमार के मस्तिष्क में जिस विचार का बीज अस्तित्व द्वारा बोया गया वो यही कि जिस शिव शक्ति से भयभीत हो विरोधियों ने गुलशन कुमार की हत्या तक कर डाली, उनके लिए सबसे अच्छी श्रद्धांजलि यही हो सकती है कि उस फिल्म के लिए पहला कदम किसी प्राचीन शिव मंदिर से शुरू किया जाए. और जो मंदिर  चुना गया वो इंदौर के पास महेश्वर में शिव का 300 साल पुराना शिव मंदिर था.

अक्षय की फिल्म पर हस्ताक्षर करने के बाद, टी सीरीज के वर्तमान कर्ता धर्ता भूषण कुमार ने कहा, “मेरे पिताजी की जीवनशैली पर  शिव मंदिर में हस्ताक्षर करने का मेरा सपना था. उस समय मैं अक्षय के बगल में मेरे पिता की उपस्थिति महसूस कर रहा था और मैं इसे शब्दों में नहीं कह सकता.’

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अक्षय कुमार इन दिनों अपनी आनेवाली फिल्म Tiolet : Ek Premkatha के लिए भी जो काम चाहे अपने फिल्म के प्रचार के लिए ही सही लेकिन देश में लोगों को शौच और शौचालय के प्रति जागरूक होने के लिए कर रहे हैं, वो अप्रत्यक्ष रूप से मोदीजी के उस वृहद अभियान में सहयोग ही है. उसी तरह शिव मंदिर में किसी फिल्म के पेपर्स पर सहमति के हस्ताक्षर करना उस सनातन धर्म की परम्परा पर मुहर है जिसके लिए एक बार फिर हम सब जागरूक हुए हैं और अपने अपने स्तर पर उसकी उन्नति के लिए प्रयासरत हैं.

इस फिल्म की चर्चा करते हुए उस लेख में भी मैंने यही लिखा था कि कम्युनिस्टों ने जिस तरह से हमारे राष्ट्र की नींव को खोखला करने के लिए फिल्म, संगीत, पुस्तक, लेखन और सभी तरह के रचनात्मक कार्यों का दुरूपयोग किया है. हमें उसी तरह छोटी सी छोटी बात में उनके लिखे को मिटाने के लिए अपनी रचनाधर्मिता को वहां तक ले जाना होगा.

काम चाहे आप व्यक्तिगत रूप से कुछ भी करते हों लेकिन जब उसकी नींव में राष्ट्र की चिंता उसकी उन्नति का विचार हो तो आपका काम व्यक्तिगत नहीं रह जाता आपका व्यक्तिगत काम राष्ट्र की उन्नति में रामसेतु के लिए गिलहरी सा ही सही लेकिन सहयोग अवश्य बनता है…

इसी तरह गुलशन कुमार के जीवन पर बनने वाली फिल्म “मुग़ल” के लिए उनका शिव मंदिर आना हमारे आज के युवाओं के मन में सकारात्मक सन्देश छोड़ता है कि हम चाहे कितने ही आधुनिक और वैज्ञानिक हो जाएं, अपने संस्कारों और परम्पराओं को लेकर ही आगे बढ़ना है.

जैसे शुरुआती पंक्तियों में कहा था, ब्रह्माण्ड के रहस्यों को समझना इतना आसान नहीं आपका कौन सा कदम उसकी योजना का हिस्सा है आप नहीं जान सकते.

बहरहाल फिलहाल निर्माता निर्देशक की योजना यह है कि मुग़ल फिल्म को 2018 में रिलीज़ किया जाएगा. निर्देशक जॉली एलएलबी द्वारा निर्देशित, सुभाष कपूर, फिल्म निर्देशित करेंगे.

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