Success Story : शिक्षा तंत्र ने नकारा तो रचा सफलता का नया मंत्र

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अपने लेख कई बार मैं एक कहानी सुना के शुरू करता हूँ जो ज़्यादातर काल्पनिक होती है. आज फिर एक कहानी सुना रहा हूँ, पर ये काल्पनिक नहीं है. यह एक सच्ची घटना है.

काफी पुरानी बात है एक लड़की थी. बचपन में एकदम सामान्य. सामान्य से घर में जन्मी थी. अक्सर बीमार रहती थी. बचपन में पैर जल गए. महीनों बिस्तर में पड़ी रही. dull सी personality थी.

स्कूल जाने लगी. पढ़ने में शुरू से ही dull थी बाकी activities में भी कोई बहुत अच्छी नहीं थी. सो ऐसे बच्चों को स्कूल में भी कोई विशेष प्रोत्साहन नहीं मिलता. वो अक्सर back benchers बन के रह जाते हैं. स्कूल के गुमनाम चेहरे.

तो साहब उसके जीवन में शुरू से ही एक सिलसिला शुरू हो गया, fail होने का. हर टेस्ट में fail, क्लास टेस्ट में fail, unit टेस्ट में fail, half yearly fail, annual exam fail.

अब CBSE बोर्ड की कोई policy है शायद कि पांचवीं तक किसी को fail नहीं करना है. उसे अगली क्लास में promote कर देना है. सो वो fail होते होते 6th में पहुँच गयी.

अब साहब fail होना तो उसका जैसे trade mark हो गया था सो वो 6th में भी fail हो गयी. इस बीच ऐसा भी नहीं था कि घर वालों ने कोई कोशिश नहीं की. पर तमाम कोशिशों का कोई रिजल्ट नहीं निकला. और ये भी नहीं कि स्कूल वालों का कोई दुराग्रह था क्योंकि स्कूल तो उसका हर 2 या 3 साल में बदल जाता था.

खैर जब 6th में भी फेल हो गयी तो इस बार promotion नहीं हुआ. उसी क्लास में रोक दी गयी. घर वालों ने हाथ पाँव जोड़ के किसी तरह अगली क्लास में promote कराया. और इसी तरह वो लुढ़कते पुढ़कते consistently and persistently हर एक टेस्ट में fail होती हुआती 10th में पहुँच गयी.

अब CBSE बोर्ड के exam में कौन सी सिफारिश चलनी थी सो वहां भी उसने असफलता का झंडा गाड़ दिया यानी 10th में भी फेल. अब आप ये बताइये की क्या किया जा सकता है. एक बच्चा जो लगातार 10 साल तक रोजाना fail हुआ उसका क्या किया जा सकता है. कभी सोच के देखा है? 10th fail लड़की का क्या future होता है. आइये मैं बताता हूँ.

1) वो 11th में admission नहीं ले सकती. इसलिए BA का भी कोई चांस नहीं.

2) वो सारी जिंदगी 10th fail कहलाएगी.

3) उसे कोई सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी. चपरासी की भी नहीं. अब तो फ़ौज में भी भर्ती नहीं हो सकती. वहां भी 10th पास मांगते हैं.

4) उसकी शादी किसी अच्छे, पढ़े लिखे well settled लड़के से नहीं होगी. अजी 10th फ़ैल लड़की से कौन शादी करना चाहता है आजकल.

5) कहने का मतलब उसका future ख़तम.

आइये अब ये देखते हैं कि ऐसे बच्चे, जो कि पढ़ाई में dull होते हैं उनके साथ क्या होता है समाज में. रोज़ रोज़ का तिरस्कार …..teachers की रोज़ रोज़ की डांट फटकार …कई बार तो मार पीट …..हर रोज़ हर subject में failure का ठप्पा ……ऊपर से घर में डांट ….

उन्हें पूरी तरह नकारा …निकम्मा …कामचोर ….नालायक ….मान लिया जाता है ……..सहपाठियों द्वारा तिरस्कार, दुत्कार ….ऐसे बच्चों से अक्सर तेज़ तर्रार बच्चे कोई मेल मिलाप नहीं रखते …….और वो और ज्यादा dull होते चले जाते हैं …….उन्हें एक ऐसे सिस्टम ने failure …नकारा घोषित किया है जो एक फूल प्रूफ सिस्टम माना जाता है ……..जो हर साल लाखों करोड़ों बच्चों का मूल्यांकन करता है …सैकड़ों साल पुराना एक जांचा परखा सिस्टम है

अब आप यूँ समझ लीजिये कि जौहरियों की एक संस्था जो हर साल लाखों पत्थरों का मूल्यांकन करती है, उसने एक पत्थर का 10 साल मूल्यांकन कर के उसे पत्थर घोषित कर दिया और बाकियों को हीरा तो ऐसी संस्था के ऊपर शक भी कैसे किया जा सकता है …….तो साहब अब आप कल्पना कीजिये कि उस लड़की का क्या हुआ होगा ………..

ज्यादातर लोग यही कहेंगे की शादी कर के बच्चे पाल रही होगी ……..तो सुनिए साहब ….जिस दिन उस लड़की को certified नकारा यानि failure ……. घोषित किया गया, उसके ठीक 10 साल बाद वो लड़की राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में ….हिन्दुस्तान की नामचीन और महान हस्तियों की तालियों की गडगडाहट के बीच अपने field में सर्वोत्कृष्ट सेवाओं और उपलब्धियों के लिए …देश का सबसे बड़ा पुरस्कार खुद महामहिम राष्ट्रपति जी के हाथों से प्राप्त कर रही थी.

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भारती सिंह

उस लड़की का नाम है भारती सिंह ……और उसे मैं इसलिए जानता हूँ क्योंकि वो मेरी सगी छोटी बहन है. और मैंने उसे प्रतिदिन असफलता से आगे निकल कर सफलता की बुलंदियों तक पहुँचते देखा है.

भारती ने 1996 में भारत का sports का सर्वोच्च पुरस्कार …arjuna award प्राप्त किया और वो अपने करियर में विश्व के सबसे महान weightlifters में गिनी गयीं …और उन्होंने world champonship और asian games में कई पदक जीते ……olympics में उन दिनों women weightlifting नहीं थी ….नहीं तो वहां भी मेडल जीतती.

उन्होंने हाल ही में CISF से ASSISTANT COMMANDANT के पद से volunteery retirement लिया है …अगर वो अपनी पूरी नौकरी करती तो शायद DIG या IG बन के retire होतीं ……अब सोचने वाली बात ये है कि आखिर गड़बड़ कहाँ हुई इस कहानी में …और भारती सिंह की लाइफ में turning point कहाँ से आया.

गौर से देखने पर पता लगता है कि वो जीवन में कभी भी एक dull या failure बच्चा नहीं थी …दरअसल हमारा सिस्टम उसको गलत पैमाने से नाप रहा था ………अब साहब अगर आपको quadratic equation …और trignometry नहीं आती तो आप fail …….अगर आप लिखने में spelling mistake करते हैं तो आप fail …..सूर्य ग्रहण कैसे लगता है …ये आपने रटा नहीं है तो आप fail …….फिर आपमें चाहे जितनी भी प्रतिभा है ….चाहे आप किसी अन्य field में विश्व की महानतम हस्ती बनने की क्षमता रखते हों.

पर चूंकि आपको quadratic equation नहीं आती इसलिए आप फेल …और आपका future ख़तम …….हमारे education system ने तो आपको fail यानी नकारा घोषित कर दिया है …….अब आप ऐसा करो सब्जी की रेड़ी लगा लो सड़क पे ……..कायदन होना तो ये चाहिए कि सिस्टम उस बच्चे का मूल्यांकन करे और यह बताये की बेशक इस बच्चे को trignometry नहीं आती ..और ये shakespeare के नाटकों पर निबंध नहीं लिख सकता …पर इसमें …xyz field में अपार क्षमता है लिहाजा इसे 10th में पास किया जाता है और आगे पढने की इजाज़त दी जाती है …इसे आगे इस इस field में पढाई करनी चाहिए.

अब मुझे आप ये बताइये कि भारती सिंह के केस में, भारती सिंह fail हुई या भारती सिंह का मूल्यांकन करने में हमारा education system fail हुआ. दरअसल भारती सिंह तो एक विलक्षण प्रतिभा की धनी थीं. पर उस प्रतिभा को पहचानने में हमारे अकादमिक महारथी और हमारा अकादमिक सिस्टम fail हो गए और खामखाह 10 साल तक उस बेचारी बच्ची को दुत्कारते रहे.

अब ये तो उसकी हिम्मत थी कि उसने हार नहीं मानी और तमाम विपरीत परिस्थितियों में भी संघर्ष करती रही और एक दिन दुनिया के शीर्ष पर विराजमान हुई. पर न जाने ऐसी कितनी भारती सिंह होंगी इस दुनिया में जिसे ये सिस्टम अपने पैरों तले कुचल देता है.

यहाँ एक बात मैं और साफ़ कर देना चाहता हूँ कि अपने professional career में भारती ने सिर्फ sports में ही excell नहीं किया बल्कि हर field में टॉप किया. कॉलेज से BA किया 2nd division …बढ़िया अंग्रेजी बोलती है ………फिर CISF में सब इंस्पेक्टर के पद पर ज्वाइन किया और promotion ले कर assistant commandant तक पहुंची.

300 से 500 मर्दों की कंपनी को सफलता पूर्वक कमांड किया …..लखनऊ, जोधपुर और दिल्ली के international airports की security की incharge रही और इस दौरान लीडरशिप की मिसाल पेश की ….अपने करियर के दौरान उन्होंने कुछ ऐसे cases solve किये जहाँ उनकी intelligence को देख के उनके senior officers दंग रह गए.

CISF की ट्रेनिंग की passing out parade में बेस्ट कैडेट घोषित हुई और परेड को command किया. 1 किलोमीटर लम्बे मैदान में हजारों dignitries की भीड़ के सामने 1500 officers को command देना कोई हंसी खेल नहीं होता ….अच्छे अच्छों की टांगें कांपने लगती हैं ……जब वो retirement लेने लगी तो उनके एक senior ऑफिसर ने कहा था कि आप गलती कर रही हैं …अगर आप पूरी नौकरी करेंगी तो IG बन के retire होंगी.

विचारणीय विषय ये है कि हमारे education system ने शुरू में ऐसी विलक्षण प्रतिभा को पहचानने में चूक कैसे कर दी. क्या ये सिस्टम ऐसी ही हज़ारों लाखों प्रतिभाएं हर साल नष्ट कर रहा है. मैं अक्सर ये प्रश्न अपने व्याख्यानों में उठता हूँ.

तो कुछ लोग इसका ये जवाब देते हैं कि आप जिस सिस्टम की इतनी आलोचना कर रहे हैं वही सिस्टम विश्व स्तरीय प्रतिभाएं पैदा भी तो कर रहा है ….तो इसका जवाब ये है मेरे दोस्त …कि खराब से खराब सिस्टम भी कुछ results तो देता ही है ….100 किलो सरसों में 35 किलो तेल निकलना ही चाहिए ……..अब अगर एक कोल्हू 20 किलो निकालता है तो आप उसे 20 किलो के लिए शाबाशी देंगे या उससे उस 15 किलो का हिसाब मांगेंगे जो waste हो गया ………

यहाँ मैं ये बता दूं कि इस success स्टोरी में उनके parents का क्या role रहा ….पहले तो उन्होंने उसे किसी तरह (व्याख्या करने की ज़रुरत नहीं है ) 10th पास कराया. अब चूंकि उसका maths और science से पिंड छूट गया इसलिए आगे पढ़ाई में कोई समस्या नहीं हुई. दूसरे जब उसे इतने सालों तक नाकारा घोषित किया जाता था तब उसके parents रोजाना ground में ये सिद्ध करते थे कि देखो …you are the best …तुम तो यहाँ दौड़ में लड़कों को भी हरा देती हो …you are the best ……तुम तो एक दिन world champion बनोगी ……..और वो रोज़ इसी तरह जीतती रही …रोज़ शाम को उसके लिए तालियाँ बजती थीं ……शाम को वो दिन भर का अपमान और तिरस्कार भूल जाती थी ………और इसी तरह धीरे धीरे ..एक दिन वो सचमुच world champion बन गयी ……ज़रा कल्पना करें …अगर उसके parents भी स्कूल वालों की तरह उसे नाकारा मान लेते तो ?????????

Moral of the story

1 ) अगर आपका बच्चा आज पढने में कमजोर है तो, निराश न हों …….वो कल का Thomas Alva Edison हो सकता है .

2) सब बच्चों को 9 नंबर का जूता पहना के मत दौड़ाओ ………..भाई मेरे सबके पाँव छोटे बड़े होते हैं …….आखिर एक ही question paper और एक ही syllabus से सारे देश के बच्चों का मूल्यांकन कैसे किया जा सकता है …….

3) 20 किस्म का बीज एक साथ खेत में डाल दोगे …तो ध्यान रखो सबका जमाव एक साथ नहीं होगा ………मूंग तीसरे दिन जम जाएगी, आम 15 दिन बाद निकलेगा, सूरन ( जिमीकंद, yam ) दो महीने बाद जमेगा और chinese bamboo …… 2 साल बाद निकलेगा …इसलिए आपको कोई हक़ नहीं कि आप उस बेचारे chinese bamboo को निकम्मा, नाकारा या failure घोषित करें ……क्योकि आपको पता होना चाहिए कि chinese bamboo बेशक शुरू में थोडा ज्यादा टाइम लेता है germination में, पर जिस दिन वो जमीन तोड़ के ऊपर आ जाता है तो सिर्फ 7 हफ्ते में 40 फुट लम्बा हो जाता है……..

सावधान : कृपया ध्यान दीजिये …..आपके इर्द गिर्द ज़मीन में, आपके घर में, स्कूल में या समाज में ………कुछ chinese bamboo गड़े हो सकते हैं ….कृपया उन्हें अपने पैरों तले न कुचलें …….क्योंकि एक दिन वो जमीन तोड़ के बहार आने वाले हैं.

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