युद्ध तो करना होगा, फिर चाहे घर में घुस कर ही राक्षसों को क्यों ना ख़त्म करना पड़े

“अपनी सभ्यता के बारे में आप अक्सर बढ़ाई करते रहते हो, कोई एक प्रमाण दो जिससे लगे कि हम कभी सच में अन्य से कहीं आगे थे.”

चोर-डकैत किस के घर में चोरी-डकैती करने जाते हैं? जो पैसे वाला संपन्न होता है. कोई संपन्न कभी किसी फटेहाल के घर में चोरी करने नहीं जाता.

ठीक इसी तरह हमारे देश में लुटेरे बाहर से लूटने आते रहे, क्योंकि हम हर तरह से समृद्ध थे. मगर इतिहास में हमने कभी किसी और पर आक्रमण नहीं किया, क्योंकि ना तो हमें इसकी जरूरत थी, ना ही किसी के पास हमसे बेहतर कुछ था.

यही नही, आज अगर हम कहीं बाहर पढ़ने जाते हैं तो सिर्फ इसलिए कि विदेशों में बेहतर विश्वविद्यालय है, ठीक इसी तरह पहले लोग हमारे यहाँ दूर-दूर से पढ़ने आते थे, हम कहीं बाहर पढ़ने नहीं जाते थे.

“मगर हममें कोई कमी तो रही होगी जो हम हारे और फिर गुलाम हुए?”

अगर कोई आप पर लगातार आक्रमण करे और आप सिर्फ डिफेंसिव रहें तो कभी ना कभी आप से चूक होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. इसलिए अपनी आक्रमकता नहीं खोनी चाहिए जो हमने चंद्रगुप्त के बाद सिर्फ अहिंसा ध्यान संन्यास को ही धर्म बना के खो दी थी.

आप तो अहिंसक हो गये मगर जब तक आप का दुश्मन अहिंसक नहीं होता तब तक अहिंसा का एकतरफा सिद्धान्त अव्यवहारिक और अप्राकृतिक है. और यही हमसे सबसे बड़ी भूल हुई.

“मगर सिर्फ अतीत की बात करके क्या फायदा, हमें भविष्य की बात करनी चाहिए.”

वो इसलिए कि हजारों साल की गुलामी के कारण हम में जो सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक विकृतियां आ चुकी हैं या फिर हमें जो जानबूझकर विकृत कर दिया गया है, उसे हम समझ कर दूर कर सकें.

अगर नींव कमजोर होगी तो मकान मजबूत नहीं बनेगा, कमजोर जड़ वाला पेड़ हरा-भरा नहीं हो सकता. यही नही, हमें इतिहास से सीख भी मिलती है. बशर्ते हम उसे समझ कर अमल में ला पायें.

जैसे कि उदाहरण के तौर पर हमारे आदर्श पुरुष श्री राम ने अपहरण की गयीं माता सीता को वापस लाने के उद्देश्य से लंका पर आक्रमण किया और रावण का वध किया. वो त्रेता युग था और भगवान श्री राम हिंसक बिलकुल भी नहीं थे फिर भी उन्होंने जो किया वो रामायण में विस्तार से दिया गया है.

ऐसे में आज जबकि कलयुग है तब हमारा अहिंसा और एक तरफ़ा आदर्शवादी बातें करना क्या व्यवहारिक हो सकता है? बिलकुल नही, बल्कि अगर कोई आप की भारत माता का अपहरण करता है, उसके स्वाभिमान के साथ खिलवाड़ करता है, आप की संस्कृति सभ्यता समाज को लूटने की कोशिश करता है तो हमें उसके साथ युद्ध करना होगा, चाहे फिर उसके घर में घुस कर उस राक्षस को खत्म ही क्यों ना करना पड़े.

हमें किसी पर आक्रमण नहीं करना है लेकिन अगर आप पर कोई ऐसी कोशिश करता है तो उसका जवाब देना आना चाहिए. तभी राम राज्य की स्थापना हो सकती है.

सभी को रामनवमी की शुभकामनाएं… जय श्री राम.

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