समझ लीजिये ठीक से, भारतीय राजनीति के “शनिदेव” हैं डॉ स्वामी

परम माननीय जी,

का बात है? कछु गड़बड़ है का मगज मा?

टाइम नहीं है सुब्रह्मण्यम स्वामी जी को सुनने का?

तुर्रा ये की वो पक्षकार नहीं है!

प्रभु, पहले तो स्वामी को समझ लीजिये ठीक से, ये भारतीय राजनीति के “शनिदेव” है पक्के… जिसकी राजनीति के “तुला” राशि में ये हों तो रंक को राजा बना देते है और जिसके ऊपर इनकी वक्रदृष्टि पड़ गई ना तो उसका कल्याण बिलकुल तय हो जाता है फिर वो चाहे कितना भी “अटल” क्यों ना हो.

रही बात पक्षकार होने की तो हे न्यायाधिपति! जिस प्रकार से आपको भारत में कहीं भी किसी भी फटे में टांग डालने की दिव्यशक्ति “स्वतः संज्ञान” के नाम से मिली हुई है ना, वइसे ही विश्व के हर हिन्दू को रामलला के विषय में लड़ने-मरने-मारने का अधिकार जन्मसिद्ध ही प्राप्त है.

हर हिन्दू, चाहे शैव्य हो, शाक्त हो, या वैष्णव हो, सभी को राम परमप्रिय है. वे एक शिशु से लेकर राजा राम तक प्रभु के सभी विग्रहों को जीवनभर साक्षात् जीते हैं.

अपने बच्चों में, अपने आदर्श में, अपने समाज में, वे कण-कण में श्रीराम को जीवनपर्यंत ढूंढते रहते है.

अब बात समय की तो, हे लोकतंत्र के चूना प्रस्तर युक्त आधारभूत स्तंभ! तीन करोड़ केसेस के ऊपर बैठकर अन्याय के समान ही देरी से न्याय करने वाले न्यायदेव! आपके पास इस देश के 100 करोड़ नागरिकों के आराध्य के विषय में चर्चा करने हेतु “समय” नहीं है?

देश की जनता को असमय, अकारण, मृत्यु के घाट उतारने वाले राक्षसों, आतंकवादियों की क्षमायाचना पर सुनवाई के लिये अर्धरात्रि की भोगवेला में अपनी प्रेयसी को अतृप्त छोड़कर नंगे पैर दौड़कर चले आने वाले परम कृपालु माननीय के पास प्रेम एवं सद्भाव से जीने का अनुपम सन्देश देने वाले पुरुषोत्तम श्रीराम के विषय में चर्चा करने का समय नहीं है???

धन्य हो प्रभु!

लगता है आपको अपनी इस दूषित व्यवस्था से विषों के शोधन हेतु तत्काल ही पंचकर्म नामक उपाय के उपयोग की आवश्यकता है.

सुधर जाइए… अब तो बहुत हो चुका…

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