राष्ट्रवादी विचारधारा का अनिवार्य आभूषण है वाद-प्रतिवाद में भाषा और आचरण का संयम

इसमें कोई शक नहीं कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को, योगी जी को उत्तरप्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय लेते वक्त एक बात की चिंता थी कि कहीं उनके मुख्यमंत्री बन जाने के बाद, उनके कट्टर समर्थक, उद्दंड न हो जाए.

उनका डर निर्मूल भी नहीं था क्योंकि समय-समय पर उनके जोशीले समर्थको ने अपने आचरणों में भाषा और व्यवहार में संयम की तिलांजलि देने में कभी भी परहेज़ नहीं रखा है.

मुझे भी यह स्वीकारने में कोई हिचक नहीं है कि व्यक्तिगत रूप से मुझे इस बात को ले कर चिंता थी की क्या, सत्ता पर पहुंच कर, योगी जी के युवा समर्थक, सत्ता की गम्भीरता और उससे उपजी मर्यादाओं का वहन कर पाएंगे? और क्या योगी जी, इन पर अनुशासन की लगाम लगाने में कामयाब हो जायेंगे?

आज मैं यह कह सकता हूँ कि मेरी शंका जहाँ कमजोर थी, वहीं मोदी जी का योगी जी पर विश्वास ज्यादा मजबूत था.

वैसे तो फेसबुक और मीडिया पर योगी जी के मुख्यमंत्री बनाए जाने पर, मोदी जी, आरएसएस और स्वयं योगी जी को लेकर एक से एक कॉन्सपिरेसी थ्योरी लिखी गयी हैं और सबने ही अपने-अपने सूत्रों या फिर राजनीति में हो रहे घटनाक्रमों के आधार पर योगी जी के मुख्यमंत्री बनने के कारणों पर प्रकाश डाला है, लेकिन मैं इसमे चूक गया था.

मुझे भी कुछ उन घटनाओं का संज्ञान था जो कभी भी मीडिया या सोशल मीडिया पर नहीं आयी थी लेकिन मैंने मोदी जी को समझने के दम्भ में घटनाओं को पढ़ने में गलती कर दी.

खैर, अपनी गलतियों को विस्तार देने का काम फिर कभी करूँगा, फ़िलहाल तो खबर यह है नोयडा पुलिस ने एक तथाकथित हिन्दू युवा वाहनी के सदस्य सन्दीप उपाध्याय को एक महिला पत्रकार साक्षी जोशी से फेसबुक पर अभद्रता करने पर गिरफ्तार कर लिया है.

देखा जाय तो सन्दीप के पक्ष कई लोग खड़े हो जायेंगे लेकिन यह गलत होगा. मैं हमेशा से कहते आया हूँ कि राष्ट्रवादी भावना प्रधान होते है व तर्कों के तरकश से खाली होते है और इसीलिए आचरण में संयम का अभाव रखते हुए भाषा का मर्दन करके, एक विचारधारा को ही कटघरे में खड़ा कर देते है.

योगी जी की पुलिस काम कर रही है और योगी जी, मोदी जी का भी काम कर रहे है. मुझे यह अच्छी तरह से पता है कि मोदी जी ने योगी जी से एक बार पूछा था, क्या वह सांडो को बैल बना सकते है?

मेरे ख्याल से योगी जी बना सकते है, भले ही वो लाल सांड हो, हरा सांड हो या फिर खुद के तबेले का भगवा सांड हो.

यह बिलकुल भी नहीं भूलना चाहिए कि वाद-प्रतिवाद में भाषा और आचरण का संयम, ख़ास तौर से राष्ट्रवादी विचारधारा का सत्ता में बने रहने के लिए अनिवार्य आभूषण है.

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