कान्हा उपवन उर्फ़ जीव आश्रय के सत्य पर भारी पड़ते मुलायम के बेटा-बहू

योगी जी, जब से मुलायम सिंह यादव की बहू अपर्णा यादव द्वारा कब्जाई गौशाला का निरीक्षण कर के आये हैं, तब से बड़े सन्तुष्ट और प्रसन्न नज़र आ रहे हैं और इसी कारण प्रदेश की अन्य नगर निगमो को उन्होंने इसी तरह की परियोजना शुरू करने को कहा है.

अब क्योंकि उन्होंने नगर निगमो से इस परियोजना को शुरू करने को कहा है, इसलिए यह तो स्पष्ट है कि योगी जी को यह तो पता ही है कि यह परियोजना लखनऊ नगर निगम के अंतर्गत शुरू हुई थी लेकिन क्या लखनऊ नगर निगम के अधिकारियों ने कान्हा उपवन के सम्पूर्ण सत्य से योगी जी का परिचय कराया है?

कान्हा उपवन का सत्य यही है कि यह कान्हा उपवन की परियोजना 2007 की है जो उस वक्त के लखनऊ के मेयर और आज के उप मुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा की व्यक्तिगत रूचि के कारण शुरू हुयी थी.

उनका प्रस्ताव था कि लखनऊ जैसे शहर में छुट्टा घूम रहे जानवरों के लिए नगर निगम के कांजी हॉउस पर्याप्त नहीं है और उसमें पकड़ कर रक्खे गए जानवरों की बड़ी दुर्दशा होती है.

खास तौर से परित्याग की गयी बीमार, बूढी और घायल गायें और आवारा साड़ों की न तो सही ढंग से देख भाल हो पाती है और स्थान अभाव के कारण बहुत लम्बे समय तक उन्हें रक्खा भी नहीं जा सकता है.

इस लिए शहर के बाहर एक बड़े से क्षेत्रफल में एक शरण स्थल बनाना चाहिए जहाँ सभी तरह के तिरस्कृत जानवरों को शरण मिल सके और उनकी देख भाल की जा सके.

डॉ शर्मा की इसी परिकल्पना को मूर्त रूप देने के लिए लखनऊ नगर निगम ने 54 एकड़ जमीन पर ‘कान्हा उपवन’ को विकसित किया जो 2009 में बन कर तैयार हो गया था.

इस परियोजना पर पूरा व्यय, लखनऊ नगर निगम ने ‘नगर निगम निधि’ से किया था. यह नगर निगम के पैसे से बना है और इसके बनाने में किसी सरकार का कोई योगदान नहीं है.

यही नहीं ‘आल इण्डिया मेयर्स’ के सम्मेलन में डॉ दिनेश शर्मा द्वारा, लखनऊ नगर निगम की उपलब्धि के रूप में ‘कान्हा उपवन’ का प्रस्तुतिकरण भी किया जा चुका है.

छुट्टे और परित्याग किये गए पशुओं के बेहतर देखभाल के लिए, इस परियोजना के रूप में की गयी पहल के लिए डॉ शर्मा जी की भूरि-भूरि प्रशंसा हुयी थी और उनको सम्मान भी मिला था.

जब यह कान्हा उपवन, पिछली समाजवादी सरकार की इच्छानुसार अपर्णा यादव की NGO को हस्तांतरित किया जा रहा था तब डॉ दिनेश शर्मा ने विरोध भी किया था लेकिन तब के तत्कालीन नगर आयुक्त ने इसका बिना कोई संज्ञान लिए हुए हस्तांतरण कर दिया था.

सबसे वाहियात बात यह है कि कल योगी जी के इस कान्हा उपवन के दौरे में, जो अब जीव आश्रय के नाम से मीडिया द्वारा प्रचारित किया जाता है, स्वयं डॉ दिनेश शर्मा भी उपस्थित थे लेकिन मीडिया ने कहीं भी उनके योगदान का जिक्र नहीं किया है और इसे अपर्णा यादव की उपलब्धि के तौर पर प्रचारित किया गया है.

योगी जी को जो वहां चमक-दमक दिखी है उसके पीछे का राज यही है कि लखनऊ नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी, जो अभी भी पिछले सरकार में मुलायम और अखिलेश यादव के करीबी थे, उन्होंने योगी जी के दौरे की सूचना आने पर रात-रात भर काम करा के दो दिनों में उसे चमकाया है.

मैं नहीं जानता कि योगी जी के गौ के प्रति प्रेम की पराकाष्ठा उनको कहाँ तक ले जाएगी लेकिन कान्हा उपवन के दौरे के बाद उनकी प्रतिक्रिया यही बता रही है कि गाय पर सवार मुलायम सिंह यादव की बहू और बेटे, जीव आश्रय उर्फ़ कान्हा उपवन के सत्य पर भारी पड़ते दिख रहे है.

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