क्या है अखिलेश के दुत्कारे गए लोगों को मोदी, शाह और योगी द्वारा सहलाए जाने का राज़

UP के यादवों की एक बड़ी ख़ास विशेषता है. ये कभी डूबते सूरज को नहीं पूजते. इन्हें हारने वाले पहलवान पसंद नहीं.

UP चुनाव में जो हार हुई उस से यादव बड़ी बुरी तरह आहत हुए हैं. सपा भाजपा से हार गयी उन्हें ये ग़म नहीं.

ज़मीन पे ये जीत भाजपा की नहीं है. ये दरअसल Non यादव OBC की जीत है…. यादवों पे NYOBC की जीत….

एक मिसाल देता हूँ. मेरे बगल के गाँव में यादवों का बोलबाला रहा है शुरू से. उस गाँव में राजभर समाज की अच्छी खासी संख्या रही है. 2014 से पहले राजभर समाजवादी पार्टी का वोटर रहा है. पर 2014 में कहानी पलट गयी.

2014 की मोदी लहर में राजभर समाज का 50% भोट भाजपा को मिला था. इस 2017 के चुनाव में 90% राजभर भोट भाजपा को मिला.

गाँव में कल तो जो यादव इन राजभरों पे राज करते थे, आज उन्ही राजभरों ने ballot से बदला चुका दिया.

अब गाँव का राजभर ‘यादव जी’ से डरता नहीं है. अब वो लाठी ले के उनके सामने खड़ा नाक से नाक रगड़ के बतिया रहा है. चौधराहट अहीरों के हाथ से निकल गयी.

अखिलेश यादव failed the Yadavs of UP…. अखिलेश को अपने पिता और चाचा का इस तरह अपमान नहीं करना था.

उन्हें इस तरह परिवार और पार्टी में कलह नहीं करनी थी. इस तरह अपमानित कर बाप और चाचा को नहीं निकालना था.

Nothing Succeeds like Success…. अगर अखिलेश जीत गए होते तो सब माफ़ था. हार आपके दुर्गुणों को, आपकी कमजोरियों को सतह पे ला देती है.

यादव समाज में इस समय अखिलेश की लोकप्रियता अपने निम्नतम स्तर पे है. यादव समाज की पूरी सहानुभूति मुलायम सिंह यादव के साथ है. अखिलेश इस बात को समझ नहीं रहे और नित नयी गलतियां किये जा रहे हैं.

इसके विपरीत मोदी और अमित शाह की जोड़ी अपने दुश्मनों और विरोधियों का भी दिल जीत लेने में माहिर है.

याद कीजिये वो दिन जब 2012 में केशू भाई पटेल गुजरात में अपनी पार्टी बना लाख कोशिशों के बावजूद मोदी का विजय रथ रोक न पाये और मोदी ने जीत का परचम लहराया.

जीत के उस जश्न में एक कार्यक्रम में केशू भाई मंच से नीचे, सामने कुर्सी पे बैठे थे…. मोदी जी जैसे ही मंच पे आये, उनकी निगाह सामने बैठे केशू भाई पे पड़ी, वो स्वयं नीचे गए, उनके पैर छू आशीर्वाद लिया और उन्हें हाथ पकड़ ससम्मान मंच पे ले आये….

या 2014 का मोदी सरकार का वो शपथ ग्रहण समारोह दिल्ली में, जहां मुलायम सिंह भीड़ में पीछे कहीं बैठे थे, जैसे ही अमित शाह की निगाह पड़ी, वो स्वयं गए और MSY का हाथ पकड़ सबसे आगे लाये और ससम्मान सबसे सीनियर नेताओं के साथ बैठाया.

मोदी सम्मान देना और लेना दोनों जानते हैं. मोदी दिल जीतना भी जानते हैं. अपने बेटे द्वारा दुत्कार दिए गए MSY को सम्मान दे के मोदी-अमित शाह, यादवों के दिल में जगह बना रहे हैं.

MSY अपने छोटे बेटे को चाहते हैं और छोटी बहू उनकी चहेती है ये किसी से छिपा नहीं है.

यदि मोदी, अमित शाह और योगी जी अखिलेश द्वारा दुत्कारे गए लोगों को सहला पुचकार रहे हैं तो ये समझ लीजे कि सपा के Core यादव भोट पे डाका पड़ रहा है.

युवा यादव तेज़ी से योगी-मोदी का fan हुआ जाता है, उधर नीरो बांसुरी बजा रहा है…. जैसे 2017 NYOBC ने जिताया, 2019 UP का यादव जिताएगा…. अगली बार केंद्र में यादव सरकार.

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