हेडगेवार जन्मोत्सव : आज भी कायम है संघ के पितृपुरुष की दी हुई सेवा-परंपरा

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हाउ डीड इट हैपन? हुआ कैसे ये? अंग्रेज स्कूल इंस्पेक्टर का पारा सातवें आसमान पे था.

हेडमास्टर सन्न थे, शिक्षक बदहवास! आनन्द मठ की उपजाई हुई क्रान्ति बंगाल को पार कर मीलों दूर महाराष्ट्र के पुणे शहर के छोटे से स्कूल में पता नहीं कब पहुंच गई थी किसी को पता ही नहीं चल पाया था. वन्दे मातरम् का उद्धघोष वो भी अंग्रेज निरीक्षक के आते ही. स्कूल प्रशासन  के भयाक्रांत होने के लिए इतना काफी था.

‘इस राजद्रोह के अपराधियों को ढूँढो!’, गुस्से से कांपते अंग्रेज निरीक्षक के मुखारविंद से निकले इन अंगारों ने समूचे स्कूल प्रशासन की तन्द्रा को तोड़ दिया. ख़ुफ़ियागिरी की सारी ताकत आजमा ली गयी, सारे पेंतरें भांज लिए गए, साम दाम दण्ड भेद की नीति को चरम सीमा तक पहुंचा दिया गया. पर नतीजा वही निकला ढाक के तीन पात.

पांचवी क्लास में ऐसी योजना को बिना पकड़े जाते हुए अंजाम देना कोई हंसी ठठोली की बात नहीं थी. पर डॉ हेडगेवार का जन्म ही ऐसे कार्यो के लिए हुआ था. 1 अप्रैल 1889 को जन्मे इस हिन्दू-धर्म-ध्वजवाहक ने आगे चलके एक ऐसा संघठन तैयार किया जिसने इस भारत राष्ट्र को तीन – तीन प्रधानमंत्री दिए — पीवी नरसिम्हा राव, अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी. तीनों के  तीनों ऐसे जिन्हें राष्ट्र सदियों तक याद रखेगा और कृतज्ञ रहेगा.

स्वतंत्रता संग्राम के दौरान राष्ट्र के लिए उनके संघठन के योगदान के बारे में पूछने वाले तथाकथित क्रांतिकारियों को याद रखना चाहिए कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ना होता तो ना गोवा आज भारत का हिस्सा होता ना ही पोंडिचेरी जैसे फ़्रांसिसी उपनिवेश किसी सत्याग्रह से आजाद करवाए गए थे.

1962 चीन-भारत युद्ध में संघ की भूमिका की प्रसंशा तो तत्कालीन नेहरू सरकार ने भी की थी. 1963 के गणतंत्र दिवस के परेड में तीन दिन के निमन्त्रण में ही संघ के अनुशाषित कार्यकर्ताओं का परेड में भाग लेना भी याद ही होगा.

उनके ही बनाये संघठन ने पहली बार हिन्दुओं का वैज्ञानिक पद्धति से संघठित किया. आज बाढ़ हो, भूकंप हो या कोई और आपदा, भारत विभाजन की त्रासदी झेल रहे नागरिकों की सन 1947 में मदद की जरुरत हो या रेल दुर्घटनाएं हो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता  हर मौके पर मदद के लिए आगे आये हैं.

जब देश नेताओं के जन्मदिवस की छुट्टियाँ मनाने में जुटा होता है तो भी संघ अपना काम नहीं भूलता.

  • आकाश गौरव

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