गणगौर : ये दुनिया मेरे बाबुल का घर वो दुनिया ससुराल

Gangaur Poem Ma Jivan Shaifaly

कहते हैं पार्वती ने शिव को पति रूप में पाने के लिए

एक व्रत शिव से छुपाकर किया था

और तब से उसे गणगौर माता के रूप में पूजा जाता है

मैंने भी एक व्रत आधी उम्र तक

दुनिया से छुपाकर किया

और उम्र के सूरज के डूबने से पहले तुझे पा लिया

कहते हैं मिट्टी की मूरत पर दूध के छींटे देकर

आज भी औरतें उस भभूतधारी सा वर पाने के लिए

गणगौर माता की पूजा करती है

मैंने भी शक्ति कणों के छींटे देकर अपनी देह की मिट्टी

को पावन किया

और तुझ जैसा रमता जोगी पाया

कहते हैं जहाँ पूजा की जाती है

उस स्थान को गणगौर का पीहर

और जहाँ विसर्जन किया जाता है

वह ससुराल होता है

तेरे स्पर्श को

इस देह की मिट्टी ने हमेशा पूजा कहा है

आ मेरी आत्मा को छूकर

उसे अंतिम धाम पर विसर्जित कर दे…

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