हिन्दू नववर्ष मंगलमय हो : सनातन की रक्षा के लिए अपने हर पर्व को मनाएं उत्साह से

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आज से लगभग 1 अरब, 95 करोड़, 58 लाख, 85 हजार, 119 वर्ष पूर्व चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन भगवान ब्रह्मा जी ने सम्पूर्ण सृष्टि का निर्माण प्रारंभ किया था. जब से सृष्टि प्रारंभ हुई तबसे काल गणना चली आ रही है और प्रत्येक चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन नव संवत प्रारंभ होता है.

वर्ष, शताब्दी, युग ..कल्प बीतते रहे और समय के पहिए ने अलग-अलग काल खंड देखे. महान व्यक्तियों ने समय के पहिए पर अपने हस्ताक्षर किया और अपने नाम से संवत चलाए.

जिनमें भगवान राम द्वारा चलाया गया राम संवत, भगवान श्री कृष्ण द्वारा चलाया गया श्री कृष्ण संवत, युधिष्ठर के राज्याभिषेक से प्रारंभ युगाब्द, कलयुग में विक्रमी संवत और शक संवत प्रमुख हैं | इस सभी में मात्र वर्ष गणना बदलती है पर सबका प्रारंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही होता है.

सनातन परम्परा में सब को ऋण मुक्त करने के पश्चात् ही कोई राजा अपने नाम से नव संवत चला सकता है. जब तक उसके राज्य में किसी एक भी व्यक्ति पर ऋण शेष है, वह संवत चलवाने का अधिकारी नहीं है, चक्रवर्ती होना तो अनिवार्य है ही. इसलिए नव संवत प्रारम्भ करवाना मात्र राजसत्ता या किसी व्यक्ति विशेष के नाम तक सीमित नहीं है. इससे उस कालखंड की भावनाएं जुडी होती हैं.

गाँवों में आज भी आप को कुछ लोग देशी घी की तौल किलो के बटखरे से करते हुए मिल जाएंगे. जो शिक्षित हैं उन्हें अशुद्धि का ज्ञान है. वो समझते हैं कि तरल पदार्थों का व्यापार आयतन से किया जाता है न कि किलोग्राम से. यानी जैसे जैसे हम शिक्षित होते जाते हैं हम ज्यादा शुद्ध मापन का प्रयोग करते हैं पर बिडम्बना देखिए यह बात काल गणना में बिलकुल उलट जाती है.

हमने तथाकथित शिक्षा के आवरण तले पूर्वजों द्वारा स्थापित सूक्ष्मतम गणना वाले सटीक भारतीय पंचाग का प्रयोग त्याग कर अंग्रेजों द्वारा विकसित अशुद्धि भरे पंचांग का प्रयोग शौक से अपना लिया है. यह तो दोहरा मापदण्ड हुआ फिर.

पिछले कुछ दशकों में वामी मीडिया और कामी कांग्रेसी सरकारों के गठजोड़ में हिन्दू अस्मिता से जुड़ी प्रत्येक वस्तु को हीन और उपेक्षित सिद्ध करने का सफल दुश्चक्र रचा और चलाया गया. जिसके कारण भ्रमित हिन्दू को चैत्र – बैशाख में पिछड़ापन और जनवरी – फ़रवरी में उन्नत भाव दिखता गया.

जैसे –जैसे हिन्दू समाज अपने पर्वों से दूर होता गया, वैसे – वैसे खाली स्थान को भरने के लिए तमाम नए डे और अंग्रेजी त्यौहार कुकरमुत्ते की तरह उगते गए. गलती हमारी थी, यदि आप अपने पर्वों को उत्साह के साथ नहीं मनाएंगे तो बच्चों का अन्य पर्वों जैसे कि क्रिसमस या इसाई नव वर्ष की ओर आकर्षित होना स्वाभाविक ही है.

आइए आगामी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को अपने पूर्वजों के श्रेष्ठ काल गणना पद्धति और इतिहास का सम्मान करते हुए इसे उत्सव के रूप में मनाएं और धीरे – धीरे यथासंभव प्रयोग में लाने का संकल्प भी करें !!

आप सभी को को युगाब्द ५११९ एवं विक्रमी २०७४ की अनंत अशेष शुभकामनायें…

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जन्म : 18 अगस्त 1979 , फैजाबाद , उत्त्तर प्रदेश योग्यता : बी. टेक. (इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग), आई. ई. टी. लखनऊ ; सात अमेरिकन पेटेंट और दो पेपर कार्य : प्रिन्सिपल इंजीनियर ( चिप आर्किटेक्ट ) माइक्रोसेमी – वैंकूवर, कनाडा काव्य विधा : वीर रस और समसामायिक व्यंग काव्य विषय : प्राचीन भारत के गौरवमयी इतिहास को काव्य के माध्यम से जनसाधारण तक पहुँचाने के लिए प्रयासरत, साथ ही राजनीतिक और सामाजिक कुरीतियों पर व्यंग के माध्यम से कटाक्ष। प्रमुख कवितायेँ : हल्दीघाटी, हरि सिंह नलवा, मंगल पाण्डेय, शहीदों को सम्मान, धारा 370 और शहीद भगत सिंह कृतियाँ : माँ भारती की वेदना (प्रकाशनाधीन) और मंगल पाण्डेय (रचनारत खंड काव्य ) सम्पर्क : 001-604-889-2204 , 091-9945438904

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