अरे ये तो किसी पागल का काम है! आतंकवाद की चर्चा करने तक की हिम्मत नहीं

लंदन टेरर अटैक में शामिल आतंकी कौन है? उसका नाम और पहचान क्या है?

मेरी गाड़ी अगर लाल बत्ती पार कर जाये तो नंबर प्लेट से मुझे खोज कर मेरे घर पर पेनल्टी नोटिस आ जायेगा…

[ब्रिटिश संसद के बाहर आतंकी हमले की कोशिश, 5 की मौत, 40 घायल]

पर यहाँ की तेज तर्रार एजेंसियों को अभी तक आतंकी का नाम-पता मालूम नहीं चला है… धर्म तो कभी मालूम नहीं चलेगा…

ट्रम्प की पत्नी के पिल्ले के मल की गंध सूंघ कर बता देने वाली मीडिया अभी तक यह नहीं जान पाई है. आपको अभी तक एक भी फोटो उसका देखने नहीं मिला होगा…

आतंकवाद का सच देखने दिखाने, उसकी विवेचना करने तो छोड़िए, उसकी चर्चा करने तक की भी हिम्मत नहीं है.

कल ड्यूटी पर था, तभी एक मित्र का फ़ोन आया, उन्होंने लंदन अटैक की खबर दी. तब तक किसी को कुछ खबर नहीं थी.

तुरंत सबने गूगल किया. 30 सेकंड के भीतर एक महिला का कमेंट आया – यह टेररिस्ट अटैक नहीं है… यह तो एक पागल आदमी का काम है…

मैंने कहा – हाँ, यह एक पागल आदमी का काम है… पेरिस में भी एक पागल आदमी का काम था, बर्लिन और हैम्बर्ग में भी एक पागल आदमी का ही काम था….

न्यूयॉर्क मेराथन में 2 पागल आदमियों का काम था, लंदन ट्यूब अटैक चार पागल आदमियों का काम था, मुम्बई अटैक में यह 10 पागल आदमियों का काम था…

इन सभी पागल आदमियों में कॉमन क्या है, यह मत पूछना… और यह टेरर अटैक नहीं है, टेररिस्ट अपने साथ रॉयल अकेडमी ऑफ़ टेररिज्म का डिप्लोमा फ्रेम करके घूमते हैं…

मेरी बेटी ने अपनी मम्मा को कहा… मम्मा, कुछ नहीं बदलेगा… लोग और बेकार के डिफेन्स ढूंढेंगे, उन्हें ही और डिफेंड करेंगे…

पूरी पश्चिमी दुनिया की यही पहली प्रतिक्रिया है… यह एक पागल आदमी का काम है… से शुरू होकर आतंक का कोई धर्म नहीं होता… पर ख़त्म हो जायेगा…

पर अंदर-अंदर ब्रिटेन अपना अगला मोदी, अगला ट्रम्प चुनने की तैयारी करता रहेगा… सर्वज्ञ बीबीसी को उसकी कोई खबर नहीं होगी…

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