मनचलों पर यूपी पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ लिखने से पहले ये जान लीजिए

मनचलों के खिलाफ उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यवाई पर कुछ भी लिखने से पहले दो काम कर लीजिए.

– अगर कोई आपका जानने वाला पुलिस अधिकारी या कर्मचारी हो तो, उससे बात कर लें कि इस कार्यवाई के दौरान उनके क्या तौर तरीके हैं.

– अगर आप प्रदेश में ही रहते हैं या हैं, तो अपनी बहन-बेटी के साथ निकल कर सड़कों पर उन तौर-तरीकों को खुद परख लें.

मनचलों के खिलाफ मौजूदा कार्यवाई कोई नई व्यवस्था नहीं है आईपीसी के मुताबिक. सार्वजनिक जगहों पर व्यवहार के लिए नियम मौजूद हैं, बस उनका पालन मानवीय भाव के साथ कराया जा रहा है.

स्थान विशेष पर मौजूद होने की वजह पूछी जा रही है, वजह बता देने पर कुछ नहीं बोला जा रहा. लड़के-लड़की के साथ होने पर दोनों से वजह पूछते हुए जवाब से संतुष्ट न होने पर… जरूरत के मुताबिक दोनों पक्षों के घर बात की जा रही है.

गिरफ्तारी या हिरासत में केवल वे जा रहे हैं… जो सार्वजनिक जगहों पर अनैतिक स्थिति में पाए जा रहे हैं. ऐसी स्थिति में पाए जाने पर बुजुर्ग भी जेल जाएंगे, ये नियम कहता है.

यह अभियान पहले चरण में अगले एक महीने तक चलने वाला है. शुरूआती कार्यवाई है जिसमें अभी खुद ज्यादातर पुलिस वालों को भी समझना है कि इसमें नियम आदि क्या हैं और आईपीसी क्या कहता है क्योंकि लंबे समय से इन्हें इसके उपयोग का अनुभव नहीं.

कान पकड़ के उठक-बैठक आदि जैसी सार्वजनिक सजाएं गैरकानूनी हैं और पहले दिन आदतन ऐसा कर जाने वाले पुलिस कर्मियों को फटकार मिली है. मार-पीट, अभद्रता किसी कीमत पर न करने के सख्त हिदायत है.

ध्यान रखिए : आपने पूरे यूपी चुनाव के दौरान जमीन की बातों और भावनाओं को नकारते हुए लगातार अंध विरोध लिखा. आप नोटबंदी, कालेधन पर कड़ाई, आर्थिक भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े रुख जैसी बातों के विरोध में नारे लगाते रहे जबकि जनता इन सभी को बेहद सकारात्मक ढंग से लेती रही.

आप मनचलों के खिलाफ इस अभियान पर भी जमीन से उठती जनता की भावनाओं को न समझ पा रहे हैं, न समझना चाह रहे हैं और जमीन के सच के ठीक उलट लिख रहे हैं.

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