शशि कपूर जन्मोत्सव : अभिनय, संगीत और अध्यात्म की त्रिवेणी का संगम

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अब तक चार बार पकड़ कर सुनवा चुके हैं ये गाना… यूं रूठो ना हसीना, मेरी जान पे बन आएगी… कह रहे थे आज सुबह सुबह सपने में आया कि मैं आपको ये गाना सुनवा रहा हूँ.. सच पूछो तो मैं कई बरसों से ये गाना आपको सुनवाना चाहता था लेकिन कभी याद ही नहीं आया… याद आया भी तो सपने में…

आप तो बस शशि कपूर को देखिए… आप कर सकती हैं ऐसी स्टेप्स… मैंने मुस्कुराते हुए हाँ में सर हिलाया…

तो करके दिखाइएगा…

ये टन्न सी घंटी की आवाज़ सुनिए पहले अंतरे में, और हर अंतरे की दो लाइन्स के बाद बदलती हुई बीट्स सुनिए … तबले की थाप सुन रही हैं ना आप…

आपको पता है एक ज़माना था जब इस गाने का वीडियो रेकोर्ड करके रख लिया था… ज्यादा नहीं तो कम से कम 1500 बार देखा होगा ये गाना… कोई एक बार में इतनी सारी चीज़ें एक साथ देख ही कैसे सकता है…… बोल कोई ख़ास नहीं, बहुत एवरेज गाना है… लेकिन वो जो… वो जो… क्या कहते हैं उसको …. होता है कुछ कोई एक टन्न की आवाज़ समझ लो या फिर शशि कपूर ने पूरे गाने में एक बार वो जो हाथ लहराया था उसका जादू समझ लो … बस यही कुछ क्षणिक बातें होती हैं जो किसी गाने में बाँध लेती है मुझको….

वो गाने में शशि कपूर को देखने को कहते रहे और मैं उनकी गाना दिखाने की अदा को देखती रही… मैं तय नहीं कर पा रही थी कि उनके दिल की बात सुनूं या अपने दिल की, आखिर दोनों ही यानी शशिकपूर और स्वामी ध्यान विनय नौ नम्बरी जो ठहरे… दीवाना और किसे कहते है…. इन्हें ही कहते हैं…

आज भी कभी किसी बात पर रूठ जाती हूँ तो कहते हैं ये गाना आपके लिए ही बना है… यूं रूठो न हसीना मेरी जान पे बन आएगी..

– एक दीवाने की मस्तानी ‘जीवन’

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