कोई आश्चर्य नहीं यदि अगला आम चुनाव 350+ दिखा दे

विभिन्न चैनल्स पर, हार की मीमांसा करते हुए विपक्ष के नेताओं को देखने के बाद यह संक्षिप्त लेख लिखना पड़ रहा है.

इनको बोलते हुए देखा तो यही समझ में आया है कि विपक्ष के किसी भी दल को अपने हारने की वजह का या तो पता नहीं है या फिर वह उसको स्वीकार करने को तैयार नहीं है.

यह कोई नई बात नहीं है. विश्व के लोकतान्त्रिक व्यवस्था के अन्य राष्ट्रों में यह देखा गया है कि जब उस राष्ट्र की विपक्ष ऐसी मनोस्थिति से गिरफ्त होती है, तो इसका अर्थ यह होता है कि वह अगले चुनाव में लड़ने के लायक ही नहीं रह गया है.

होता यह है कि विपक्ष, भूतकाल के समीकरणों में उलझा हुआ, इस आशा में ही जीने लगता है कि, ‘राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है और सिर्फ कोई एक घटना, 6 महीने में राजनैतिक वातावरण बदल देगी’.

विपक्ष मानसिक रूप से दिवालिया हो कर, उस एक घटना की आशा करने लगता है, जो उनके लिए, सत्ता पक्ष के विरुद्ध, वातावरण बदल देगा.

बस यहीं चूक हो जाती है.

होता यह है कि विपक्ष, सत्ता पक्ष के लड़खड़ाने के इंतज़ार में इतना अराजक रूप से संयमहीन और दरिद्र हो जाता है कि वह यही नहीं देख पाता है कि जहाँ वह एक रुका हुआ पानी बनकर बदबूदार नाला बन गया है वही सत्ता पक्ष, बन्धनों को तोड़, नाले की सारी गन्दगी को बहा लिए जा रहा है.

भारत का विपक्ष, 2019 के चुनाव से पहले ही मानसिक रूप से अपने हथियार डाल चुका है. अब, मोदी जी की 2019 में होने वाली ज़ीत से ज्यादा यह महत्वपूर्ण हो गया है कि विपक्ष से कौन-कौन और कितने गर्त में जाएगा.

2014 ने 272+ देखा था और अब 2019, 350+ दिखा दे तो मुझे कोई आश्चर्य नहीं होगा.

अमेरिका के एक राष्ट्रपति थे थिओडर रूज़वेल्ट, जिन्होंने अपने विरोधियों का सामना करने को लेकर, अपने उदगार कुछ यूँ व्यक्त किये थे –

The unforgivable crime is soft hitting. Do not hit at all if it can be avoided, but NEVER hit softly.

उनका कहना था कि, ‘किसी को मारना बुरी बात है, उससे बचना चाहिए, लेकिन यदि मार रहे हो तो उसमें मुरव्वत बरतना अक्षम्य अपराध है. मारो तो पूरी तरह से मारो.’

इस अमृतवाणी को बाजपेयी-अडवाणी की भाजपा ने हमेशा सीखने से परहेज किया था और उसका खामियाजा भाजपा के साथ, भारत ने भी भुगता है.

लेकिन मोदी-शाह की भाजपा ने अपने पुरोधाओं के मुरव्वत वाले चरित्र से किनारा कर लिया है और इसी का परिणाम है कि गोवा और मणिपुर आज भगवा है.

मोदी-शाह की भाजपा, भले देर से ही, लेकिन जब मारेगी तो पूरी तरह से मारेगी.

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