अब उनका आखिरी दाँव क्या होगा?

आप शतरंज खेलते हैं? अगर खेलते या फॉलो करते हैं तो जानेंगे, एन्डगेम क्या होता है…

एन्डगेम खेल का वो आखिरी फेज़ है, जब आप राजा को घेर कर उस पर आखिरी हमला बोलते हैं. तब आप फायदे-नुकसान की, प्यादे या हाथी के कटने की परवाह नहीं करते. आखिरी शह और मात के लिए खेलते हैं…

अगर आपने मात दे दी तो फिर सामने वाले के कितने मोहरे बोर्ड पर हैं, मायने नहीं रखते…

हमारे विरोधियों, दुश्मनों ने बाजी बिछा रखी है. और उनके निशाने पर है देश और धर्म. इसे तोडना, नष्ट करना ही उनकी जीत है.

मोदी, बीजेपी, संघ ये सब तो सिर्फ मोहरे हैं… असली राजा तो यह देश है जिस पर उनकी नज़र है… हमने भी उन्हें “भारत तेरे टुकडे होंगे..” चिल्लाते हुए यूँ ही नहीं सुना है…

अब जब यूपी में मोदी ने उनके मोहरे काट दिए हैं, भारतीय राजनीति में मुस्लिम समर्थन की अनिवार्यता के मिथक को ध्वस्त कर दिया है, जातीय समीकरणों को मटियामेट कर दिया है तो अब उनके पास एन्डगेम में उतरने के अलावा कोई और चारा नहीं है…

इस चुनाव को जीतने से सचमुच क्या कुछ बदल गया है? क्या अब कैराना जैसे शहरों से हिंदुओं का पलायन रुक जाएगा? क्या कलकत्ता के सबर्ब्स में दुर्गा पूजा का विरोध धीमा पड़ जाएगा?

क्या केरल में हमारे हिंदुत्व के कार्यकर्ताओं की हत्या बंद हो जायेगी? क्या उत्तर प्रदेश में पुलिस की चमड़ी उतार लेने की धमकी देने वाले मौलानाओं की आवाज धीमी पड़ जाएगी?

अब उनके पास अभी से लेकर 2019 तक और कोई बड़ा इलेक्शन है नहीं जीतने को. तो अब यह खेल चुनावी राजनीति का नहीं रहा.

और वे आपको 2019 का चुनाव जीतने देकर खेल को हमेशा के लिए ख़त्म होने देने को तैयार नहीं हैं. तो अब उनके पास आखिरी चाल क्या बची है?

अब उनका आखिरी दाँव क्या होगा? वे सड़कों पर उतरेंगे, दंगे फसाद करेंगे, मार काट करेंगे, अव्यवस्था फैलाएंगे… हमारी प्रगति और शांति को नष्ट करेंगे.

आपके सामने 1946 के डायरेक्ट एक्शन डे का उदहारण है. जब वे करोड़ों की संख्या में सड़कों पर उतरेंगे तो क्या हम इससे निबटने के लिए तैयार हैं?

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