राष्ट्रवाद की अवधारणा जैसे शिव की प्रतिमा

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राष्ट्रवाद का मेरा अपना निजी अर्थ है जो प्रचलित अर्थ से बहुत जगह मेल नहीं भी रखता.

मेरे राष्ट्रवाद में बस भाजपा ही नहीं है. आंशिक रूप से कॉन्ग्रेस भी है. पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह जी और सिद्धू की विजय मेरे लिए राष्ट्रवाद की ही विजय है. हाँ #AAP और वामी खलकामी मेरे लिए घृणा के पात्र ही हैं क्योंकि ये लोग नस्ल से ही देशद्रोही हैं.

मणिपुर में इरोम शर्मिला की अपमानजनक पराजय मेरे लिए राष्ट्रवाद की ही विजय है.

पंजाब में #आपा नकारा जाना और गोआ में आपियों का अंडा मेरे लिए राष्ट्रवाद की ही विजय है.

यदि कोई व्यक्ति मुस्लिम है तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है. उसके पैगंबर महाराज ने कितनी शादियां की और कितने कत्ल किए इसका हिसाब मुझे नहीं रखना. वो यदि मेरे धर्म का सम्मान करे और भारत की आत्मा से जुड़े तो मेरे लिए सम्मान का अधिकारी है. वो यदि अपने आतंकी पुत्र की लाश लेने से मना कर रहा है तो मेरे लिए सम्मान का अधिकारी है, उन कथित राष्ट्रवादियों से अधिक जो सब जानते हुए भी आसाराम और ऐसे बहुत से नारीभक्षियों का हिंदुत्व के आधार पर उग्र समर्थन करते हैं.

कल को वो पलटी मार ले तो मेरी धारणा भी बदलेगी, क्योंकि मैं बद्ध धारणाओं में नहीं जीता.

मेरे लिए राष्ट्रवाद एक स्पष्ट विचार है. जिसकी पूरी अवधारणा को समझने के लिए आपको शिव की प्रतिमा को ध्यान से देखना होगा.

मेरे लिए राष्ट्रवाद एक बोधयुक्त निर्णय है. जो हमारी सामुहिक चेतना में 2014 के चुनाव से दिखाई देने लगा है. हम अब निर्णायक मतदान करना सीख गए हैं. ये शुभ लक्षण हैं.

एक राष्ट्र के तौर पर निर्णय क्षमता संपन्न होना आगे के लिए बहुत अच्छा संकेत है. इससे हमारी राजनैतिक व्यवस्था का स्वत: ही परिष्कार होगा. जो बड़ी बड़ी बातें करे उसे एक बार जमकर वोट दे दो. काम न दिखाई दे और बंदरगिरी में लगा रहे तो गोवा बुलाकर #अंडा पकड़ाया जा सकता है. जनादेश नहीं होने का बहाना समाप्त करना बहुत आवश्यक है.

इस राष्ट्र को समर्पित हर व्यक्ति और संगठन मुझे न केवल मान्य है बल्कि पूज्य भी है और हर वो व्यक्ति या संगठन मेरा शत्रु है जो राष्ट्र के ऊपर कुछ भी रखे, भले ही वो मानवाधिकार हो.

सहमत होने की आवश्यकता नहीं है. ये मेरा अपना निजी चिंतन है.

– अज्ञेय आत्मन

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