इसे देशद्रोह न कहूँ तो क्या कहूँ!

एक वरिष्ठ मोदी विरोधी नेता ने कल कहा कि मोदी लहर को रोकने के लिए 2019 में सारे विपक्ष को एक हो जाना चाहिए.

अब सवाल ये पैदा होता है कि आप का उद्देश्य क्या है. राजनीति में अपने सिद्धांतों को लागू करना… तो वो तो उस खिचड़ी में संभव नहीं है.

और यदि अच्छे लोगों के हाथ में नेतृत्व देना उद्देश्य है, तो….

“मेरे बंगलादेशियों को कोई छू कर दिखाए, खून की नदियां बह जाएँगी” वाली ममता बनर्जी से लगाकर ताज कॉरिडोर बेचने वाली मायावती तक.

“दस मिनट को पुलिस हटा कर देखो इस देश में एक भी हिन्दू नहीं बचेगा” वाले ओवैसी से लगाकर “भारत तेरे टुकड़े होंगे” के समर्थक कम्युनिष्टों तक.

चारा तक सटक जाने वाले लालू प्रसाद यादव से लगाकर “मैंने हिंदुओं के खून से सरयू को लाल कर दिया” वाले मुलायम सिंह यादव तक.

पाकिस्तान से मोदी से मुक्ति की गुहार लगाने वाली, आतंकियों के मरने पर आंसू बहाने वाली, पूरे देश को बेचकर विदेशों में धन जमा करने की हसरत रखने वाली, बैसाखियों तक का पैसा खा जाने वाली और अब तक असफल साबित हुए राजकुमार वाली कांग्रेस से लगाकर इशरत जहाँ जैसी घनघोर आतंकी को बिहार की बेटी बताने वाले नितीश तक…

इन सब को एक छतरी के नीचे रखकर आप एक चूं चूं का मुरब्बा बनाने की कल्पना करते हैं वो भी राष्ट्र पर समर्पित सन्यासी नरेन्द्र मोदी के विरुद्ध. इसे देशद्रोह न कहूँ तो क्या कहूँ!

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