मदरसों पर चुप ममता बनर्जी सरकार, संघ समर्थित स्कूलों पर कर सकती है कार्रवाई

कोलकाता. पश्चिम बंगाल विधानसभा में राज्य के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा है कि शिक्षा के नाम पर बच्चों में सांप्रदायिकता का विष रोपण नहीं करने दिया जायेगा. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के विधायक मानस मुखर्जी के सवाल के जवाब में चटर्जी ने यह कहा. वहीं ममता सरकार के इस बयान पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.

पश्चिम बंगाल सरकार ने संकेत दिये हैं कि वह भाजपा के पितृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समर्थित स्कूलों पर कार्रवाई कर सकती है. बुधवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में राज्य के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा था कि धर्म के आधार पर कोई भी स्कूल नहीं चलने देंगे. उन्होंने कहा था कि शिक्षा के नाम पर बच्चों में सांप्रदायिकता का विष रोपण नहीं करने दिया जायेगा.

प्रश्नोत्तर काल के दौरान माकपा के विधायक मानस मुखर्जी के सवाल के जवाब में श्री चटर्जी ने बताया कि शारदा विद्या मंदिर के पांच शिक्षण संस्थानों को अनुमोदन दिया गया है. इन स्कूलों की जांच की जा रही है. यदि जरूरत पड़ी तो इन स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी और इनकी मान्यता भी रद्द की जा सकती है.

चटर्जी ने कहा कि धार्मिक असहिष्णुता को बढ़ावा देने के आरोप के मद्देनजर करीब 100 स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत कार्यवाह डॉ जिष्णु बसु ने कहा कि वामपंथी व तृणमूल कांग्रेस दोनों ही संघ द्वारा संचालित स्कूलों की बात कर रहे हैं, विधानसभा में मुद्दा उठाया जा रहा है, लेकिन बंगाल में बिना अनुमोदन के चलने वाले 10, 500 खारिज मदरसों के बारे में वह क्यों चुप हैं.

उन्होंने कहा कि सिमुलिया के मदरसे के बारे में क्यों नहीं कुछ बोल रहे हैं. उन्होंने कहा है कि वास्तव में दोनों ही पार्टियां पश्चिम बंगाल को बांग्लादेश बनाने की साजिश रच रही हैं.

उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समर्थित लगभग 330 स्कूल चल रहे हैं. इन स्कूलों में प्राइमरी से लेकर उच्च माध्यमिक तक छात्रों के पढ़ने की व्यवस्था है.

संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान बोर्ड के तहत उत्तर बंगाल और दक्षिण बंगाल में अलग-अलग बोर्ड हैं. दक्षिण बंगाल में विवेकानंद विद्या विकास परिषद है. इसके अधीन 215 स्कूल हैं.

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