खड़कवासला की खाली टेबल : इंतज़ार में हैं पाकिस्तान में कैद भारतीय जवानों के

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“If the cause be just and mind be strong, No force is great, No distance long, If selfless souls with such a strength, Face hazards all, they win at length.” – ये लाईनें हैं Dr R.S. Suri की डायरी से!

डॉक्टर सूरी Major Ashok Suri के पिता! मेजर सूरी जो 1971 के युद्ध में पाकिस्तान द्वारा युद्ध बन्दी बना लिए गए थे और सेना ने उनका शव न मिलने पर उन्हें शहीद घोषित कर दिया था. डॉक्टर सूरी जो दिल्ली में एक योगा आश्रम चलाते थे उन्हें विश्वास नहीं हुआ था इस पर.

1971 के युद्ध के दौरान 5th battalion Assam Regiment, 191 Infantry Brigade के अंतर्गत छंम्ब सेक्टर मुनव्वर तवी नदी (Chambb Sector, Munnawar Tawi River ) के पश्चिम में नियुक्त थी.

भारतीय सेना की 10th Infantry Division ने पाकिस्तान की 23rd Division का सामना किया था. 5th Battalion Sikh Regiment छम्ब सेक्टर में ब्रिगेड ग्रुप के मध्य में थी और इसी के पश्चिम पर 5th Assam और दूसरी ओर 4th बटालियन 1st Gorkha Rifles थी.

5 वीं असम और 5 वीं सिख को 4 दिसम्बर को हुई पाकिस्तान आर्टिलरी और एयरफोर्स की भारी गोलाबारी का सामना करना पड़ा था ! बड़ी भीषण लड़ाई हुई थी ……hand to hand combat….. संगीनों से ; पर पाकिस्तानी इन्फैंट्री ने टैंको के दम पर उत्तरी मन्डियाला ( Mandiala North ) हथिया लिया!

भारतीय सेना ने अगले दिन यानी 5 दिसम्बर को रीट्रीट किया, आर्मर्ड रेजिमेंट Deccan Horse के 2 टैंको और 5th Sikh की एक प्लाटून ने Mandiala Bridge फिर से कब्जे में ले लिया. जब लड़ाई थम गयी 5 दिसम्बर की रात तब पता लगा कि 4th बटालियन 1st गोरखा, 5th बटालियन सिख और 5th बटालियन असम ने सबसे ज्यादा नुकसान उठाया है और मेजर अशोक सूरी लापता थे….!

तारीख थी 26 दिसम्बर 1974, मेजर अशोक के पिता डॉक्टर R.S. Suri को 7 दिसम्बर 1974 को उनके बेटे की हैंडराइटिंग में लिखा हुआ ‘पत्र’ प्राप्त हुआ. लिफ़ाफ़ा खोलने पर केवल एक स्लिप निकली जिसपर बस “I am okay here.” लिखा हुआ था; और इसके आगे लिखे covering note पर पत्र लाने वाले ने लिखा था,

” साहेब; वलैकुमसलाम, मैं आपसे अकेले में खुद नहीं मिल सकता पर आपका बेटा जिंदा है और वह पाकिस्तान में है . मैं केवल यह पर्ची ला पाया हूँ जिसे आप तक भेजा है और वापस पाकिस्तान जा रहा हूँ . ” – अब्दुल हमीद (हस्ताक्षर)

और सालभर बाद August, 1975 में फिर उन्हें एक पत्र मिला जिसपर तारीख थी ‘June 14/15/16, 1975, Karachi.’ पत्र में लिखा था –

“प्यारे पापा,
सादर चरणस्पर्श, आपका आशीर्वाद चाहिए! मैं यहाँ जैसे-तैसे ठीक हूँ. आप भारतीय सेना और सरकार से संपर्क कीजिए और हमारे बारे में बात कीजिए! यहाँ मेरे अलावा 20 ऑफिसर और भी हैं ! मेरी चिंता मत कीजिए! घर पर सबको मेरा प्रणाम बोलियेगा खासतौर से मम्मी और दादा जी को. भारत सरकार पाकिस्तान सरकार से हमारी #आज़ादी के लिए प्रयास करे.”

मेजर के इस पत्र की हैंडराइटिंग उनकी हैंडराइटिंग से मिलने के कारण रक्षा सचिव ने मेजर सूरी को आधिकारिक रूप से युद्ध में शहीद से हटाकर युद्ध में खोया हुआ घोषित किया.

उस पत्र के मिलने के बाद से डॉक्टर सूरी ने अपनी पूरी जिंदगी विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs ) के चक्कर काटने में लगा दी, वहाँ हर कोई उन्हें अच्छे से पहचानने लगा था. उन्होंने सरकार के साथ मिलकर काम किया और मीडिया से हर सम्भव दूरी बनाये रखी क्योंकि मंत्रालय ने उन्हें सलाह दी थी कि मीडिया रिपोर्ट्स की वजह से युद्धबन्दियों की हत्या भी की जा सकती है पाकिस्तान द्वारा; उन्होंने अन्य सैनिक परिवारों से बात की, उन्हें बुलाया, पत्र लिखे और उन्हें सूचनाये दीं तमाम चल रही कार्यवाहियों के विषय में, उन्होंने नियमित रूप से प्रधानमन्त्री को पत्र लिखे और उन्हें उनके जवाब भी मिलते रहे.

अंत में 15 जुलाई 1980 को Dr Suri ने पाक विदेशमन्त्री Mr Agha Shahi को एक पत्र लिखा जब उन्होंने भारत के आगे पेशकस की उन खोये हुए सैनिकों और सैनिक अधिकारियों के विषय में पता लगाने की; पत्र में पाकिस्तान के इस सहयोगी रवैये के प्रति सम्मान और आदर जताते हुए उन्होंने लिखा , “…….. You will appreciate that the family members have undergone enough agony and misery and some have become mental as well as physical wrecks. The suspense for them is unbearable. ….settle this issue on humanitarian grounds.”

सूरी के पत्र का जवाब 1983 में आया. पाकिस्तान सरकार ने सैनिक परिवारों से पेशकश की अपनी जेलों में बन्द कैदियों की पहचान करने की; यह सब नवम्बर 1982 के बाद हुआ था जब जियाउल हक़ भारत आये थे और उन्होंने एक प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किये जो भारत-पाक के युद्ध बन्दियों की परस्पर रिहाई से जुड़ा था.

भारत तो 1972 में ही पाकिस्तानी परिवारों को बुलाकर उन्हें उनके लोग लौटा चुका था. ईधर Dr.Suri और अन्य सैनिक परिवारों को भरोसा दिया गया कि उनकी मांग जल्द ही पूरी होने वाली है. 6 अधिकारियों का एक delegation और सैनिकों के परिजन पाकिस्तान गए. उन्हें पहले से ही प्रेस से दूर रखा गया और यह कहा गया कि यह यात्रा क्लासीफाइड है इसलिए प्रेस साथ नहीं जायेगी.

ऐसा महसूस होता था मानो कोई डील हुई है. सैनिकों के परिवारों को हिदायत दी गयी थी कि हो सकता है कुछ लोग अब तक पागल हो चुके हों या मानसिक स्थिति ठीक न हो; ऐसी हालत में भी चुपचाप उन्हें वापस लाना है पाकिस्तानियों से कोई शिकायत नहीं करनी है. उनका इलाज यहाँ आने पर किया जायेगा .

तारीख थी 12 September, 1983, सोमवार, 1971 के बाद पहली बार किसी भारतीय ने आधिकारिक रूप से पाकिस्तान की यात्रा की थी. सारे सैनिक परिवार लाहौर पहुंचे और इनके साथ Ministry of External Affairs के अधिकारी भी थे!

ये लोग अगले दिन मुल्तान जेल के लिए साथ जाने वाले थे. इधर पटियाला जेल में कथित रूप से बन्द करीब 25 पाकिस्तानी सैनिकों का हस्तांतरण भी होना था पर नहीं हुआ क्योंकि उस नाम के कैदी वहाँ थे ही नहीं और अगले दिन पाकिस्तान के अखबारों में खबर थी – “India goes back on it’s words”.

Sept 15, 1983, सैनिक परिवार मुल्तान जेल पहुँच चुके थे और लोगों ने डॉक्टर सूरी को अखबार की हेडलाइन्स पढ़ पागलों की तरह एक साथ हँसते और रोते हुए देखा था ; शायद वह पाकिस्तान की यह चाल समझ गए थे.

जब Flt Lt Vijay Vasant Tambay की माँ विजिटर रजिस्टर में साइन कर रहीं थीं तो जेल के अधिकारियों ने बड़ी कुटिलता से उनसे कहा “Sorry Mrs.Tambay, Tambay is not here.” इन सैनिक परिवारों को एक भी व्यक्ति वापस नहीं मिला; जेल के अंदर करीब 200 कैदी खड़े कर उनकी पहचान कराने का दिखावा कर दिया पाकिस्तान ने लेकिन उनमें से कहाँ कोई हिन्दुस्तानी था.

लोग बैरंग लौटा दिए गए और पाकिस्तानी अधिकारियों का व्यवहार बड़ा बेशर्म और धूर्तता पूर्ण रहा. डॉक्टर सूरी ने फिर भी आस नहीं छोड़ी थी, उन्हें लगता था कि सरकार प्रयास कर रही है और एक न एक दिन वे सारे युद्धबन्दी सैनिक अधिकारी और जवान वापस आएंगे और इसी आशा को लिए वह 1999 में इस दुनिया से चले गए यह कहते हुए ”Perhaps I will finally find peace in the grave.”

अच्छा जो Geneva Conventions हैं वह तो कहती हैं कि “Parties to the conflict shall communicate to each other the names of any prisoners of war who are detained till the end of proceedings or until punishment has been completed. By agreement between the parties to the conflict, commissions shall be established for the purpose of searching for dispersed prisoners of war and assuring their repatriation with the least possible delay.”

और 1971 की लड़ाई में भारत ने पाकिस्तान के 93,007 युद्धबंदियों को, जिनमें 72795 नियमित सैनिक और सैन्य अधिकारी थे ; को शिमला एग्रीमेंट के बाद वापस पाकिस्तान को सौंप दिया था पर भारत को ही अपने 54 जवान और ऑफिसर वापस नहीं मिले थे.

और यह सब बातें हवा-हवाई नहीं हैं …… फ्लाईट लेफ्टिनेंट विजय वसन्त ताम्बे 6 दिसम्बर से लापता थे पर पाकिस्तान ने उनकी गिरफ्तारी 5 दिसम्बर दिखाई थी! Maj AK Ghosh की फोटो 27-12-1971 को टाईम मैगज़ीन में छपी थी और वह 1972 में पाक द्वारा रिहा युद्ध बंदियों के साथ वापस नहीं आये.

अब तक तो शायद उनकी मृत्यु भी हो चुकी होगी. और मेजर अशोक सूरी के उनके पिता को कराची जेल से भेजे पत्र…… सेना और रक्षा मंत्रालय ने उनकी हैंडराइटिंग पहचान कर उनका जिंदा होना स्वीकार किया था. और इतना ही नहीं मोहनलाल भाष्कर, जो पाकिस्तान की जेल में रहे 1968 से 74 के बीच और उनकी स्वदेश वापसी 09-12-1974 को ; उन्होंने एक किताब लिखी ‘#मैं_पाकिस्तान_में_भारत_का_जासूस_था’ इस किताब में भी उन्होंने पर्याप्त सबूत दिए हैं भारतीय सैनिक अधिकारियों की युद्धबन्दी रूप में पाकिस्तान में मौजूदगी को लेकर.

किताब में पाकिस्तानी मेजर Ayaaz Ahmed Sipra भारतीय वायुसेना के एक अधिकारी गिल और भारतीय सेना के एक कैप्टन से बात करते हुए 1965 और 71 के करीब 40 युद्धबंदीयों का जिक्र किया जिनकी रिहाई असम्भव बताई! इस घटना को #Attock_Conspiracy के नाम से जाना जाता है और इसमें शामिल पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों को भारत को सूचना देने और जुल्फिकार अली भुट्टो की सरकार गिराने के मामले में 30 मार्च 1973 को गिरफ्तार भी किया गया ; कुल 59 पाकिस्तानी अधिकारी कॉन्सपायरेसी के दोषी थे जिसमें जिसमें 15 पाकिस्तानी आर्मी और 4 पाक एयरफोर्स के अधिकारियों को मुख्य अपराधी ठहराते हुए मृत्युदंड दिया गया .

Ayaaz Ahmed और Shafi बाद में अमेरिका भाग गए और वहाँ शफी को मनीष जैन, जो Sqn Ldr Mohinder Kumar Jain के दामाद हैं ; ने ट्रैक कर लिया ! और शफी ने उन्हें अनाधिकारिक रूप से सन 2000 में हुई उनकी टेलीफोन पर भारतीय Wg Cdr Gill से हुई सारी बात बता कर मोहिन्दर की उपस्थिति को स्वीकारा .

एक और पाकिस्तानी जनरल, General Riaz, Governor of NWFP ,जो बाद में एक दुर्घटना में मारे गए ; उन्होंने अश्विनी कुमार IPS, तत्कालीन IG , BSF को 1972 के म्यूनिख ओलम्पिक के दौरान व्यक्तिगत रूप से बताया कि Major Waraich पाकिस्तान की Dargai jail, Malakand जिले में बन्द है .

बहुत प्रयास हुए पर पाकिस्तान ने हर प्रमाण और साक्ष्य को झुठला दिया! जाने कितने सैनिक पागल हो गए और कितनों की मृत्यु हो गयी ….. उनका अपनी आज़ादी का स्वप्न स्वप्न ही रह गया…….

वे 54 नाम हैं…….
1. Major SPS Waraich IC-12712, 15 Punjab.

2. Major Kanwaljit Singh Sandhu IC-14590, 15 Punjab.

3. 2/Lt Sudhir Mohan Sabharwal SS-23957, 87 Lt Regiment.

4. Capt Ravinder Kaura SS-20095, 39 Med Regiment.

5. Capt Giri Raj Singh IC-23283, 5 Assam.

6. Capt Om Prakash Dalal SS-22536, Grenadiers.

7. Maj suraj singh IC-18790, 15 Rajput.

8. Maj AK Suri SS-19807, 5 Assam.

9. Capt Kalyan Singh Rathod IC-28148, 5 Assam.

10. Major Jaskiran Singh Malik IC-14457, 8 Raj. Rifles.

11. Major SC Guleri IC-20230, 9 Jat.

12. Lt Vijay Kumar Azad IC-58589 ,1/9 G Rg.

13. Capt Kamal Bakshi IC-19294, 5 Sikh.

14. 2/ Lt Paras Ram Sharma SS-22490, 5/8 G R.

15. Capt Vashisht Nath.

16. L/Hv. Krishna Lal Sharma 13719585, 1 JAK RIF.

17. Subedar Assa Singh JC-41339, 5 Sikh.

18. Subedar Kalidas JC-59, 8 JAK LI.

19. L/Nk Jagdish Raj 9208735, Mahar Regiment.

20. L/Nk Hazoora Singh 682211303

21. Gunner Sujan Singh 1146819, 14 Fd Regiment.

22. Sepoy Daler Singh 2461830, 15 Punjab.

23. Gnr Pal Singh 1239603, 181 Lt Regiment.

24. Sepoy Jagir Singh 2459087, 16 Punjab.

25. Gnr Madan Mohan 1157419, 94 Mountain Regiment.

26. Gnr Gyan Chand .Gnr Shyam Singh

28. L/Nk Balbir Singh . S B S Chauhan

28. Capt DS jamwal 81 Field Regiment

29. Capt Washisht Nath Attock.

30. Sq Ldr Mohinder Kumar Jain 5327-F(P), 27th Sqn.

31. Flt Lt Sudhir Kumar Goswami 8956-F(P), 5 Sqn..

32. Flying Officer Sudhir Tyagi 10871-F(P), 27th Sqn.

33. Flt Lt Vijay Vasant Tambay 7662 –F(P), 32th Sqn.

34. Flt Lt Nagaswami Shanker 9773-F(P), 32th Sqn.

35. Flt Lt Ram Metharam Advani 7812-F(P), JBCU.

36. Flt Lt Manohar Purohit 10249(N), 5 Sqn.

37. Flt Lt Tanmaya Singh Dandoss 8160-F(P), 26 Sqn.

38. Wg Cdr Hersern Singh Gill 4657-F(P), 47 Sqn.

39. Flt Lt Babul Guha 5105-F(P)

40. Flt Lt Suresh Chander Sandal 8659-F(P), 35th Sqn.

41. Sqn. Ldr. Jal Manikshaw Mistry 5006-F(P).

42. Flt Lt Harvinder Singh 9441-F(P), 222th Sqn.

43. Sqn Ldr Jatinder Das Kumar 4896-F(P), 3rd Sqn.

44. Flt Lt LM Sassoon 7419-F(P), JBCU.

45. Flt Lt Kushalpal Singh Nanda 7819-F(N), 35th Sqn.

46. Flg Offr. Krishan L Malkani 10576-F(P), 27th Sqn.

47. Flt Lt Ashok Balwant Dhavale 9030-F(P), 1st Sqn.

48. Flt Lt Shrikant C Mahajan 10239-F(P), 5th Sqn.

49. Flt Lt Gurdev Singh Rai 9015-F(P), 27th Sqn.

50. Flt Lt Ramesh G Kadam 8404-F(P), TACDE.

51. Flg Offr. KP Murlidharan 10575-F(P), 20th Sqn.

52. Naval Pilot Lt. Cdr Ashok Roy.

53. Sqn Ldr Devaprasad Chatterjee.

54. Plt Offr Tejinder Singh Sethi.

हम भी शायद उन्हें भूल ही चुके हैं पर जब आप जाईये नेशनल डिफेंस एकेडमी, खड़कवासला के डाईनिंग हॉल में तो एक टेबल दिखती है…….. एक खाली टेबल…! कहते हैं हर परम्परा के पीछे एक कहानी होती है; इस खाली टेबल की भी एक कहानी है……..

ये टेबल रखी है उन सैनिक अधिकारियों और जवानों के लिए जो 1965 और 1971की जँग में युद्धबंदी बनाये गए और लौट कर न आये, वे भुला दिए गए पर आशा है कि एक दिन वो लौट आएंगे .

टेबल पर रखे ‘प्लाकार्ड’ पर चन्द पंक्तियाँ लिखी हैं –
” यह टेबल सेट छोटा है, केवल एक के लिए, जो दिखता है किसी कैदी के कमजोर क्षणों को उसे बन्दी बनाने वाले सम्मुख. गुलदस्ते में रखा लाल गुलाब प्रतीक है उन सैनिकों के सबसे प्यारे लोगों, परिवारों और उनके साथियों के प्रेम और उनके एक दिन वापस लौट आने की आशा का.

गुलदस्ते पर बंधा रेड रिबन प्रतीक है उन जवानों की माँ के आँचलों और उनकी प्रेमिकाओं के हृदय का जो गवाह हैं उनके इंतजार के दृढ़ जिद्दी संकल्प के.

टेबल पर रखी मोमबत्ती बुझी है ; वह प्रतीक है उनके परिवारों के इंतजार की अदम्य भावना का. रोटी की खाली प्लेट पर रखा नींबू का टुकड़ा दर्शाता है उनके कड़वे भाग्य को और नमक प्रदर्शित करता है उनके परिवार के आँसुओ को!

उल्टा रखा गिलास बताता है कि वे इस रात हमारे साथ डिनर नहीं करेंगे और खाली कुर्सी कहती है वे यहाँ नहीं हैं पर याद रखो उन्हें! तुम सभी, जिन्होंने राष्ट्र की सेवा की है उनके साथ और उन्हें कभी भाई और साथी कहकर पुकारा है ; निर्भर रहे उनके पराक्रम और सहायता पर, उन पर भरोसा किया, वे तुम्हें नहीं भूले हैं. तुम उन्हें याद रखो तब तक जब तक वह लौट कर घर नहीं आते.

Making India

दिल में हूक उठती है यार …..क्या बीती होगी उनपर और उनके परिवारों पर..! डियर गुरमेहर कौर कम्युनिस्टों के हाथ का खिलौना बनकर नाचने से पहले सोचा होता एक बार ……….. बड़ी आसानी से तुमने कह दिया कि ” #Pakistan_did_not_kill_my_father_war_did .” अपने पिता के सर्वोच्च बलिदान को भी तुमने अपनी सस्ती लोकप्रियता के लिए बेच डाला ! तुम्हारे पिता मारे नहीं गए थे ; वो शहीद हुए थे…….
Capt. Mandeep singh,
Company Commander,
49th Air Defence Regiment attached to
4th battalion Rashtriya Rifles,
Victor Force.
Martyred in action during Operation Rakshak on 6th August 1999 in Kashmir.
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नहीं कोई बहस नहीं करना चाहते ….बस तुम्हें यह बताना था कि पाकिस्तान ने किया क्या है………!
I just want to show that what pakistan did…….!

#जय_हिन्द
#जय_हिन्द_की_सेनाएँ

– गौरव सिंह

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