मोदी जी या सुरेश प्रभु चाहे जितनी मेहनत कर लें ये सुधर नहीं सकते

संजय प्रकाश

रांची से नई दिल्ली…. ट्रेन नंबर 12877, गरीब रथ…. कोच G3…. तारीख 7 मार्च 2017….

शाम को भूख लगी, ड्रेस पहने जो बंदे घूम रहे थे उनको कहा- डिनर का आर्डर कब लोगे? कहा अभी आ रहा है.

बंदा आया…. बोनलेस चिली चिकन, और तीन परांठे या छ: परांठे…. रेट डेढ सौ….

मैंने कहा, मुझे सिर्फ दो परांठे खाने हैं…. पेंट्री ब्वाय ने तड़ से कहा – खाना है तो खाओ, पैसे डेढ सौ ही लगेंगे….

मैंने कहा, बेटा एक चिली चिकन और 12 परांठे दे दे…. उसने दे दिया, ये कहकर कि 6 परांठे के अलग से लगेंगे.

दो परांठे ही खाए थे कि वो आया और कहने लगा सर पैसे दो…. मैंने कहा मीनू ले आ….

आधे घंटे तक कोई नही आया…. मैंने टीटीई को कहा कि पैन्ट्री मैनेजर को कंप्लेंट बुक के साथ भेजो.

खैर पैंट्री मैनेजर आया…. मैंने उसे कहा- तुम्हारे मीनू में 97 रूपए का चिली चिकन और 9 रूपए प्रति परांठा का रेट है, तो दो परांठे और एक चिली चिकन का डेढ सौ कैसे हो गया? और तो और पानी…. चम्मच…. नैपकिन कहां है?

कुछ देर बाद हर किसी को पानी की बोतल दे कर गया है….

कुल मिलाकर स्थिति ये है कि मोदीजी या सुरेश प्रभु चाहे जितनी मेहनत कर लें ये सुधर नही सकते…. जनता को जागरूक होना पड़ेगा.

सुबह के नौ बजे हैं… एक-दो घंटे मे ट्रेन दिल्ली पहुंच जाएगी…. न पेंट्री का मैनेजर आया है, न पैसे लेने कोई आया है.

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