नीमच : मेरा देश बदल रहा है, आगे बढ़ रहा है

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देश प्रगति कर रहा है, और बहुत तेज़ी से भविष्य में प्रगति करेगा. इस सत्य में शंका की कहीं कोई गुन्जाइश नहीं है. जो लोग यह सोचते हैं कि भारत तो एक गरीब देश है, यहाँ पर रहने योग्य आधुनिक सुविधाओं का अभाव है, उन्हें अब अपने विचार बदल देना चाहिए.

मुझे पिछले दिनों मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्य मंत्री श्री वीरेन्द्र कुमार सकलेचा जी की स्मृति में आयोजित व्याख्यान माला के अवसर पर जावद आने का मौका मिला.

हमको पास ही नीमच शहर के होटल वृन्दावन में ठहराया गया. नीमच से मेरा ताल्लुक़ 1958-1960 के समय से रहा है, जब मैं मन्दसौर डिग्री कालेज में बी०एस-सी० का छात्र था.

उस समय यह पूरा क्षेत्र अफीम उत्पादन के लिए पूरी दुनिया में विख्यात था. लगभग छ: दशक पहिले के नीमच में और आज के नीमच में जमीन आसमान का फर्क है.

जिस स्थान पर मैं ठहरा था यह इतना सुन्दर और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अत्यन्त उम्दा स्थान है. पड़ोस में ही भादवा माता का पवित्र स्थान है, गांधी सागर बाँध, पशुपतिनाथ का तीर्थ आसपास ही हैं.

प्राकृतिक सौन्दर्य, बदलता हुआ ग्रामीण परिवेश, मालव संस्कृति और यशोधर्मन की ऐतिहासिक धरोहर, तात्या टोपे की युद्ध स्थलि – सबकुछ तो है यहाँ पर.

अगर इसे क़रीने से पर्यटन के लिए विकसित प्रचारित किया जाए तो यह पूरा क्षेत्र बदलते भारत का आइना बन सकता है. फिर यह क्षेत्र तीन तीन मुख्यमंत्रियों (श्री कैलाश नाथ काटजू, श्री वीरेन्द्र कुमार जी सकलेचा और श्री सुन्दर लाल जी पटवा ) और युग कवि बाल कवि बैरागी की कर्म स्थली भी रही है.

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