क्या ये तस्वीर गर्व से अपने रिश्तेदारों या परिचितों को दिखाएंगे इन बच्चों के मां-बाप!

उपरोक्त चित्र देखा तो एक सवाल दिमाग में कौंध गया. इनके मां-बाप के पास भी तो यह फोटो पहुंचा ही होगा. और जहां तक व्यक्तित्व से हैसियत की पहचान हो, ये गरीब घर की लड़कियां तो हैं नहीं कि इन्हें कोई पैसे देकर मजबूरी में यह काम करवाए. और बड़ी ही खुशी से ऐसा पोस्टर ले कर पोज़ दे रही हैं.

मां-बाप को बच्चों की फोटो प्रसिद्ध होने में या प्रसिद्ध करने में खुशी होती है, रोज कहीं-कहीं कोई न कोई अपनी संतान की कोई उपलब्धि के फोटो डाल देता है FB/ WA पर और उस पर ढेरों आशीर्वाद और प्रोत्साहन आ जाते हैं.

क्या यह फोटो भी उस कैटेगरी का है कि इनके माता पिता गर्व से अपने रिश्तेदार या परिचितों में सरकुलेट करें? शायद नहीं, लेकिन और एक बात भी कहना चाहता हूँ. इन लड़कियों की बॉडी लैंग्वेज यह बताती है कि उनके घरों में इस फोटो पर कोई सवाल नहीं उठेंगे. मां-बाप उनके साथ हैं. उनका विरोध नहीं, सपोर्ट होगा.

सुख-दुख में या संकट में भी मां-बाप का संतान का साथ देना स्वाभाविक है, लेकिन जहां सही गलत का सवाल पैदा होता है वहाँ समाज के लिए प्रश्न खड़ा होता है. गलत काम में संतान को अगर मां-बाप सपोर्ट करते मिलेंगे तो आगे चलकर समाज के लिए भी यह समस्या बन जाते हैं, केवल उनके घर का मामला बनकर नहीं रह जाता.

कुछ और किस्से बताता हूँ. इनका संबंध JNU से नहीं है लेकिन संज्ञान लेने जैसी बात है. शहर-एरिया न पूछें, जिन्होंने ये बताए वे लोग भी मुझे पढ़ते हैं और किस्सा पहचान जाएँगे. बाकी निजता आवश्यक.

पहले किस्से में कॉलोनी में एक खाली प्लॉट था उसे कब्जाने की शांतिपूर्ण कोशिशें हो रही थी. इन सज्जन ने खुद उसे साफ करवाया और उसे गार्डन में बदल दिया. उसका अच्छा उपयोग हो रहा था.

एक रात इनको वहाँ कुछ संदेहास्पद हलचल दिखी तो औरों को जगाकर नीचे आए. देखा तो कॉलोनी की एक लड़की एक शांतिदूत के साथ गुत्थमगुत्था थी. लड़के को ज़रा ‘समझाया’ तो लड़की उग्र हो गई.

इस पर उसके पिता को बुलाया गया तो उसने स्वतन्त्रता की बात छेड़ी, मेरी लड़की कुछ भी करे, आप को क्या? दूसरे किस्से में ऐसा ही कुछ है, वहाँ दो लड़कियां और एक शांतिदूत था, लेकिन लड़कियों के पिताओं की प्रतिक्रिया वही थी.

JNU अधिक चर्चा में है तो नाम उसका आ रहा है लेकिन कई सारी जगह ये अवस्था है. जो JNU से नहीं या जिनके बच्चे JNU में नहीं, उनको भी बहुत खुश होने का कारण नहीं. लड़के हो या लड़कियां, घर में ऐसी हरकतों पर कोई रोकटोक नहीं. सपोर्ट भी है.

खोज का विषय ये रहेगा कि ऐसे बच्चे आगे जाकर क्या बनते हैं? उनके मां-बाप का बैकग्राउंड क्या रहा कि ऐसी हरकतों को रोक नहीं रहे हैं? वे खुद आज कहाँ हैं?

क्या किसी सोशियलोजिस्ट के लिए यह विषय खोज का नहीं? Freakanomics अगर आप ने पढ़ी है तो कौन सी समस्याओं के बीज कहाँ से निकल आते हैं यह समझ में आता है.

क्या यहाँ किसी को ये समस्या समझ में नहीं आती या इसके लिए गाइड बनने के लिए कोई प्रोफेसर तैयार नहीं? हो सकता है अमेरिका के किसी यूनिवर्सिटी में geopolitics में India में स्पेशलायज़ेशन करने वाले किसी स्टूडेंट की थीसिस का यह विषय होगा. ऎसी थीसिस बनती हैं वहाँ.

इसके पहले एक उकसाने वाली पोस्ट डाली थी – JNU के students के parents कैसे people होते हैं? प्रतिक्रियाएँ जैसे अपेक्षित थी, वैसी आई. कुछ पूर्व और कुछ करंट विद्यार्थियों को बुरा लगा, वह भी अपेक्षित था.

इस पर मुझे एक बात याद आई – मेरे पास एक गुजराती तफ़सीर है जिसमें सूरह माइदा के आयत 53-55 को स्पष्ट करने के लिए एक उदाहरण दिया है.

हजरत शोएब को एक दिन बताया गया कि उसके कबीले पर अज़ाब नाजिल होगा. ह शोएब ने पूछा खता क्या हुई ऐसी? जवाब आया कि बर्ताव, चालचलन बिगड़ गया है आप लोगों का. लोग सही राह पर नहीं है.

ह शोएब ने दुहाई दी कि मालिक ऐसा हरगिज नहीं है, ज़्यादातर लोग सही लोग है. जवाब आया कि पता है लेकिन उनका दोष है कि उन्होने गलत लोगों को अपने बीच रहने दिया, उनसे व्यवहार रखा, जबकि उन को भगा देना चाहिए था. इसलिए अज़ाब में आप भी जलेंगे.

यहाँ आप मुझे तो कोस सकते हैं अपनेपन के अधिकार से, लेकिन कहीं जॉब इंटरव्यू में जाएँगे तो क्या? हो सकता है आप को कोई कुछ नहीं कहेगा या पूछेगा क्योंकि बुलाएँगे या नहीं, यही बड़ा सवाल उठता है.

खैर, बात इस मां-बाप जनरेशन की है जो अपने बच्चों का उल्टे सीधे हरकतों में सपोर्ट करते हैं. किस पोजीशन में है यह जनरेशन, भारत के वर्तमान और निकट भविष्य पर उसका क्या प्रभाव है और उनकी ये अगली पीढ़ी क्या गुल खिलाएगी?

जनरल गोल-गोल बात सबके समझ में नहीं आती इसलिए you need one peg to hang the issue upon. आज का सब से notorious नाम JNU बना है, जिसे लेते ही और कुछ समझाना नहीं पड़ता इसलिए JNU लिखना effective communication के लिए कारगर था. Nothing personal और JNU ही नहीं, education itself is an Augean stable.

बाकी जो बड़े सामाजिक मुद्दे का उल्लेख किया है, आशा है उस पर भी शोध विमर्श होगा. कृपया ये लड़कियां किस कॉलेज की हैं इस पर बाल की खाल न उधेड़ी जाए. लेख का या चर्चा का मुद्दा वो नहीं.

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