गुरमेहर पर गुरु की मेहर नहीं, LGBT की जमात खड़ी करनेवाले वामपंथियों का मायाजाल है

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फिल्म बॉर्डर में एक सीन था जब सेना में नए नए भर्ती हुए अक्षय खन्ना को दुश्मन पर गोली चलाने का आदेश मिलता है तो उसके हाथ काँप जाते हैं, यही नहीं पहली बार दुश्मन की लाश देखकर उसे उल्टी हो जाती है…

हमारे देश के नौजवानों यानी नए नए बने जवानों की हालत भी कुछ ऐसी ही है… कारण है उनकी परवरिश… उन्हें अपने सनातनी संस्कारों और पराक्रमी इतिहास से वंचित रख वामपंथियों की फैलाई हुई लिजलिजी परवरिश मिल रही है. ऐसे में उनका आत्मबल विकसित होने के बजाय विकसित हो रहा है मेकाले का पढ़ाया हुआ दुर्बल ज्ञान, वामपंथियों का फैलाया हुआ झूठा मायाजाल…

केवल सोशल मीडिया पर विरोध में लिखे लेख के अलावा, आवश्यक है हमारे बच्चों में बचपन से ही वो साहस, शक्ति और आत्मबल पैदा करना… उन्हें ये बताना कि अहिंसा परमो धर्म के आगे की पंक्ति जो इन वामपंथियों ने काट डाली है उसे पूरा करते हुए दोहराना है कि  धर्म हिंसा तथैव च: .

गुरमेहर के बारे में सोशल मीडिया पर यह बात पता चली –

“गुरमेहर कौर की टाइमलाईन देखेंगे तो हर 14 अगस्त को उसने पाकिस्तान की स्वतंत्रता की बधाई दी है लेकिन अगले दिन 15 अगस्त को भारत की आजादी पर कुछ नही लिखा… जहर अंदर तक भरा गया है …2 साल में पिता शहीद हो गए ..माँ कोटे से मिले पेट्रोल पम्प पर ही ध्यान देती रही …पैसो की कोई कमी नही ..1.3 करोड़ मिले ..शहीद पिता की नौकरी तक पूरी सेलेरी….. 76% के बाद भी शहीद कोटे से श्रीराम कालेज में एडमिशन मिला जहां 99.9% कट ऑफ़ है. कुल मिलाकर कैम्पस में बैठे कामुक वामपंथी भेड़ियों के लिए गुरमेहर एक परफेक्ट शिकार थी..

शिकार हाँ… हाँ वामपंथियों द्वारा फैलाए गए मायाजाल का एक और शिकार…

आप ज़रा गौर कीजिये कैसे सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से लगातार सेना को टारगेट बनाकर कोई ना कोई मुद्दा बनाया जा रहा है. सेना का मनोबल और जनता का सेना के प्रति भरोसा तोड़ने के लिए की जा रहे षडयंत्र के लिए बहुत व्यवस्थित तरीके से योजनाएं बनाई जा रही है.

पहले तेज बहादुर यादव और अब गुरमेहर… तब भी कहा था, अब भी कहती हूँ अपनी नाक तेज़ करो, षडयंत्र की दुर्गन्ध को पहचानो.. उनके वार का पलटवार यही है कि उनके फैलाए दुष्प्रचार का उन्हीं पर प्रयोग करो…

अपने बच्चों के सामने वामपंथियों द्वारा बनाए गए पाठ्यक्रम को झूठा साबित कर उन्हें अपने इतिहास सच्ची गाथा सुनाओ…  उन्हें इतने कोमल और लिजलिजे मत बनाओ, वरना वो आपके देश में LGBT की जमात खड़ी कर देंगे… उन्हें चाणक्य की नीति पढ़ाओ, उन्हें भारतमाता के लिए जान की बाज़ी लगाने वाले शहीदों की कहानियाँ सुनाओ…

उन्हें कन्हैया कुमार, उमर खालिद और गुरमेहर के चेहरे दिखाओ और फर्क समझाओ कि ऐसे लोगों पर गुरु की मेहर नहीं होती जो मातृभूमि की इज्जत करना नहीं जानते, और चंद रुपयों की खातिर दुश्मनों के आगे अपना ज़मीर बेच आते हैं…

वैसे फिल्म के अंत में फिर अक्षय खन्ना दुश्मनों की धज्जियां उड़ा देता है… क्योंकि गुरु की मेहर गुरमेहर जैसे कमज़ोर युवाओं पर नहीं, गुरु की मेहर उन लोगों पर है जिनके मजबूत कन्धों पर भारतमाता की स्वतंत्रता और लाज संभालने की ज़िम्मेदारी है.

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