ए ज़िंदगी गले लगा ले, हमने भी तेरे हर एक गम को गले से लगाया है… है ना!

MA JIVAN SHAIFALY ANAND math YATRA 3

किनारे पर जड़, ठंडी, धूसर चट्टानों से टकराकर
चूर हो जाता है जिसका अस्तित्व
ज्वार भाटे के साथ चढ़ती उतरती
समंदर की उन लहरों को निहारते हुए…
बस यही ख़याल आया

कि जीवन के समंदर में भी
आनंद की लहरें भी यूं ज्वार भाटे सी आती है…
ब्रह्माण्ड की निर्मल और निर्मम लीलाओं के बीच
जीवन ने ऐसे ही है अपना अस्तित्व बनाया

जैसे हाहाकार करता समंदर आता तो है दौड़ कर
और किनारे पर आकर दम तोड़ देता है
सुख और दुःख की लहरें भी
कुछ ऐसे ही हाहाकार मचाती है सतह पर
और अनुभव अपने निशान छोड़ देता है

लेकिन समंदर की गहराई में जैसे सबकुछ स्थिर है, शांत है
वैसे ही जीवन को गहराई से देखो
तो सुनाई देगा प्रकृति का शांत और शाश्वत संगीत…

जीवन देखना है तो समन्दर को निहारो..
और गुनगुनाओ जीवन का शाश्वत गीत…
ए ज़िंदगी गले लगा ले…
हमने भी तेरे हर एक गम को गले से लगाया है… है ना!

(रमाकांत तिवारी की नीचे दी गयी अंग्रेज़ी कविता का हिन्दी भावानुवाद)

BEHOLD O SEA !

On thy cold grey stones,
Strike and shatter thy might,

The tides and surfs, behold O Sea !
Rise and fall in delight.

Moods of the climes,
Joys and woes of mankind,

Serene universe, impassioned nature,
Heigh ho ! cheered with thy rhymes.

Rush and die, turbulent O Sea !
Lies underneath, tranquil eternity,

Rhythms of nature so everlasting,
Lively and sweeping all fraternity.

(Composed by Ramakant Tiwari on June 17, 1982 )

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