सारी असहिष्णुता उन्हें हमारे देश में ही नज़र आती है!

अस्पताल में आज सुना, एक मरीज एक नर्स से पूछ रही थी कि वह कहाँ से है. नर्स ने बताया, स्पेन से. स्पेन में कहाँ से? उसने बताया – कोर्डोबा से…

फिर वह कोर्डोबा के बारे में बताने लगी – यहाँ दुनिया का एकमात्र ऐसा चर्च है, जो एक मस्जिद के अंदर है…

मैं उसके नज़दीक खड़ा था, उसकी बात ध्यान से सुनने लगा…

उसने बताया, स्पेन पहले अरब था… बाद में कैथोलिक्स ने वहाँ कब्ज़ा कर लिया और मस्जिद तोड़ कर कैथेड्रल बना दिया…

मैंने उस नर्स की नेम-प्लेट देखी, मुस्लिम नहीं थी… क्रिश्चियन ही थी. पर आज के यूरोपियन क्रिश्चियन समाज में बहुत से लोग या तो किसी अपराध बोध से ग्रस्त हैं या मुस्लिम समुदाय के प्रति विशेष सॉफ्ट कार्नर रखते हैं… वर्ना ऐसे नैरेटिव को स्वीकार करने और दुहराने का क्या मतलब था?

फिर मैंने कोर्डोबा का नाम गूगल किया और आगे पढ़ा. वहाँ एक कैथेड्रल है जिसे मॉस्क-कैथेड्रल कहा जाता है. वहाँ 6ठी सदी से एक कैथेड्रल था.

711 ईस्वी में जब मुसलमानों ने स्पेन पर कब्ज़ा किया तो इस कैथेड्रल पर भी कब्ज़ा कर लिया. 784 ईस्वी में वहाँ के अमीर अब्द-अल-रहमान ने वह कैथेड्रल तुड़वा कर वहाँ एक बहुत बड़ी मस्जिद बना दी.

1236 ईस्वी में जब ईसाईयों ने मुसलमानों से स्पेन को वापस जीता तो इस मस्जिद को वापस कैथेड्रल में बदल दिया. इसकी मीनारों को घंटाघर में बदल दिया… पर वह कैथेड्रल अब भी ग्रैंड-मॉस्क के नाम से जाना जाता है…

आज भी स्पेन के मुसलमान उस कैथेड्रल में नमाज पढ़ने दिए जाने की मांग को उठाते रहते हैं… बड़े सलीके और तहजीब से.

स्पेन की इस्लामिक कौंसिल ने वेटिकन को पत्र लिखा, कि मुसलमानों को उस कैथेड्रल में नमाज पढ़ने की अनुमति दी जाये…

और साथ में यह भी जोड़ दिया की वे कोई हक़ नहीं जता रहे, वापस कब्ज़ा करने के प्रयास का तो सवाल ही नहीं है… वे सिर्फ उस इमारत में मौजूद यूनिवर्सल करैक्टर का सम्मान करना चाहते हैं…

खैर, ये चिकनी-चुपड़ी बातें एक तरफ, वेटिकन के लिए यह खेल पुराना है. चर्च ने ऐसी किसी भी मांग को जरा भी तूल नहीं दी. बिलकुल साफ़ नकार दिया…

2010 में ऑस्ट्रिया से आये 6 मुस्लिम टूरिस्ट ने क्रिसमस के दिन वहाँ नमाज़ पढ़ने की कोशिश की… चर्च के सिक्योरिटी गार्ड ने उनकी ठुकाई कर दी और फिर अंदर करवा दिया.

चर्च ने साफ़ कह दिया कि इस कैथेड्रल में किसी भी दूसरे धर्म के लिए कोई जगह नहीं है…

सेक्युलरिज्म और लिबरलिज्म की बीमारी यहाँ भी गहरी धंसी है. वह नर्स बिना उस स्थान की पूरी कहानी जाने दुहरा रही थी कि स्पेन पहले अरबों का था, बाद में कैथोलिकों ने वहाँ कब्ज़ा कर लिया और मस्जिद को तोड़ कर कैथेड्रल बना दिया.

पर उनके धार्मिक लीडरशिप को कोई शंका नहीं है. वे इस मामले में जरा भी समझौता करने को तैयार नहीं हुए.

श्रीराम जन्मभूमि की तरह वहाँ किसी को शंका नहीं थी कि वहां क्या बनना चाहिए और कैसे बनना चाहिए….

और उनके सामने मुसलमान भी कितनी तहज़ीब और तमीज से पेश आते हैं… सारी असहिष्णुता उन्हें हमारे देश में ही नज़र आती है…

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