वाशिंगटन. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले के बाद तथाकथित अर्थशास्त्रियों से भरी पडी कांग्रेस, भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कुछ भी बुरी कामना करती रहे लेकिन दुनिया भारतीय अर्थव्यवस्था को बेहद मज़बूत मान रही है.
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है और नोटबंदी के कारण कुछ समय की नरमी के बावजूद वह वैश्विक परिदृश्य में एक आकर्षक चमकता स्थान बनी रहेगी.
आईएमएफ ने भारत पर अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि चालू वित्त वर्ष के दौरान भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है और उसके बाद के वर्ष में यह 7.2 प्रतिशत रह सकती है.
आईएमएफ के भारत मिशन प्रमुख पॉल केशिन ने कहा, ‘भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है और वैश्विक परिदृश्य में यह एक चमकता हुआ आकर्षक स्थान बनी रहेगी.’
केशिन ने कहा कि वर्ष 2014 के आखिरी महीनों में विश्व बाजार में कच्चे तेल के दाम घटकर आधे होने के बाद से भारत में आर्थिक गतिविधियां तेज होने लगीं, उसके चालू खाता और वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ और मुद्रास्फीति में भी गिरावट आई.
उन्होंने कहा कि इसके साथ ही वित्तीय क्षेत्र में सरकारी घाटे पर अंकुश, कर्ज पर नियंत्रण के जरिये वित्तीय मोर्चे पर लगातार सुदृढीकरण करने तथा मुद्रास्फीति कम करने के मौद्रिक नीति उपायों से देश के वृहदआर्थिक स्थायित्व को मजबूती देने में मदद मिली है.
केशिन ने इस बात पर भी गौर किया कि भारत सरकार ने महत्वपूर्ण आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने में उल्लेखनीय प्रगति की है. इससे मजबूत और सतत् आर्थिक वृद्धि में मदद मिलेगी.
उन्होंने कहा कि वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) के प्रस्तावित क्रियान्वयन से निकट भविष्य में भारत की आर्थिक वृद्धि दर को 8 प्रतिशत से ऊपर पहुंचाने में मदद मिलेगी. जीएसटी क्रियान्वयन से भारत में राज्यों के बीच सामान, सेवाओं की आवाजाही और उत्पादन क्षमता बेहतर होगी.
हालांकि, उन्होंने कहा कि इसमें संतोष करके बैठ जाने की ज्यादा गुंजाइश नहीं है. एक सवाल के जवाब में उन्होंने माना कि नोटबंदी की वजह से नकदी की भारी तंगी के चलते आर्थिक गतिविधियां गड़बड़ाई हैं.
उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने इस दौरान भुगतान समस्याओं को दूर करने के लिये कई उपाय किये. कुछ समय के लिये पुराने नोटों के इस्तेमाल की अनुमति दी गई. ईंधन और कृषि कार्यों के लिये पुरानी मुद्रा के इस्तेमाल की अनुमति देकर नोटबंदी के नकारात्मक प्रभाव को कम करने का प्रयास किया गया.
केशिन ने कहा, ‘इसलिए हमें लगता है कि आर्थिक नरमी सीमित दायरे में रहेगी और लंबी नहीं खिंचेगी. देश का वित्तीय तंत्र इससे अछूता रहेगा. हां, बैंकों के कर्ज भुगतान पर ध्यान देना होगा. विशेषतौर से बैंकों की गैर-निष्पादित राशि (एनपीए) के उच्चस्तर को देखते हुए इस पर गौर करना जरूरी है.’