फर्जी मुठभेड़ करने वाली फ़रार महिला आईपीएस अफ़सर बर्खास्त

नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने दो वरिष्ठ आईपीएस अफसरों को सेवा से हटा दिया. दोनों आईपीएस अधिकारी महिला हैं और दोनों ही लंबे समय से अपनी ड्यूटी से बिना बताए गायब हैं. इनके खिलाफ विभागीय जांच भी जारी है.

इन अधिकारियों में 1993 बैच की उत्तराखंड कैडर की आईपीएस ज्योति बेलूर तथा 1991 बैच की महाराष्ट्र कैडर की आईपीएस मेरी लुई फर्नांडिस शामिल हैं.

बेलूर गाजियाबाद जिले के भोजपुर में फर्जी मुठभेड़ की आरोपी हैं. वर्ष 1996 में हुए इस एनकाउंटर में पुलिस ने 4 लोगों को मार गिराया था. हालांकि बाद में मामले की सीबीआई जांच हुई, तो पुलिस के दावे झूठे निकले और एनकाउंटर फर्जी पाया गया.

ज्योति बेलुर उस वक्त मोदीनगर में सर्कल अधिकारी के रूप में तैनात थीं. इस केस में उन्हें कई बार कोर्ट ने बुलाया लेकिन वह तब से लंदन में हैं. इस केस में बुधवार को ही कोर्ट ने उन्हें सजा सुनाई है.

सीबीआई जांच में यह बात भी सामने आई थी कि मुठभेड़ में मारे गए युवक जसवीर के शरीर में जो गोली मिली, वह वेलूर के सर्विस रिवाल्वर से चली थी. वेलूर अभी फरार बताई जा रही हैं, जिन्हें पकड़ने के लिए सीबीआई कोर्ट ने स्पेशल टीम गठित करने का आदेश दिया है.

गृह मंत्रालय ने ज्योति बेलूर को बर्खास्त कर दिया किया है. बेलूर ब्रिटेन में हैं और वहां किताबें लिख रही हैं. कोर्ट ने इनके खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी कर पकड़ने का आदेश दिए हैं.

वहीं, मेरी लुई फर्नांडिस 2005 से ही नौकरी से नदारद थी और सरकार को बिना जानकारी दिए अमेरिका में रह रही थी.

उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में कई और अधिकारियों पर गाज गिर सकती है. पीएमओ सूत्रों के अनुसार, जांच और आधिकारिक रिकार्ड देखने के बाद लगभग 110 आईएएस और आईपीएस अधिकारी सरकार के रडार पर हैं.

समझा जाता है कि पीएम नरेंद्र मोदी के आदेश के बाद इस दिशा में तेज पहल हुई है. इनमें अधिकतर ऐसे हैं जिनके खिलाफ गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप हैं या विभागीय कानून को नजरअंदाज करते हुए मनमानी करते पाए गए हैं. इन 110 में लगभग दो दर्जन ऐसे आईएएस अधिकारी भी हैं जो पिछले कुछ सालों से बिना सूचना के गायब हैं.

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