मोदी को यूपी से बाहर का बताने वाली प्रियंका रोबर्ट वाड्रा खुद फेल हैं मातृभाषा हिन्दी में

“उत्तर प्रदेश की मिट्टी” में पैदा होने से याद आया.

बात 1993 की है. मैं जे एन यू में अपने छात्रावास में बैठा अख़बार पढ़ रहा था. अचानक मेरी नज़रें एक खबर पर रुकीं. उसमें लिखा हुआ था कि उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में जन्मे जवाहरलाल नेहरू की पर-पौत्री, इलाहाबाद में ही जन्मी इंदिरा गांधी की पौत्री, और इलाहाबाद के ही राजीव गाँधी की पुत्री प्रियंका गाँधी, हिंदी की परीक्षा में फ़ेल हो गई हैं.

दरअसल प्रियंका दिल्ली के जीसस एंड मैरी कॉलेज में B.A. (Psychology Hons.) की छात्रा थीं. उस समय दिल्ली विश्वविद्यालय के सभी छात्रों को Basic Hindi Test का एक पेपर क्लियर करना पड़ता था. प्रियंका गांधी ने भी वो पेपर दिया, पर फ़ेल हो गईं.

अख़बार में आगे लिखा हुआ था कि डिग्री हासिल करने के लिये प्रियंका को supplementary परीक्षा में appear होना पड़ेगा. यदि प्रियंका उस परीक्षा में पास हो जाती हैं तो बहुत बढ़िया, अन्यथा अगले साल उन्हें दुबारा बेसिक हिंदी का पेपर देना पड़ेगा.

अगर वह उस परीक्षा में भी पास होने में नाकामयाब रहती हैं तो उन्हें B.A. (Psychology Hons.) की डिग्री नहीं मिल सकेगी और दिल्ली विश्वविद्यालय उन्हें सिर्फ B.A. (Pass) की डिग्री दे कर विदा करेगा.

अंततः हुआ वही जिसकी आशंका थी. प्रियंका गाँधी बेसिक हिंदी की परीक्षा पास करने में नाकामयाब रहीं और उन्हें B.A. (Pass) की डिग्री से ही संतोष करना पड़ा.

आज अख़बार में जब यह पढ़ा कि बेसिक हिंदी के पेपर में फ़ेल होने वाली यह औरत, स्वयं को हिंदी-भाषी उत्तर प्रदेश की बेटी और गुजरात में जन्मे पर हिंदी भाषा में पारंगत और उत्तर प्रदेश से ही सांसद मोदी जी को उत्तर प्रदेश के लिए बाहरी बता रही थी, तो अनायास ही मुझे 1993 की वह ख़बर याद आ गई.

सोचा, मीडिया वाले तो बताएँगे नहीं, तो क्यों न मैं ही बता दूँ. उत्तर प्रदेश के मतदाताओं को यह बात पता होनी चाहिए.

(यह लेख सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसके मूल लेखक का नाम ज्ञात नहीं हो सका है, कृपया किसी को लेखक की जानकारी हो तो सूचित करें)

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