“बूझ रहे हैं, आप काहे अलबलाएल हैं…”

दो ख़बरें हैं….

समस्तीपुर से एक राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता शिक्षक (प्रधानाध्यापक) सौरभ कुमार को पुलिस ने दो अन्य लोगों के साथ ‘शराब’ पीने के जुर्म में गिरफ्तार कर लिया. हालांकि, सौरभ का कहना है कि उनको फंसाया गया है, लेकिन तुगलकी राज में अब उनकी नौकरी तो गयी ही, 10 साल के लिए जेल भी होगी ही.

वहीं, दरभंगा में 210 कार्टन शराब पकड़ी गयी, साथ ही तुगलक कुमार ने यह कानून भी बना दिया कि बिहार राज्य के कर्मचारी अब अगर दूसरे राज्यों में भी शराब पिएंगे, तो सज़ा के हक़दार होंगे. (किस मशीन या इलहामी टोटके से वह इसका पता लगाएंगे, यह अलग मुद्दा है).

अब, मज़े (और सदमे) की बात देखिए कि बिहार में शराब कहीं से बंद नहीं है, खुलकर बह रही है, होम डिलिवरी हो रही है. तुगलक कुमार के मंत्री और विधायक पकड़ में नहीं आए हैं, लेकिन उनकी पार्टी के नेता शराब कांड में (नवादा के) धरा चुके हैं, जिस पर कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्होंने तुरंत उस नेताजी को छुड़ा दिया था- पाक-साफ.

सबसे कमाल के बिहारी हैं. दूसरे राज्यों में गाली-गलौज सुनकर पेट पालते बिहारी. बंगलोर और हैदराबाद में साफ-सुथरे मॉल में शॉपिंग करते बिहारी. दिल्ली में रिक्शा चलाते बिहारी. मुंबई में माल ढोते बिहारी.

केरल और काशी में जीवन गुजारते बिहारी. छठ में कुत्ते-बिल्ली की तरह लौटते बिहारी. गगनविहारी बिहारी. पटना की सड़ाध से नाक पर रूमाल रख-ओ शिट कहते बिहारी…. पंजाब में मौसमी मजदूरी करते बिहारी.

10 करोड़ में 3 करोड़ बाहर रहनेवाले बिहारी. दिल्ली में कजरी जैसे जोकर और नासूर को जितानेवाले बिहारी. बिहार में 15 साल तक लालू यादव का जंगलराज झेलकर, उसे फिर से वापस लानेवाले बिहारी.

बिहार के लाल चुप हैं. साहित्यकार, वैज्ञानिक, समाज-सुधारक, विचारक… सभी. सभी के मुंह में दही जमा है. व्यक्तिगत स्वातंत्र्य और आज़ादी गयी तेल लेने.

लोग शराबबंदी का समर्थन करते हुए भी इस जाहिलाना, बेवकूफाना और तुगलकी निजाम का विरोध कर सकते हैं, यह अहमक बिहारियों को समझ नहीं. आप अगर कुछ भी कहेंगे, तो एक तिरछी मुस्कान आप पर वापस फेंक दी जाएगी- “बूझ रहे हैं, आप काहे अलबलाएल हैं…”.

दरअसल, बिहार और बिहारी, जहालत और सड़ांध की उस कीच में गर्दन तक फंसे हैं, जहां व्यक्तिगत स्वाधीनता, आज़ादी और प्रजातंत्र वगैरह की बातें ही बेमानी, बदमज़ा और बेहूदा हैं.

जिस राज्य की अधिकांश आबादी किसी तरह जिंदा रहने को संघर्ष कर रही हो, कुत्तों की तरह पैदा करने और सूअरों की तरह ज़िंदा रहने में ही गौरव मान रही हो, वहां तुगलक कुमार ही राज करेंगे.

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