राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस मसले पर मीडिया की चुप्पी, सिर्फ दलाली नहीं देशद्रोह का मामला

बीती 16 फरवरी को देश की प्रतिष्ठित समाचार एजेंसी ‘भाषा’ ने एक समाचार जारी किया था कि असम के गोलपाड़ा में विदेशी अधिकरण (Foreigners Tribunal) के एक सदस्य (डिस्ट्रिक्ट जज) को वकीलों द्वारा पीटा गया.

‘भाषा’ के मुताबिक़ पुलिस ने कहा कि अधिकरण के सदस्य जस्टिस अजय कुमार फुकन ने 9 फरवरी को अपना विचार रखा था कि उनकी अदालत में 13 डी (संदिग्ध) मतदाताओं में से आठ विदेशी (बंगलादेशी) थे.

इन आठ व्यक्तियों के वकील और कुछ अन्य वकीलों ने इस फैसले पर फुकन के अदालत परिसर में उनसे बहस कर ली और उन्हें पीटा एवं अदालत में फर्नीचर भी तोड़ डाले. जब सुरक्षाकर्मी उन्हें गिरफ्तार करने के लिए दौड़े तो वे भागने में सफल रहे.

जस्टिस फुकन ने इस हमले के बाद गोलपाड़ा सदर पुलिस थाने में एक एफआईआर दर्ज कराई जिसके बाद पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान शुरू कर दिया है.

सवाल यह है कि कि देश की विख्यात न्यूज़ एजेंसी द्वारा जारी किए जाने के बाद भी यह समाचार मुख्यधारा के समाचार माध्यमों (मेन स्ट्रीम मीडिया) में क्यों नहीं दिखाया या प्रकाशित किया गया.

अभी चार वकील हमलावरों के नाम सामने आए हैं – मीर अब्दुर, शफीकुर इस्लाम, अनवर हुसैन और नूर्जामल इस्लाम.

चारों वकीलों ने जस्टिस फुकन पर इसलिए हमला किया क्योंकि फुकन ने इनके मुस्लिम क्लाइंट को बांग्लादेशी घोषित कर दिया और असम से वापस बांग्लादेश भेजने का हुक्म दिया.

जस्टिस फुकन के इस निर्णय से ये चारों वकील भड़क गए और जज पर ही हमला कर दिया. ऐसे में संदेह व्यक्त किया जा रहा है कि ये चारों वकील भी कहीं बांग्लादेशी ही न हों.

उल्लेखनीय है कि काँग्रेस शासनकाल में असम में सालों से बांग्लादेशियों की घुसपैठ धड़ल्ले से राजनीतिक संरक्षण में करवाए जाने की चर्चा आम है. वोट बैंक बनाने के लिए कांग्रेस शासनकाल में इन घुसपैठियों को भारतीय दर्शाने वाले फर्जी दस्तावेज भी बेहद आसानी से उपलब्ध कराए जाने के आरोप समय-समय पर लगते रहे हैं.

असम में भाजपा की सरकार आने के बाद से इन अवैध बांग्लादेशियों पर कार्यवाही की जा रही है. बड़े पैमाने पर इन्हें चिन्हित किया जा रहा है, ताकि इनको यहाँ से खदेड़ा जा सके.

चर्चा है कि ये घुसपैठिए असम छोड़ने से बचने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे हैं. इसी के चलते फैसला सुनाने वाले जज पर जानलेवा हमला किया गया. ज़ाहिर है कि असम में बसे ये अपराधी और इनके संरक्षक किसी भी हद तक जाने को तैयार है.

उम्मीद की जानी चाहिए कि केंद्र सरकार और असम की राज्य सरकार इनके इरादों को भांप पा रही होंगी और इनसे निपटने की कोई न कोई ठोस योजना बना कर उसका क्रियान्वयन शुरू कर दिया होगा.

चर्च में मामूली चोरी की घटना को चर्च पर हमला बता कर हिन्दुओं के खिलाफ ज़हर उगलने वाले मेन स्ट्रीम मीडिया की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस मसले पर चुप्पी, सिर्फ दलाली का विषय नहीं बल्कि देशद्रोह है.

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