विपक्ष को पूरी तरह सेक्युलर/ मुस्लिम वोट बैंक कार्ड खेलने को मजबूर कर देंगे मोदी

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2017 के यह चुनाव थोड़े अलग इसलिए हैं क्योंकि इसके परिणामों का मोदी जी द्वारा आगे लिए जाने वाले निर्णयों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. अलबत्ता इन चुनावों के परिणामों का असर यह होगा कि 2019 में चुनाव एनडीए और शेष विपक्षी दलों के गठबंधन के बीच होगा.

मोदी जी 2019 का चुनाव भी विकास पर ही लड़ेंगे और विपक्ष को पूरी तरह सेक्युलर/ मुस्लिम वोट बैंक कार्ड खेलने को मजबूर कर देंगे. विकास के मुद्दे पर दिवालिया हुआ पूरा विपक्ष सिर्फ और सिर्फ मुस्लिम वोट बैंक और अपनी-अपनी जातियों को सहेजने और उनका एक मुश्त वोट पाने की रणनीति पर काम करेगा.

मोदी जी, चाहते भी यही हैं कि विपक्ष अभी भी पुरानी वोट बैंक रणनीति पर चले ताकि, अपनी तरफ से बिना कुछ कहे, हिन्दू वोट का ध्रुवीकरण हो और साथ में उनके द्वारा बनाया गया नया वोट बैंक, मुस्लिम महिलाएं व गरीब उनके साथ खड़ा रहे.

मैं जिस तरह का वातावरण देख रहा हूँ उससे तो यह लग ही रहा है कि भविष्य में मुस्लिम वोट बैंक एक गठबंधन या एक प्रत्याशी के लिए जहाँ और संगठित होगा वहीं, उसकी प्रतिक्रिया में ध्रुवीकृत हिन्दू वोटों की जातिगत टूटन में कमी आयेगी.

इसका परिणाम यह होगा कि मुस्लिम नेतृत्व द्वारा सिर्फ मोदी को हराने के लिए जिस प्रत्याशी या दल के समर्थन में आह्वान होगा, उसके विरुद्ध संगठित हिन्दू वोटों की एक तरफा वोटिंग होगी, जिसके परिणामस्वरूप उनके हारने की संभावना ज्यादा रहेगी.

दरअसल, हम लोग काल के उस चरण की तरफ बढ़ गए है जहाँ, मुस्लिम वोट बैंक सेक्युलरों के लिए बोझ होता जाएगा.

ऐसी हालत में भारत दो स्थितियों को प्राप्त कर सकता है, एक यह कि टकराव के रास्ते को पकड़ कर हारे दल और मन, भारत को अराजकता के दावानल की तरफ धकेल देंगे, जिसको झेलने के लिए तब तक भारत पूरी तरह से तैयार हो जायेगा या फिर मुस्लिम समुदाय से ही एक वर्ग आगे निकल कर मोदी शरणम गच्छामि हो जायेगा.

मेरा आंकलन पूर्व में भी यही रहा है और अब तक उत्तरप्रदेश में दो चरणों में पड़े वोट भी इसी तरह इशारा कर रहे है. इस बार 2014 की तर्ज पर, आशा के विपरीत उत्तरप्रदेश में पूरी तरह से जातिगत वोट गिरने की दो दशकों की परिपाटी पर विराम लगा है.

मुझे इसके पीछे, रणनीति के तहत मोदी जी द्वारा बनाए गए नये वोट बैंक का चैतन्य हो जाना लगता है. मोदी जी ने नीतिगत, समाज के सभी वर्गों में, ‘गरीब’ का एक नया वोट बैंक बनाया है, जो या तो मोदी जी की परियोजनाओं से लाभान्वित हुआ है या फिर उसको, उसके लिए किये गए, मोदी जी के संकल्पों पर विश्वास हो गया है.

इसी के साथ, मोदी जी में अपने स्वतंत्र भविष्य को देखते हुए, मुस्लिम महिलाओं ने भी, हालाँकि इस बार बहुत कम, बीजेपी को वोट दिया है.

लोग यह अभी भी नहीं समझ पा रहे हैं कि मोदी जी ने, सचेतन, भारतीय लोकतंत्र की चुनावी गणित और समीकरणों के स्थापित तत्वों में परिवर्तन किया है.

इसी लिए पिछले किसी आधार पर, मीडिया, चुनावी विश्लेषकों और विरोधियों द्वारा, चुनावों के परिणामो की भविष्यवाणी करना व्यर्थ होगा.

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