भारतीयों को USA के बारे में ज्यादा पता होता है, अपने ही North East के बारे में ये अद्भुत जानकारियां नहीं

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मेरे मित्र कई बार मुझसे बहुत रुचिकर सवाल पूछते हैं जैसे – पूर्वोत्तर के लोग खाते क्या हैं? वे इतने फैशनेबल क्यों होते हैं? ज्यादातर North East के लोगों का लुक रॉकस्टार जैसा क्यों होता है आदि आदि..

यकीन करिये मुझे भी वैभिन्यता के इस स्तर के बारे में तब पता चलता है जब आप सवाल करते हैं? वरना मुझे तो सब कुछ एक जैसा ही लगता है.
आज सिर्फ खाने के बारे में –

• हम रोटी की बजाय भात (बॉयल्ड राइस) खाना ज्यादा पसंद करते हैं. हमारे यहाँ कहावत है कि रोटियां अमीर लोग खाते हैं. हम खुद को अमीर और रईस नही मानते. हालांकि ये भात खाने के पीछे का कारण नहीं है. हमारे यहाँ चावल की उपज ज्यादा होती है. रोटी हम बस खा लिया करते हैं जब मन किया.

• हाँ ये सच है कि हम नॉनवेज भी खाते हैं. लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि हम सिर्फ नॉनवेज ही खाते हैं. हमारे घरों में चिकन, मटन उतना ही बनता है जितना नार्थ में खाने वाले के घरों में बनता होगा – वीकली या फिर कभी हफ्ते में दो दिन.

• नॉनवेज में यहाँ चिकन, मटन, पोर्क काफी प्रचलन में हैं. बत्तख भी खायी जाती है. माफ़ करें ..आप जैसे चिकन मटन और अंडे को अपने भोजन के रूप में देखते है वैसे ही बाकी हम लोग भी सोचते हैं.

• डॉग मीट को लेकर हमारे बारे में गलत सोच जाता है. पहली बात किसी के भी कुछ भी खाने को लेकर अपमान करना गलत है. दूसरी बात, जहाँ तक मेरा अनुभव है सिर्फ कुछ नागा और कुछ मिज़ो लोग ही डॉग मीट खाते हैं वो भी कभी कभी. बाकी नार्थईस्ट में कही भी डॉग मीट नहीं खाया जाता. हिन्दू लोग बीफ नहीं खाते. हर कोई न तो डॉग खाता है, न बीफ, न ही पोर्क. मैंने आज तक पोर्क नहीं खाया.

• पूर्वांचल के मेरे मित्र वहां के लोंगो द्वारा गर्मियों में कभी कभी खरगोश खाने की बात की पुष्टि करते हैं. कुछ ऐसा ही डॉग मीट के बारे में है. कुछ फ़ूड रेयर कटेगरी में आते हैं. उनका दुष्प्रचार करना गलत है. कुछ चीजें डेली नहीं खायी जा सकती. मांस एक मंहगा फ़ूड है. गरीब North East में डेली मांस खा पाना बड़ी बात है. बाकी आप कामन सेन्स लगा लीजिये.

• सामान्यतः हम काली चाय पीते हैं. दूध की अनुपलब्धता इसका बड़ा कारण है.

• तेल, मसाला, घी, डालडा आदि का कम से कम इस्तेमाल करने कारण नार्थईस्ट में मोटे लोग मुश्किल से मिलते हैं.

• सब्जियों में बंबू शूट, मशरूम, जंगली सब्जियां की बहुतायत है यहाँ अतः हमें आलू आदि पर इतना निर्भर नहीं रहना पड़ता. हांलाकि आलू का प्रचलन बढ़ रहा है.

• सामान्यतः लंच में हमारे घरों में सब्जी, दाल और भात ही बनता है. दाल ज्यादातर बार फ्राई नहीं की जाती और सब्जी को सूखा रखा जाता है. सलाद और नींबू का इस्तेमाल अपने हिसाब से करते हैं.
• डिनर में करी होती है. वो सब्जी हो या फिर चिकन, मटन, भात के साथ खाया जाता है.

• स्मोक्ड मीट काफी प्रचलन में हैं. मणिपुरी और बंगाली लोंगो में फिश ज्यादा चलती है.

• मोमोज़ हमारा स्टेपल फ़ूड नही है. जैसे नॉर्थ में चाट, कुलचे है वैसे ही हमारे यहाँ मोमोज है. इसे स्ट्रीट फूड कहें.

• मैंने भारत के कई प्रदेशों को देखा है. आठ से दस भाषाओं में के लोगों से मेरे तालुक्कात हैं. मेरा जितना अनुभव है उस आधार पर कुल मिलाकर बात इतनी है कि हम भी वही खाते हैं जो आप खाते हैं. बस हम भात ज्यादा खाते हैं.

– गीताली सैकिया की इस जानकारी के अलावा सोशल मीडिया पर North East के लोगों के बारे में नीचे दी गयी कई बातें पढ़ी जा रही है.

भारतीयों को USA के बारे में ज्यादा पता होता है लेकिन नार्थईस्ट के बारे में उन्हें जानकारी नहीं होती .

1) पूर्वोत्तर में आठ राज्य हैं. अरुणाचल प्रदेश, असम, मिजोरम, मणिपुर, मेघालय, त्रिपुरा, सिक्किम और नागालैंड.

2) पूर्वोतर में तकरीबन 220 भाषाएँ बोली जाती हैं. ये तिबेतियन, थाई, साउथ ईस्ट एशिया और पूर्वी भारतीय संस्कृति का मिश्रण  होती हैं.

3) पूर्वोत्तर, भारत का एकमात्र ऐसा भाग रहा है जिसे मुग़ल जीत न सके.

4) अहोम साम्राज्य जिसने पूर्वोत्तर पर करीब 600 वर्षों तक राज किया, सबसे लंबा अविभाजित साम्राज्य  है.

5) विश्व का सबसे बड़ा रिवर आईलैंड “माजुली ” और विश्व का सबसे छोटा रिवर आईलैंड “उमानंदा” दोनों नार्थईस्ट में ब्रह्मपुत्र नदी में स्थित हैं.

6) भारत के सात प्रसिद्ध नेशनल  पार्क पूर्वोत्तर में हैं.

7) “Shillong” को भारत का रॉक कैपिटल कहा जाता है.

8) विश्व में सर्वाधिक वर्षा  के दो क्षेत्र सोहरा और मावसिनराम  मेघालय के चेरापूंजी में स्थित हैं .

9) असम में “सुअलकुसी” ग्राम  विश्व का सबसे बड़ा बुनाई करने वाला ग्राम है. इसकी पूरी जनसँख्या बुनाई में ही लगी हैं.

10) असम का सुप्रसिद्ध रेशम “मूंगा” जिसे गोल्डन रेशम भी कहते हैं. ये विश्व में अन्यत्र कहीं और नहीं बनाया जाता.

11) नार्थईस्ट विश्व के सर्वाधिक स्वच्छ और साफ़ सुथरे क्षेत्रों में से एक है. मेघालय का “Mawlynnong” ग्राम एशिया का सबसे स्वच्छ ग्राम है.

12)  देश के सत्तर प्रतिशत से भी ज्यादा “Orchid” नार्थईस्ट में पाए जाते हैं.

13) मिजोरम और त्रिपूरा देश के सर्वाधिक साक्षर राज्यों में से एक हैं.

14) नार्थईस्ट में दहेज़ प्रथा का प्रचलन नहीं  है.

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