गज़ब न्यायपालिका : जातीय संघर्ष में एक की जान लेने वाले को फांसी, आतंकी हमला कर 62 को मार डालने वाले को 10 साल की कैद

नई दिल्ली/ हाथरस. साल 2005 में हुए दिल्ली में सीरियल ब्‍लास्‍ट केस में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने ने एक आरोपी को दस साल की सज़ा सुनाई है जबकि दो अन्य को बरी कर दिया है. इन ब्लास्ट्स में 62 लोगों की मौत हुई थी, और 210 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे.

इससे ऐन उलट उत्तरप्रदेश के हाथरस की एक अदालत ने 27 साल पहले हुए एक जातीय संघर्ष में दलित व्यक्ति को जिंदा जलानेवाले को फांसी व 11 लोगों को उम्र कैद की सजा सुनाई है.

दीपावली के एक दिन पहले हुए थे सीरियल धमाके

दिल्ली में साल 2005 में दीपावली के एक दिन पहले हुए सीरियल धमाकों के लिए तारिक अहमद डार, मोहम्मद हुसैन फाजिल और मोहम्मद रफीक शाह को मुख्य आरोपी बनाया गया था. इसमें से तारिक अहमद डार को 10 साल की सजा सुनाई गई है वहीं मोहम्मद हुसैन फाजिल और रफीक को बरी किया गया है.

सज़ा के साथ ही मिली रिहाई

अदालत ने इस मामले में महज एक आरोपी तारिक अहमद डार को दोषी ठहराया है. डार को सिर्फ गैर कानूनी गतिविधियों में शामिल होने का दोषी माना गया है. उसे दस साल की सजा हुई है. उसमें अधिकतम दस साल की सजा का प्रावधान है इसलिए अदालत ने उसे तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है.

यूपी में कोर्ट को वीभत्स लगी हत्या तो दे दी फांसी की सज़ा

27 साल पुराने जातीय संघर्ष में दलित व्यक्ति को जिंदा जलाने पर हाथरस के एडीजे कोर्ट ने एक हत्यारे को फांसी व 11 लोगों को उम्र कैद की सजा सुनाई है. घटना वीभत्स थी, इसलिए कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया. 19 लोगों को संदेह का लाभ देते हुए रिहा कर दिया गया.

उप्र के हाथरस स्थित सासनी के गांव रुदायन में 11 मार्च 1990 को होली की शाम दलितों के घरों पर हमला कर दिया गया. मशाल व लाठी लेकर लोग टूट पड़े थे. लगभग 32 घरों को आग के हवाले कर दिया गया था.

दाताराम व उनकी पत्नी शांति देवी को दबंग उठाकर जंगल में ले गए थे. वहां दाताराम को गोली मारकर जलते लाह के ढेर में फेंक दिया था. इस वीभत्स घटना ने पूरे देश को हिला दिया था.

इस हिंसा के विरोध में दलितों का आंदोलन भी चला था. खुद बसपा सुप्रीमो मायावती ने सासनी पहुंचकर पीड़ित परिवार को न्याय का भरोसा दिलाया था. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम ने भी छानबीन की थी.

गांव के ही 55 लोगों के खिलाफ मृतक के छोटे भाई हरीशंकर ने मुकदमा दर्ज कराया था. जांच सीबीसीआइ ने की और 52 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की. ट्रायल के दौरान बारह आरोपियों की मौत हो गयी.

बुधवार को एडीजे कोर्ट-तृतीय एसएन त्रिपाठी ने अंतिम सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया. अभियोजन अधिकारियों ने कोर्ट में सोलह गवाह प्रस्तुत किए. पुख्ता सुबूत व गवाहों के आधार पर कोर्ट ने 12 लोगों को दोषी ठहराया.

आइपीसी की धारा 302/149 सपठित 3(2)(5) के तहत कुंवरपाल पुत्र भगवान सिह को मृत्यु होने तक फांसी पर लटकाने तथा एक-एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई. जोगेंद्र व बाबू सिह उर्फ विजेंद्र को हत्या में ही उम्र कैद व एक-एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है.

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