‘घेट्टो’ मानसिकता से बाहर निकलेंगे, श्रीमन्…..?

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तीन ख़बरें हैं, उस पर लोगों की प्रतिक्रियाएं हैं, अलग-अलग हैं, लेकिन सबके तार जुड़े हुए हैं. आज ही ख़बर आयी कि शहाबुद्दीन को सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल तिहाड़ भेजने का आदेश दिया है और अब आगे की सुनवाई वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से होगी.

इस ख़बर पर कई मोहम्मडन की जानी-मानी प्रतिक्रियाएं आयीं- शहाबुद्दीन को जेल, बाकी के लिए कानून खेल. केवल शहाबुद्दीन को ही सज़ा क्यों, अपराधी सब हैं तो सबके लिए कानून एक सा क्यों नहीं…? वगैरह-वगैरह…

पिछली बार भी जब शहाबुद्दीन की ज़मानत रद्द कर उसे सींखचों के पीछे भेजा, तो यही लोग थे जो उसकी तुलना अमित शाह से लेकर न जाने किससे-किससे कर रहे थे.

यह दरअसल उस ‘घेट्टो मानसिकता’ को दर्शाता बयान है, जिस पर मोहम्मडन और वामी-कौमी एक जैसा अधिकार और एक जैसी ही महारत रखते हैं. ‘तेरा अपराधी चोर, मेरा अपराधी रॉबिनहुड टाइप…’

यही मानसिकता है, जो लतीफ को महिमामंडित कर उसे बिल्कुल महान बना देती है- रईस फिल्म में….

यही वह सुलेमानी कीड़ा है, जो दर्जनों मामले के अभियुक्त-आरोपित सल्लू मियां को ‘भाई’ और बीइंग ह्युमन बना देता है, जोधपुर जेल से उसके निकलते वक्त उसके सिर पर ‘फेज कैप’ पहनवा देता है….

मैच फिक्सिंग के आरोपी अज़हरुद्दीन के मुंह से उसके ‘मोहम्मडन होने की वजह से ज्यादती..’ की बात कहलवा देता है….

यही मानसिकता कॉमरेड के बलात्कारी को ‘निर्दोष’ बनाती है, तेजपाल से लेकर खुर्शीद तक, अरशद से लेकर अकरम तक के वामी-कौमी बलात्कारियों का बचाव करवाने में पोलित ब्यूरो से लेकर ज़मीन तक के कॉमरेड को यही मानसिकता दिन-रात एक करवा देती है.

यह ‘घेट्टो मानसिकता’ ही है, जो हैदराबाद यूनिवर्सिटी के एक कमज़ोर और ओबीसी लड़के को आत्महत्या पर मज़बूर करता है, फिर उस आत्महत्या को देशव्यापी मसला बनवाता है, लेकिन आज जब (हालांकि, यह पहले रोज़ से पता था) गुंटूर से उसके फर्जी ‘दलित’ होने की बात सामने आती है, एक ‘पूर्व पोर्न संपादक’ गोल-पोस्ट ही बदल देता है…. अब वह पूछता है कि क्या ओबीसी होने से उसकी आत्महत्या जायज है?

आप रोइए या हंसिए, यही मानसिकता म.प्र. में पकड़े 11 हिंदुओं (हालांकि, मुझे पूरी तरह शक है कि वे हिंदू हैं… डॉ. नारंग वाले मामले में भी ऐसे ही कुछ ‘हिंदू’ पकड़े गए थे न, जो बाद में मोहम्मडन निकले) को मुद्दा बनाएंगे….

वे नहीं देखेंगे कि हिंदू आतंकवादी होता नहीं, हो ही नहीं सकता, क्योंकि वह घेट्टो मानसिकता में नहीं जीता, वह नहीं मानेंगे कि कोई भी हिंदू उन 11 के बचाव में नहीं आया, कमलेश तिवारी से लेकर आशु परिहार तक के बचाव में जब नहीं आया, तो अनंत सिंह और सुनील पांडे के बचाव में क्या आएगा…..?

आप कब इस घेट्टो मानसिकता से बाहर निकलेंगे, श्रीमन्…..?

…. जारी

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