Valentine Day Special : हाँ हमें मोहब्बत है हमारे इन जवानों से जो हमारे लिए जान हथेली पर रखते हैं

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Major AVD Pillay के पूर्वज सदियों से केरल की सेना में सैनिक होते आये थे, Pillay यानी Nair (नायर/नैय्यर) दक्षिण भारत के क्षत्रिय, एक तो योद्धा जाति, उस पर मातृभूमि के लिए रक्त बहाने की वंश परम्परा.

मेजर की इच्छा थी कि बेटा भी सेना में जाये. परिवार की यह परम्परा ही थी सो हर नौजवान युवक से अपेक्षा की जाती थी कि वह भी शस्त्रों से भलीभांति परिचित हों और युद्धकौशल में प्रवीण.

पर मजे की बात यह थी कि मेजर AVD Pillay का बेटा इन सब मामलों में बुरी तरह से फिसड्डी निकला, इस पर पिता ने नौजवान दिवाकरन को पूरी एक रात के लिए जबरन एक कब्रिस्तान में बैठा दिया….

दिवाकरन कहते हैं कि उस रात की भयावहता और मेरा डर अपने चरम पर थे, सायं-सायं बहती हवा वातावरण में और डर घोल रही थी, लगता था मानों ये कब्रें धीरे-धीरे फट रही हैं, इनमें दफ़न मुर्दे अभी उठकर मुझे दबोच लेंगे…. उस रात डर से लगभग मैं मर ही चुका था पर मैंने हार नहीं मानी….!

अगले दिन जब Major Pillay दिवाकरन को घर ले जाने के लिए आये तो उन्होंने पाया कि लड़के में कुछ अलग ही बदलाव आया है. अब वह लोगों की आँखो में आँखे डाल कर बिना हकलाए -झिझके बात कर लेता था…!

साल था 1994, मणिपुर समेत लगभग पूरा पूर्वोत्तर ( North East) उग्रवाद की चपेट में था,  National Socialist Council of Nagaland, नाम के एक उग्रवादी संगठन ने अपनी समानांतर सत्ता स्थापित कर रखी थी.

मणीपुर और नागालैंड के बॉर्डर वाले क्षेत्रों में, वे बकायदा tax वसूलते, भारतीय प्रतीकों का अपमान और विरोध करते….. और सरकार, पुलिस, असम राईफल्स के सहयोगियों, जवानों की निर्ममता से हत्या …..!

सरकार की ओर से शांति के प्रयास असफल हो चुके थे, उनकी माँग थी अलग स्वतंत्र नागालैंड देश बनाने की… अराजकता और हिंसा दिन पर दिन बढ़ती ही जाती थी, वे सामान्य जनमानस की भावनाओं को भड़का कर, जल, जँगल और जमीन के साथ नागा अस्तित्व के नाम पर अपने पक्ष में माहौल बनाये हुए थे!

स्थितियाँ गृहयुद्ध सी थीं और इस स्थिति को नियंत्रित कर सामान्य जन – जीवन बहाल करने के लिए पूर्वोत्तर में भारतीय सेना नियुक्त हुई …!

तारीख थी 20 जनवरी 1994;

कमाण्ड को intelligence से सूचना मिली कि उग्रवादी नदी पर बने पुल को उड़ाने की फिराक में हैं जिससे सैन्यबलों के आवागमन में भारी अवरोध उत्पन्न हो जाये और इसे रोकने के लिए टास्क दिया गया 8th Battalion , The Brigade of Guards रेजिमेंट को; कैप्टन दिवाकरन की प्लाटून को पेट्रोल पर भेजा गया और उन्हें बहुत साफ शब्दों में आदेश मिले ~ locate, engage and neutralize.

4 दिनों तक घने – गर्म जँगल में भटकने के बाद पाँचवे दिन सुबह उनकी प्लाटून का सामना उग्रवादियों से हुआ.

Tamenglong जिले में सुदूर Longdipabram नाम के एक छोटे से गाँव में से भयँकर फ़ायर आ रहा था… कैप्टन ने रिस्पॉण्ड किया और दोनों तरफ से क्रॉस फायरिंग शुरू हो गयी, उग्रवादी गाँव में सिविलियन्स के बीच छिपे हुए थे और एडवांस पोजीशन पर थे… यहाँ कैप्टन और उनकी प्लाटून पर दोहरी जिम्मेदारी थी कि इस एनकाउंटर के दौरान उग्रवादियों को मार गिराया जाय पर सिविलियन कैजुअल्टी बिल्कुल न हो…. इसका मतलब था कि खुद के सीने पर गोली खाना…

कैप्टन ने एक बड़ी सी मजबूत झोपड़ी स्पॉट की जिसमें 4 उग्रवादी पोजीशन लिए बैठे थे….. पोजीशन लेते हुए वह पहुँचे और दरवाजे को लात मार खोलते ही AK-47 का three-round burst उनकी बाँह और कोहनी को लगभग छूते हुए निकल गया…. और एक दूसरा AK का सिंगल शॉट सीधा उनके सीने में आ लगा, किस्मत से उस उग्रवादी की AK जाम हो गयी, उसने फुर्ती से एक ग्रेनेड उछाला कैप्टन पर… सीने में गोली लगी थी, दर्द, शॉक और खून बहने के कारण कमजोर होने पर भी कैप्टन ने फुर्ती से ग्रेनेड फटने के पहले उसे अपने पैर से दूसरी तरफ उछाल दिया पर फिर भी धमाके के साथ उनके पैर से बड़ा सा माँस का टुकड़ा निकल गया….. ढेर सारे ग्रेनेड shrapnels झोपड़ी के दरवाजे में अब्जॉर्ब हो गए! लेकिन उन्हें सभंलने का मौका न मिला और दूसरे उग्रवादी ने हमला कर दिया….. बुलेट कन्धा छेदती हुई रीढ़ की हड्डी में जा लगी …..।
कंधा और रीढ़ की हड्डी टूटे हुए थे, सीने में दाएँ तरफ़ AK-47 की एक बुलेट…. ग्रेनेड के धमाके में दाएँ पैर और जाँघ का ढेर सारा माँस उड़ा हुआ….. अपने ही रक्त के कुण्ड में डूबे हुए वह जमीन पर पड़े हुए धीरे-धीरे मौत के करीब जा रहे थे, अब तक उनकी प्लाटून उनके पास पहुँच चुकी थी. उग्रवादी मारा गया, 2 बुरी तरह घायल थे और तीसरे ने जिसने कैप्टन के सीने में गोली मारी थी; सरेंडर कर दिया, लेकिन साथ ही 2 छोटे बच्चे भी इस क्रॉस फायरिंग में बुरी तरह घायल थे !

उनकी platoon ने कमाण्ड को CASEVAC (Casualty Evacuation by helicopter) के लिये रेडियो करते हुए टास्क पूरा होने की सूचना दी, सेना ने तेजी से उत्तर दिया…… आर्मी एविएशन कॉर्प्स का एयर एम्बुलेंस हेलीकॉप्टर मेडिकल टीम के साथ उतरा…. और जब फुर्ती दिखाते हुए पायलट कैप्टन को ले जाने के लिए आगे आया तो उन्होंने 2 आदेश दिए पहला यह कि उनके अंदर अभी शक्ति बाकी है वे थोड़ी देर दर्द और बर्दाश्त कर सकते हैं ; सो उनसे पहले उन दोनो बच्चों को इवैक्यूवेट किया जाय और दूसरा ऑर्डर अपनी प्लाटून को दिया कि अगर अत्यधिक रक्तस्त्राव होने के कारण मेरी मौत हो जाती है तो गुस्से में उन तीनो उग्रवादीयों को गोली मत मारना !

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Injured DPK Pillay

गाँव अब कैप्टन की यूनिट 8th Battalion, Brigade of Gaurds की सुरक्षा में था; मेडिकल टीम उन बच्चों को लेकर जा चुकी थी, खून बेहिसाब बह चुका था…. साँसे धीमी पड़ती जा रहीं थीं और कैप्टन बेहोशी के आगोश में चले गए पर…. बेहोश होने से पहले उनके कानों में गाँव वालों की खुशी की चीखें पड़ रहीं थीं…, लगभग 2 घण्टे बाद दुबारा हेलीकॉप्टर कैप्टन को इवैक्यूवेट करने आया ! उन बच्चों के माता पिता सहित पूरे गाँव के दिल को जीत लिया था उन्होंने….. तमाम लोग तो उनके पैरों पर गिर पड़े …..!

इस घटना को हुए करीब 16 साल बीत गए, गाँव वालों ने मान लिया था कि उस नौजवान सैनिक अधिकारी की मृत्यु हो गयी है…पर कैप्टन बच गए थे; उन्हें उनकी वीरता और सर्वोच्च बलिदान की भावना के लिए शांतिकाल के तीसरे सर्वोच्च वीरता पुरस्कार शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया और वो पूरी तरह ठीक होकर वापस सेना में प्रमोट होकर कर्नल की रैंक पर सर्विस कर रहे थे कि कहानी में एक मोड़ आया!

मार्च 2010 में एक local Brigade Commander जो दिवाकरन के मित्र थे; उन्होंने उस गाँव, जहाँ यह encounter हुआ था; का पता लगाने के लिए एक पेट्रोल पार्टी भेजी; और इस पेट्रोल पार्टी से गाँव वालों को पता चला कि उस दिन उन बच्चों और गाँव के लोगों को बचाने वाला अभी भी जिंदा है!

उन्होंने सेना से एक रियूनियन पार्टी के लिए अनुरोध किया जिसकी स्वीकृति सेना ने दे दी……. एक भव्य समारोह हुआ  कर्नल दिवाकरन मणिपुर के  उस छोटे से गाँव में 16 साल बाद गए और उनका स्वागत ऐसे हुआ मानों कोई गाँव का बड़ा-बुजुर्ग आया हो…. कृतज्ञता, प्रेम और सम्मान से झुकी आँखो से गाँव में दिल खोलकर उनका सत्कार हुआ….

Maseliu Thaimei नाम की वह छोटी लड़की जिसे दिवाकरन ने बचाया था वह अब 1 बच्चे की माँ थी; और Maseliu का भतीजा Dingamang, जो 1994 में केवल 6 साल का था, से उनकी भेंट हुई …Maseliu की माँ दिवाकरन से लिपट बेहिसाब रोयीं और इसपर दिवाकरन ने कहा कि

“मैं क्यों लड़ रहा था इसकी वजह मुझे पता थी और वो उग्रवादी क्यों लड़ रहे हैं उसकी वजह उन्हें; पर इन छोटे बच्चों को बुलेट क्यों लगी इसकी वजह इन्हें नहीं पता सो मैंने पहले उन्हें अस्पताल जाने दिया; that’s simple.”

लेकिन अभी दिवाकरन को एक और शख़्स  से मिलना था…. वह उग्रवादी जिसने 16 साल पहले AK-47 से उनके सीने और हाथ पर 4 गोलियाँ और ग्रेनेड फेंक कर लगभग मार ही दिया था…. दिवाकरन उसे पहचान गए और उसे भी बुलाकर गले लगा लिया…. उस उग्रवादी ने कहा कि 16 साल पहले मौत के मुँह में पहुँच कर भी जब कैप्टन ने छोटे बच्चों के साथ ही उन तीन उग्रवादियों के प्राणों की परवाह खुद से पहले की इस बात ने पूरे गाँव के साथ ही जाने कितने उग्रवादियों का दिल जीत लिया और वे हथियार रख मुख्य धारा में जुड़ गए….! एक पल को सोचिये तो यह असम्भव लगता है पर यह हुआ था….. यकीन न आये तो गवाह अभी भी मणिपुर के उस गाँव में मौजूद हैं जाकर पूछ लीजिये…!

इस समारोह को पर्याप्त प्रसिद्धि मिली और कर्नल दिवाकरन जल्दी ही प्रसिद्ध हो गए और अपनी प्रसिद्धि का फायदा उठाते हुए उन्होंने मणिपुर के उस गाँव को एक और उपहार दिया…… आज़ादी के 70 सालों बाद भी पूर्वोत्तर के उस गाँव में कोई सड़क नहीं थी सो उन्होंने रक्षा मंत्रालय से निवेदन किया एक 23 km लंबी पक्की सड़क बनाने का जो Longdipabram को District Headquarter Tamenglong से जोड़ सके और इसे बनाने का काम दिया गया Border Roads Organization को जिसका काम सेना के लिए सीमावर्ती क्षेत्रो में सड़कें बनाना और उनका रखरखाव करना है लेकिन यही बात एक समस्या थी कि BRO सड़क तो बना देगा पर उसकी मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी किसे दी जायेगी ??

दिवाकरन ने भाग-दौड़ की और हर जगह से उन्हें बैरंग लौटाया गया ……UPA सरकार ने उन्हें बैरंग लौटा दिया फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और अन्ततः अक्टूबर 2016 में उनकी मेहनत रंग लायी जब केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी ने 100 km लम्बे National Highway की ,जो Tamenglong से Peren के बीच होगा और उस पर वह छोटा सा गाँव  Longdipabram एक NH reference point रहेगा; की स्वीकृति दे दी !

कर्नल दिवाकरन 2006-2007 में रक्षा मंत्रालय में ज्वाईन हुए डिफेंस प्लानिंग ऑफिसर की पोस्ट पर और वह पहले सेवारत सैनिक अधिकारी हैं जो इस पोस्ट तक पहुँचे हैं …! दिल्ली स्थित उनके ऑफिस में जब मेजर गौरव आर्या उनसे मिले तो दिवाकरन के तीन लड़के भी वहाँ थे….. स्कूल जाने वाले 10 से 16 के बीच ; बच्चों ने अपना परिचय दिया विक्रमादित्य, सिद्धार्थ और हर्षवर्धन (अपनी औलादों का नाम तैमूर रख लेने वाले छछूँदर सेलिब्रेटी और असली हीरो के बीच अंतर )

तीनों ने गौरव से बातें करते हुए बताया कि उनके पिता ने उन्हें प्राचीन केरल का मार्शल आर्ट कल्लारीपट्टु सिखाया है और तो सबसे छोटा हर्षवर्धन भी ये जानता है कि अगर उसके घर पर terrorists attack हो तो उसे क्या करना है ; वो जानता है कि जरूरत पड़ने पर किन चीजों को वह हथियार बना सकता है !

Dr Avyact अपने यू ट्यूब विडियोज में कहते हैं – स्वस्थ जन समृद्ध राष्ट्र  बात वाकई सही है…… लेकिन स्वस्थ होने के बाद अगर आप रुक जाते हैं …..तो आप गलती करते हैं…… राष्ट्र को समृद्ध बनाये रखने के लिए राष्ट्र के जन को सशक्त बनना पड़ेगा तभी आप और आपका राष्ट्र सुरक्षित रह पाएँगे और आपको मौका मिलेगा प्रेम करने और प्रेम पाने का…. सो self defense सीखिये, अपने बच्चों, लड़कियों को सिखाइये… जिससे आपात काल में वे असहाय न पड़ जाएँ…!

मेजर गौरव आर्या इस कहानी के लिए कहते हैं -“This is not just the story of Capt. Divakaran Pillay.
This is the story of the Indian Army. ”
बड़ा आसान होता है अपने मतलब के हिसाब से सेना के अफसरों और जवानों को गाली दे लेना ……हाँ हमें मुहब्बत है भारतीय सशस्त्र सैन्यबलों से…. because they are our integral part.. they are going to die for us and kill for us.
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#जय_हिन्द
#जय_हिन्द_की_सेनाएँ
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– Gurav Singh

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