मौलाना! आरक्षण चाहिए अगर तो अपने यहां की ऊंच-नीच, छुआ-छूत दिखाओ

इस देश में आरक्षण का समर्थन और विरोध भी आरक्षित होना चाहिए. कागजी, मानसिक और जेनेटिक सवर्णों को इससे दूर रहना चाहिए.

जातिगत आरक्षण इस देश में स्थाई समस्या नहीं, हिंदू समाज में इतिहास की गलतियों का “फौरी” समाधान है.

जातिगत आरक्षण के संवैधानिक अधिकार को फौरी उर्फ़ टाइमबीइंग खुद बाबा साहेब ने ही कहा था, वैसे ऊपर वाला कथन मेरा अपना है.

बस ये फौरन हर बेईमानी के शिकार तक पहुंचे इसके फौरी इंतेजाम होने चाहिए, जो 70 सालों की मियाद में अब तक नहीं हुए.

वह फौरन समाधान… क्यों 70 साल बाद भी अधूरा है, आज़ादी के बाद… फौरन उर्फ़ तुरंत और अगले 65 साल लगातार सत्ता कमाने वालों से सवाल होने चाहिए.

मज़हब के आधार पर मुसलमानों को कभी भी आरक्षण की मांग इस नैतिक आधार पर नहीं करनी चाहिए क्योंकि : यह मज़हब खुद के लिए कहता आया है कि उसके यहां जातिगत भेदभाव नहीं.

आरक्षण चाहिए अगर मौलाना! तो अपने तीन-तेरह, ऊंच-नीच, छुआ-छूत दिखाओ… नहीं है ऐसा कुछ भी तो…. सच्चर चचा के खच्चर पे सवारी कर पढ़ना-लिखना किसी भारतीय भाषा में सीख जाओ.

घनघोर इस्लामी देश मोरक्को… नोबुर्कों (बुर्काबंदी) कैसे हुआ… इसे दूसरे इस्लामी देश तुर्की के पूर्व सदर अतातुर्क के अपने देश में अरबी कुरआन बैन करने के फैसले की याद वाली मेलोडी खाओ : खुद जान जाओ.

जय मीम के संग… जय भीम का नारा गैर इस्लामिक और अल्लाह का अपमान है…. क्योंकि इसी तर्ज़ पर भारत माता और वंदेमातरम की पुकार हराम है. ये जानकारी… सैंपल में मुफ्त लेते जाओ.

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