जॉली LLB 2 : सनातन धर्म की रीढ़ है ब्राह्मण वर्ग

सुभाष कपूर निर्देशित जॉली LLB2 देखी, ठीक फिल्म है. सेक्युलर ताने बाने और सिस्टम के लूप होल्स को हास्य व्यंग्य में चुपड़ कर बड़ी सरलता से दिखाना सुभाष कपूर की खूबी है.

उनकी पिछली फिल्मों की अगर बात करूँ तो फंस गए रे ओबामा, और अरशद वारसी अभिनीत जॉली LLB मुझे पसंद आईं थीं.

इन फिल्मों में एक कसावट थी, कथानक भी मज़ेदार थे तो एक्टिंग भी गुदगुदाने में सफल रही थी.

इस नई फ़िल्म की बात करें तो लिखने वाले ने बड़े मंझे हुए तरीक़े से फेक एनकाउंटर और उसका शिकार एक निर्दोष मुस्लिम को बताया है.

निर्दोष व्यक्ति का केस नए वकील यानि अक्षय कुमार उर्फ जॉली लड़ते हैं… अधिक डिटेल में ना जाते हुए छोटी सी समीक्षा कर देता हूँ।

जिन्होंने अरशद वारसी वाली जॉली देखी होगी उन्हें इस फिल्म में अक्षय कमतर महसूस होंगे, निर्देशन भी पिछली फिल्म से कमतर था और कथानक भी उतना कस नहीं सकी टीम.

देखना है तो एक बार देखी जा सकती है. सौरभ शुक्ला हमेशा की तरह कमाल लगे मुझे. केवल वे ही फिल्म में थोड़ा जंचे बाकियों ने ओके काम किया है, हुमा कुरैशी का कोई खास काम नहीं था, सो करतीं भी क्या?

इस फिल्म में मेरे दोस्त फैज़ की भी छोटी सी भूमिका थी. इन्हीं फैज़ की शादी में सुभाष कपूर से भेंट हुई थी…. आदमी ठीक लगे थे मुझे… ख़ैर।

मुझे फिल्म का एक सीन बड़ा ज़बरदस्त लगा, जब कठघरे में उस आतंकी को खड़ा कर अक्षय कुछ सवाल पूछते हैं, जो पुलिस द्वारा भगा दिए जाने के बाद से एक ब्राह्मण बनकर रह रहा था.

बाकायदा आधार कार्ड, वोटर ID इस बात की पुष्टि कर रहे थे कि वो ब्राह्मण है, तब अक्षय, जज से कहते हैं कि भले इसके पास कुछ भी ID हो पर मैं एक ब्राह्मण होने के नाते इससे कुछ शास्त्रार्थ करना चाहता हूँ।

गायत्री मंत्र, वेद, वर्ण, गोत्र, आदि तो वो आतंकी रटे रहता है, सो बता देता है, पर अक्षय जब उससे उसके ‘बिसवा’ पूछते हैं तो वो हकबका जाता है और हड़बड़ी में “या अल्लाह ये भी होता है क्या?”, बोल पड़ता है… बस तभी जॉली उसे खींच लेता है…

फिल्म थी, कुछ ना कुछ रोचक तो बुनना ही पड़ता है ताकि लोगों का मनोरंजन हो, पर यहाँ मैं ‘ब्राह्मणों’ में बनाये गए इन खिड़की दरवाज़ों की बात करना चाहता हूँ, कि कोई ब्राह्मण का चोला भले ओढ़ ले पर यदि वो ब्राह्मण कुल से नहीं है तो असली ब्राह्मण उसे चुटकियों में पकड़ सकता है.

यही कारण है कि जो सही मायनों में ब्राह्मण थे, वे समय-समय पर सनातन की रक्षा कर पाये, वास्तविक ग्रंथों को सहेज पाये, उनका प्रचार प्रसार कर पाए लाख कुचक्रों और षड्यंत्रों के बावजूद…

ब्राह्मण वर्ग सनातन धर्म की रीढ़ की हड्डी है, जिसे आज गाली दे-दे कर तोड़ा जा रहा है… मैं यहाँ जाति के दम्भ में चूर बाभनों की बात नहीं कर रहा ये तो समझ ही गए होंगे.

सो ब्राह्मणों का आदर-सम्मान करते रहें, उन्हें केवल इतना ही तो चाहिए होता है! और यही सम्मान उन्हें कभी आदि गुरु शंकराचार्य बनाकर भेजता है, तो कभी दयानंद सरस्वती तो कभी विवेकानंद…

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