श्री राम जन्मभूमि मंदिर, हिंदुत्व और विकास

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श्री राम जन्मभूमि मंदिर का विषय ना तो हिंदुत्व की अस्मिता का है और ना ही भारत के संविधान की अस्मिता का, वस्तुतः यह हिंदुओं के अस्तित्व का विषय है.

125 करोड़ की जनसंख्या वाले देश में 100 करोड़ हिंदुओं के होते हुए जन-जन के अवचेतन में स्थापित परम आराध्य भगवान श्रीराम का मंदिर बनाने में अक्षम हिन्दुओं की यह लड़ाई केवल मंदिर मात्र की नहीं बल्कि हिंदुत्व के अस्तित्व की है.

बाहरी षड्यंत्रकारियों ने हमें सेकुलरिज्म का उल्टा पाठ पढ़ाया. इकतरफा नपुंसक धर्म निरपेक्षता को हमारे स्वभाव का अंग बनाने का कुत्सित प्रयास किया.

बाहरी षड्यंत्रकारियों ने बिकाऊ मीडिया और कुछ दुष्टों के साथ मिल कर यह भ्रांति विकसित की कि हिंदुत्व और विकास एक दूसरे के पूरक है जबकि परम सत्य यह है कि विकास तो हिंदुत्व में स्वत: ही समाहित है। जिसका स्वयं इतिहास ही साक्षी है.

इसी भ्रान्ति के चलते जब भारतीय जनता पार्टी हिंदुत्व पर ध्यान देती है तो लोग समझते हैं कि वह विकास की राह से भटक गई है और जब विकास की राह पर चलती है तो लगता है हिंदुत्व से भटक गई है.

यह जाल केवल कुछ वामी दुष्टों ने बाहरी दुश्मनों एवं हमारे सत्तालोलुप गद्दारों के साथ मिलकर बुना है. सत्य में भाजपा दोनों को एक साथ पूरी प्राथमिकता से संवर्धित करने में लगी है.

मित्रों! भगवान श्री राम का जन्म मंदिर हिंदुओं के अस्तित्व का प्रश्न है यह बार-बार जोर देकर इसलिए कह रहा हूँ कि यदि हम तीन चौथाई से अधिक होकर भी अपने आराध्य का मंदिर नहीं बना सकते हैं, हमें अपने ईश्वर के होने का सबूत देना पड़ता है, हमसे कालक्रम में भौतिक साक्ष्य मांगे जाते हैं, तो यह अत्यंत ही विकट स्थिति है.

हम राम भक्तों पर सीधे आक्रमण होते हैं और इस विषय में सशस्त्र प्रतिरोध का प्रयास करने वालों को स्वयं हिंदू समाज में हेय दृष्टि से देखा जाता. यह सब उसी षड्यंत्र का हिस्सा है.

अब बात करते हैं हमारी कमजोरी की. 100 करोड़ होने के बावजूद हम पूर्ण अधिकार के साथ अपने आराध्य का मंदिर नहीं बनवा सकते इसका मुख्य कारण है हमारी एकता में कमी. क्या भारत के हिंदू मतदाता कभी राम मंदिर के निर्माण का स्पष्ट जनादेश किसी को दे पाये है?

नहीं!

चुनाव के समय हमें अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया जाता है. जातियों के, मान्यताओं के, आरक्षण वर्गों के, अमीर-गरीब के और हर बार हिंदुत्व के शत्रु इन चुनावों के समय हिंदुओं को अलग-थलग कर देते हैं. हिन्दू एकता को खंडित कर देते है.

तो हे उत्तर प्रदेश के हिन्दू बहनों-भाइयों!

इस बार सारा दारोमदार आप पर है कि आप सनातन के अस्तित्व की रक्षा कैसे करते है. हमारी संस्कृति, हमारे आराध्य, उनके साक्षात् विग्रह हैं… तो ही हम हैं.

नास्तिकों, वामपंथियों और बाहरी मुस्लिम शत्रुओं के षडयंत्रों को समझें और हिंदुत्व के अस्तित्व की रक्षा के लिए वोट दें… विकास तो स्वतः होगा.

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