उप्र की कायापलट के लिए ज़रूरी है साम-दाम-दंड-भेद

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बाली को एक अद्भुत वरदान प्राप्त था. उसके समक्ष लड़ने वाले योद्धा की आधी शक्ति स्वत: बाली में स्थानांतरित हो जाती थी.

ऐसे में जो बाली की निजी शक्ति होती थी वह प्रभावी साबित होती और सम्मुख युद्ध में बाली को कोई हरा नहीं सकता था.

इसीलिए भगवान श्री राम ने सुग्रीव को सीधे भिड़ा कर, पेड़ की ओट से अनीति पूर्वक उसका वध किया क्योंकि वह अधर्म का प्रतीक था.

आज के समय में बाली वाली यही शक्ति मुस्लिम मतदाताओं के पास है. हिंदुओं के वोट बराबर बंटने के बाद मुस्लिमों के मत निर्णायक साबित हो जाते हैं. जिसका फायदा वे लोग कब से उठाते आ रहे हैं.

लेकिन इस बार ‘भेद’ नामक इस नीति का प्रतिप्रयोग भाजपा एवं मोदी जी द्वारा मुस्लिम मतदाताओं पर कर दिया गया है.

मुस्लिम स्त्रियां अब अपनी परंपरागत दुर्दशा में बदलाव चाहती हैं. उसी तरह कुछ पढ़े लिखे, व्यापारी वर्ग एवं प्रगतिशील मुस्लिम भी भाजपा से प्रभावित होते दीखते है.

मुस्लिम मतदाताओं में भेद की नीति से उत्पन्न बिखराव स्वयं मुस्लिम समुदाय के लिए भी भविष्य में वरदान साबित होने वाला है.

तो हे उत्तर प्रदेश के निवासियों! जहां तक भी संभव हो मुस्लिमों के बीच हर संभावित ‘भेद’ को आरोपित कीजिए और विकसित कीजिए ताकि उनके मतों का बिखराव भाजपा सरकार की संभावना को मजबूत करें.

छोटे से लेकर बड़े, हर वर्ग के मुस्लिम के बीच, जो भी आपके जैसे भी संपर्क में हो इस नीति के प्रसार का प्रयास करें और यह असंभव नहीं है.

आपका प्रयास भाजपा को ऐतिहासिक जनादेश दिला सकता है जो कि उत्तर प्रदेश की काया पलट कर सकता है.

तो हे पार्थ! भेद का आश्रय लेकर इस चक्रव्यूह को भेद दे निश्चित ही ‘विजय-कमल’ तेरा ही होगा.

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