कुत्ता खाने के लिए भी लगता है मेला!

अपने आप को सभ्य और आधुनिक कहने वाले चीन में हर  साल 21 जून से 30 जून तक यूलिन नामक शहर में एक मेला लगता है, जिसमें 10 हजार से 15 हजार कुत्तों को खरीददारों के सामने उनके पसन्दीदा कुत्ते को मार कर उसका मांस पकाया जाता है.

कुत्तों का मांस खाने के लिए  चीन के दूर दूर के संस्थानों से कुत्ते का मांस खाने के शौक़ीन लोग हजारों की संख्या में रोज  आते हैं.  इस तरह की कुत्तों को मारने काटने के लिए उन्हें पिंजड़ों में रख कर पाला पोसा जाता है, बड़े बड़े फार्मों में अलग अलग किस्म की जाति के कुत्तों को अच्छा भोजन दिया जाता है.

इस प्रकार से कुत्तों को मारकर उनका गोश्त खाने के होटल सिओल दक्षिण कोरिया, और वियतनाम  में भी प्रचलित हैं.

आधुनिक इन्सान कितना नीचे गिर सकता है उसकी कोई सीमा नहीं है. शायद राजा राम के जमाने के रावण प्रजाति के राक्षस भी इतना घिनौना और अप्राकृतिक अधम भोजन नहीं करते होंगे.

कुत्तों के मांस का भक्षण करने वालों के लिए अगर राक्षस शब्द का इस्तेमाल किया जाए तो राक्षसों का अपमान हो जाएगा.

इन्दौर में आकाशवाणी में एक विदुषी मालवी महिला काम करती हैं, उनके जीवन में उन्होने संकल्प लिया है कि जब कभी कहीं पर भी कोई कुत्ता घायल या  दयनीय अवस्था में दिखता है तो वह उसे अपनी गोदी में उठाकर  घर ले आती हैं. उसकी सेवा श्रुधा करके उसके स्वस्थ होने पर उचित स्थान पर भेज देती हैं.

उनकी सेवा का लाभ उठाने वाले इन्दौर में सड़कों के इतने सारे कुत्ते हो गए हैं कि वह जब कभी पैदल सड़क पर चलती हैं तो कई कुत्ते फूंछ हिलाते कुर्र कुर्र करते अपनी खुशी जाहिर करके उनके पैरों में लोटने लगते हैं.

अगर गलती से यह विदुषी महिला  यूलिन के मेला में चली जाए तो पता नहीं वहां का दृश्य देख कर उनकी क्या हालत हो जाएगी.

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