मोदी का नया वोटर वर्ग 2017 में तो आगाज़ करेगा लेकिन 2019 में लायेगा जलजला

0
31

कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर जानकारी मिली कि लखनऊ की मुस्लिम लडकियां और महिलाएं तीन तलाक के मुद्दे पर, व्हाट्सएप पर समूह बनाकर बातें कर रही हैं.

इस तरह की खबरें मेरे पास भी कुछ दिनों से आ रही थीं लेकिन लखनऊ की विशेष स्थिति को देखते हुए मैंने इस पर कोई ध्यान नही दिया था.

यह मैं जानता हूँ कि यह माना ही जाता है कि बीजेपी को मुस्लिम समुदाय वोट नहीं देता है लेकिन कमोबेश अटलबिहारी बाजपेयी के जमाने से मुस्लिमो का एक वर्ग बीजेपी को वोट करता रहा है. हाँ यह सही है कि इसका मुख्यतः प्रभाव एक विधानसभा क्षेत्र में पड़ता रहा है लेकिन एक वर्ग, भले ही वह कम संख्या में है, बीजेपी को वोट करता है.

मैंने भी पिछले 36 घण्टे में अपने सम्पर्क सूत्रों के हवाले से मुस्लिम लड़कियों और तीन तलाक के मुद्दे की तीव्रता को जानने की कोशिश की है, जिसमें कुछ बातें बड़ी साफ़ पता चली हैं.

यह सूचना बिलकुल सही है कि लखनऊ में मुस्लिम लड़कियों और महिलाओं के बीच तीन तलाक मुद्दे पर खुल कर बातें हो रही हैं. जितना मुझे पता चला है, व्हाट्सएप्प पर इसकी शुरुआत 2 महीने पहले लखनऊ के करामात गर्ल्स कॉलेज से हुई थी.

वहां की लड़कियों ने इस को गम्भीर चर्चा का मुद्दा बनाया और कालांतर में आईटी गर्ल्स कॉलेज, जहाँ मुस्लिम समुदाय के मध्यवर्गी और उच्च वर्ग की लड़कियां पढ़ती हैं, उन्होंने उसको बढ़ाया है.

लड़कियों के द्वारा शुरू इस प्रयास की आग लखनऊ शहर के मुस्लिम समुदाय के बीच भी लगी है और तीन तलाक मुद्दे पर, निश्चित रूप पर मुस्लिम महिला वर्ग में एक अलग सोच बन रही है.

मेरे, मुस्लिम मित्रों ने यह तो स्वीकार किया है कि उन जैसे पढ़े-लिखे, आधुनिक मुस्लिम पुरुष तीन तलाक के मुद्दे पर मुस्लिम महिलाओं के साथ है लेकिन क्या मुस्लिम महिलाएं मुस्लिम समाज के फतवे के विरुद्ध जाकर बीजेपी को वोट करेंगी, इस पर अभी असमंजस बना हुआ है.

आज, सत्य को और करीब से समझने के लिए, मेरी मुलाकात एक ऐसी मुस्लिम महिला से हुई, जो इस व्हाट्सएप्प समूह से जुड़ी हुई है. वो मुझे पहले से ही जानती थी लेकिन 2014 के बाद से ही अपने आप दूरियां बन गयी थीं.

उनसे जब तीन तलाक और उसको लेकर लखनऊ में मुस्लिम महिलाओं की प्रतिक्रिया पर बात की, तो पहले तो वह काफी झिझकी लेकिन बाद में, उनका कहीं उल्लेख न किये जाने की शर्त पर खुल कर बात की.

उन्होंने जो बताया उससे तीन बातें बड़ी साफ़ थी. पहली कि, तीन तलाक मुद्दे ने मुस्लिम समाज में खलबली मचा दी है. मुस्लिम लडकियां इस बारे में ज्यादा उत्साहित हैं और वह अपने घर की महिलाओं को इस बारे में अपनी आज़ाद सोच रखने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं.

दूसरी बात यह कि तीन तलाक के मुद्दे पर यहां के मुस्लिम समाज में पुरुषों का एक वर्ग स्पष्ट रूप से मुस्लिम महिलाओं के हक के लिए खड़ा हो गया है जो अपने मुस्लिम नेतृत्व को इस पर जवाब दे रहा है.

तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मुस्लिम महिलाओं में बीजेपी का कोई विशेष महत्व नहीं है, उनके लिए सिर्फ और सिर्फ मोदी मायने रखते हैं. मोदी जी मुस्लिम लड़कियों और महिलाओं के ज़ेहन में जगह बना चुके है. उन्हें विश्वास है कि मोदी देर-सबेर कॉमन सिविल कोड लागू करवा देंगे और वह महिलाओं के हक के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं.

अब क्या, मुस्लिम लड़कियां और महिलाएं, समुदाय की इच्छा के विरुद्ध विधानसभा चुनाव में बीजेपी को वोट देंगी?

यहां अभी स्थिति एक तरफा नहीं है. यदि मैं उन महिला के आंकलन को मानूं तो उनका कहना है कि मुस्लिम लड़कियों व जिन महिलाओं ने तीन तलाक के अनुभवों को देखा या महसूस किया है, उनके वोट बीजेपी को मिलते है तो उन्हें कोई आश्चर्य नहीं होगा.

उन्होंने यह भी स्वीकार किया है कि इस आशंका को लेकर मुस्लिम समुदाय के नेतृत्व व पुरुषों में भी असहजता है.

लेकिन यहीं पर उन्होंने बड़े जोरदार ढंग से यह भी कहा कि विधानसभा का चुनाव मोदी जी का चुनाव नहीं है इसलिए 2017 में बीजेपी को मिलने वाले मुस्लिम वोटों से 2019 का आंकलन मत कीजियेगा क्योंकि 2019 का चुनाव मोदी जी का होगा. तब मुस्लिम लड़कियों और महिलाओं का एक बहुत बड़ा वर्ग मोदी जी के पक्ष में वोट करेगा और इस पर किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए.

मैंने अंत में जाते-जाते उनसे लखनऊ के बाहर मुस्लिम महिलाओं के बीच तीन तलाक के मुद्दे व मोदी जी लेकर उनका विचार जानना चाहा

तब उन्होंने कहा भाई साहब, स्मार्ट फोन से कहाँ की बात कहाँ-कहाँ तक पहुंच रही है और उसका क्या असर हो रहा है, उसकी सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है. लेकिन आईटी कॉलेज जहाँ पर गर्ल्स हॉस्टल है और वहां लखनऊ और उसके आस पास के अच्छे मुस्लिम परिवारों की लड़कियां पढ़ती हैं, वह जरूर अपने-अपने कस्बों और शहरों में तीन तलाक के मुद्दे और मोदी पर बात बढ़ा रही हैं.

जितना मुझे समझ में आया है उससे लगता है कि मोदी जी ने मुस्लिम समुदाय के अभेद्य किले में सेंध लगा कर, अपने लिए एक नया वोटर वर्ग तैयार कर लिया है जो 2017 में तो आगाज़ करेगा लेकिन 2019 में जलजला लायेगा.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY