सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट जज को काम करने से रोका, पेश होने के निर्देश

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को आदेश दिया है कि कलकत्ता हाई कोर्ट जज सीएस करनन को कोई न्यायिक और प्रशासनिक कार्य ना सौंपा जाए.

देश के न्यायिक इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की बेंच ने हाईकोर्ट के वर्तमान जज के खिलाफ अदालत की अवमानना के मामले की सुनवाई की.

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जे एस खेहर एवं छह अन्य वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा, जे. चेलामेश्वर, रंजन गोगोई, मदन बी. लोकुर, पीसी घोष और कुरियन जोसफ की बनी बेंच ने कोलकाता के एक जज के खिलाफ अवमानना के मामले की सुनवाई की.

कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए करनन को 13 फरवरी को कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए.

इसके साथ ही जस्टिस करनन को कलकत्ता हाईकोर्ट की सारी फाइलें और दस्तावेज वापस करने के आदेश भी दिए गए हैं. इस मामले में कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है.

जस्टिस करनन ने इस साल 23 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर कई जजों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए जांच की मांग की थी. सुप्रीम कोर्ट ने इसे अवमानना मानकर सुनवाई करने का फैसला किया.

जस्टिस करनन ने पीएम को लिखी गई चिट्ठी में कहा कि नोटबंदी से भ्रष्टाचार कम हुआ है लेकिन न्यायपालिका में मनमाने और बिना डर के भ्रष्टाचार हो रहा है. इसकी किसी एजेंसी से जांच होनी चाहिए. इस चिट्ठी में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के वर्तमान और पूर्व 20 जजों के नाम भी लिखे गए हैं.

मामले की सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि वक्त आ गया है कि अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले में वर्तमान जज के खिलाफ कारवाई कर एक उदाहरण पेश करें.

रोहतगी ने कहा कि इस तरह जजों पर भ्रष्टाचार के आरोप की चिट्ठी लिखना सीधे-सीधे न्यायिक प्रक्रिया में बाधा पहुंचाना है और इस तरह जज का चिट्ठी लिखना न्यायतंत्र को शर्मसार और ध्वस्त करने की एक सोची समझी नीति है.

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