क्या क्रिएटिव लोग सचमुच हमेशा खुश रहते हैं?

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इसके जवाब में मनोवैज्ञानिक सलाहकार रश्मि सुमन कहती हैं, ‘यह जरूरी नहीं है कि हर रचनात्मक व्यक्ति खुशमिजाज हो. फिर भी इस तथ्य से इंकार नहीं किया जा सकता कि तुलनात्मक रूप से ऐसे लोग ज्यादा बुद्धिमान होते हैं. शुरू से ही इनका व्यक्तित्व कुछ ऐसा होता है कि इनमें जीवन की नकारात्मक परिस्थितियों को झेलने की क्षमता सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा होती है.

बल्कि यूँ कहा जा सकता है कि वे अपनी नकारात्मक भावनाओं को अभिव्यक्त करने का कोई न कोई ऐसा सकारात्मक तरीका ढूँढ लेते हैं, जो समाज में सहज रूप से स्वीकार्य होता है.

उदाहरण के लिए अगर कोई चित्रकार अपनी पेंटिंग बनाता है तो उसमें उसका व्यक्तित्व और उसकी मन:स्थितियां स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं. नकारात्मक भावनाओं को सकारात्मक रूप से अभिव्यक्त करने की इस प्रक्रिया को मनोवैज्ञानिक फ्रायड ने सब्लिमेशन का नाम दिया है. फ्रायड पहले मनोवैज्ञानिक थे, जिन्होंने मनोविज्ञान को डिफेंस मैकेनिज्म का सिद्धांत दिया था, जिसके अनुसार हर इंसान अपने जीवन में अलग-अलग तरह के मानसिक संघर्षों से जूझ रहा होता है.

ऐसी मुश्किलों से सफलतापूर्वक बाहर निकलने का तरीका भी उसका मस्तिष्क स्वयं ही ढूंढ लेता है. सब्लिमेशन भी डिफेंस मैकेनिज्म की ऐसी प्रक्रिया है, जिसके जरिये व्यक्ति अपनी नकारात्मक भावनाओं का प्रकटीकरण सकारात्मक रूप में करता है. उदाहरण के लिए अगर किसी सामान्य व्यक्ति को बहुत ज्यादा गुस्सा आता है तो वह अपने रोजमर्रा के व्यवहार में आक्रामक हो जाता है, जो न तो समाज के लिए हितकर होता है, न स्वयं उसके लिए…. लेकिन वहीं उसकी जगह पर कोई कलाकार या रचनात्मक प्रवृत्ति का व्यक्ति होगा तो वह अपनी नकारात्मक भावनाओं को नियंत्रित करने में सक्षम होगा.

वह अपनी ऐसी भावनाओं को रचनात्मक कार्यों के माध्यम से व्यक्त करेगा. मिसाल के तौर पर कोई कवि या कहानीकार कविताओं और कहानियों के माध्यम से अपने गुस्से का इजहार करता है तो अभिनेता अभिनय के माध्यम से. ऐसा करने से वह स्वयं को काफी हद तक तनावमुक्त महसूस करता है और अपनी कला के माध्यम से समाज को सकारात्मक संदेश भी देता है.

यह जरूरी नहीं है कि पेंटिंग करने या कविताएं लिखने वाला हर व्यक्ति क्रिएटिव हो. अगर वह व्यक्ति इन कार्यों को महज ड्यूटी की तरह पूरा करता है तो उसके परिणाम में वह सौंदर्य नजर नहीं आएगा, जो कि किसी सच्चे कलाकार की कलाकृति में दिखाई देता है. इसके विपरीत यह भी संभव है कि पूरी तरह तल्लीन होकर फर्श की सफाई करने वाला अनपढ़ व्यक्ति वास्तव में ज्य़ादा क्रिएटिव हो.

हमारा यह जीवन छोटी-छोटी बातों से ही बना होता है. सो रचनात्मक व्यक्ति में जरा भी अहं नहीं होता. जरा सोचिए, क्या कभी कालिदास या शेक्सपियर ने यह सोचकर साहित्य सृजन किया होगा कि मुझे विश्व का महान कवि बनना है. वे तो बस स्वान्त: सुखाय की भावना से प्रेरित होकर केवल अपनी खुशी के लिए रचना प्रक्रिया में लीन थे. इसी सादगी और सच्चाई की वजह से ऐसे लोग इतिहास में अमर हो जाते हैं. रचनात्मक व्यक्ति के जीवन का प्रत्येक क्षण चिंतनशील प्रेम में डूबा रहता है. सादगी से जीना अपने आप में बहुत बडी महानता है.

कितना अच्छा लगता है, कई बार यूँ ही बेमतलब कुछ पल अपने साथ बिताना, रंग-बिरंगे फूलों की खूबसूरती को आँखों में संजोना, बारिश की नन्ही बूँदों को हथेलियों पर महसूसना, पंछियों के मधुर कलरव का संगीत अंतर्मन में बसा लेना…. पर कहां जी पाते हैं हम इन छोटे-छोटे अनमोल पलों को.

आज सभी को बहुत जल्दी है, ज्य़ादा पैसे कमाने और ऊंचा मुकाम हासिल करने की. महंगी कार, आधुनिक सुविधाओं से सजा-संवरा आलीशान घर, बच्चों की अच्छी शिक्षा और ढेर सारा बैंक बैलेंस… कल तक जिन सुविधाओं को लग्जरी की श्रेणी में रखा जाता था, आज की जीवनशैली में वे लोगों की जरूरत बन चुकी है. यह अलग बात है कि ऐसी तमाम सुविधाएं हासिल कर लेने के बाद भी लोग खुश नजर नहीं आते.

यहीं तो हैं खुशियाँ

इंसान हमेशा खुश रहना चाहता है, लेकिन हर व्यक्ति के लिए खुशी की परिभाषा अलग होती है. कोई ब्रैंडेड चीजें खरीदकर खुश होता है तो किसी को घूमना-फिरना अच्छा लगता है. यह सच है कि जिंदगी को आरामदेह और खुशहाल बनाने के लिए पैसे की जरूरत होती है, पर इससे मनचाही चीजें खरीद कर हम जितनी जल्दी खुश होते हैं, उतनी ही जल्दी उनसे हमारा मन ऊबने लगता है.

दरअसल भौतिक सुख-सुविधाओं से हासिल होने वाली खुशी क्षणिक होती है, जबकि अपनी रुचि से जुड़ा कोई भी रचनात्मक कार्य हमारे मन को बेहद सुकून देता है. यही वजह है कि क्रिएटिव लोग हमेशा खुश नजर आते हैं.
अगर हम अच्छा सोचें तो हमारे साथ भी अच्छा ही होगा. यह सकारात्मक नजरिया भी रचनात्मकता से जुड़ा है. हालात हमेशा एक समान नहीं रहते और न ही सभी को एक जैसी खुशहाल जिंदगी मिलती है. वसंत की तरह पतझड़ का आना भी स्वाभाविक है. क्रिएटिव लोग इस बात को बखूबी समझते हैं. वे मुश्किलों से कभी नहीं घबराते, बल्कि उन्हीं के बीच से खुश रहने का कोई नया रास्ता तलाश लेते हैं.

– रश्मि सुमन
साइको काउंसलर

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