जैश सरगना मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने अमेरिका की यूएन में अर्जी, विरोध में चीन

नई दिल्ली. आतंकवाद पर भारत के रुख का समर्थन करते हुए जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने के लिए संयुक्त राष्ट्र में अर्जी दायर की है.

इससे स्पष्ट होता है कि डॉनल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को घेरना शुरू कर दिया है.

अजहर पर बैन लगाने की भारत की कोशिशों का विरोध करने वाले चीन ने अमेरिका की इस पहल का विरोध किया है.

भारतीय विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने की अमेरिकी पहल और चीन के विरोध किए जाने की उसे जानकारी हुई है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस मामले को चीन सरकार के समक्ष उठाया गया है.

गौरतलब है कि पिछले साल भारत ने मसूद अजहर के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई थी, लेकिन इस बार यह प्रस्ताव तीन देशों – अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस की ओर से रखा गया था.

सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका ने जनवरी के तीसरे हफ्ते में संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध समिति के सामने मसूद अज़हर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने का प्रस्ताव रखा था. इसमें उसे इंग्लैंड और फ्रांस का भी समर्थन था.

इस प्रस्ताव में कहा गया कि जैश एक आतंकी संगठन है और इसके सरगना को बच निकलने नहीं दिया जा सकता.

उल्लेखनीय है कि मसूद अजहर को 1994 में जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों की वजह से गिरफ्तार किया गया था लेकिन 1999 में इंडियन एयरलाइंस की अगवा फ्लाइट 814 के यात्रियों की रिहाई के बदले कांधार ले जाकर रिहा कर दिया गया.

इसके अलावा अजहर ने खुलेआम पठानकोट एयरबेस पर हमला करनेवाले आतंकियों की तारीफ की थी.

इस बीच, अनेक शीर्ष अमेरिकी थिंकटैंक ने ट्रंप प्रशासन से सिफारिश की है कि पाकिस्तान को आतंकवाद के प्रायोजन करने वाला देश घोषित करने का विकल्प खुला रखना चाहिए.

इन संगठनों ने एक रिपोर्ट में कहा है कि नए प्रशासन के पहले साल पाकिस्तान को आतंकवाद के प्रायोजन करने वाला देश घोषित करना विवेकपूर्ण नहीं होगा, लेकिन दीर्घकाल के लिए विकल्प रखना चाहिए.

इन सिफारिशों में यह भी कहा गया है कि सिर्फ प्रलोभन से आतंकवाद के प्रति पाकिस्तान की मौजूदा नीतियां नहीं बदली जा सकतीं हैं और आतंकवाद का प्रायोजक देश घोषित करने का विकल्प खोल कर पाकिस्तान को इस राह से डिगाना चाहिए.

बता दें कि पिछले साल भी चीन ने मसूद अजहर का नाम संयुक्त राष्ट्र के आतंकियों की सूची में शामिल करने के प्रस्ताव पर तकनीकी आधार पर अड़ंगा लगा दिया था.

हालांकि इससे कुछ दिन पहले चीन ने अपने रुख पर विचार करने का संकेत दिया था लेकिन ऐन वक्त पर चीन ने अपने पुराने रवैये का प्रदर्शन किया. भारत ने इस मसले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे ‘दुर्भाग्यपूर्ण आघात’ करार दिया था.

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