झूठ है कि आँख के बदले आँख लोगे तो दुनिया अंधी हो जाएगी

An eye for an eye makes the whole world blind. याने – आँख के बदले आँख लोगे तो पूरी दुनिया अंधी हो जाएगी.

माना जाता है कि यह वाक्य गांधी का था। लेकिन quoteinvestigator.com नाम की एक वेबसाइट के अनुसार यह वाक्य उनका नहीं है. उन्होंने इस वाक्य का कभी प्रयोग किया नहीं.

गांधी के एक चरित्र लेखक Louis Fischer (लुई फिशर) ने इस वाक्य का कहीं स्पष्टीकरण में प्रयोग किया है. फिशर साहब को जानते ही कितने लोग हैं आजकल? वैसे भी यह वाक्य गांधी पर अधिक फिट बैठता है, सो उन्हीं के नाम से कई वर्षों से प्रसिद्ध है.

धूर्त लोग हमेशा ऐसे वाक्यों का अपने मकसद से इस्तेमाल करते हैं. प्रतिशोध की भाषा बोलते हुए एक हिन्दू की पोस्ट पर यही वाक्य एक भाईजान उवाचे थे. उनको समर्थन भी अच्छा मिला था और वो भी, जैसा कि आप ने सही सोचा है, हिंदुओं का ही था.

मुझे नहीं लगता आँख के बदले आँख से दुनिया अंधी हो जाएगी। बल्कि इस सोच से उलट कोई भी अंधा नहीं होगा क्यूंकि अपनी भी आँख फोड़ी जाने के डर से कोई आँख फोड़ेगा ही नहीं.

क्या आप ने कभी गौर किया है, लोग गुस्सा हमेशा खुद से कमजोर पर ही उतारते हैं?

लड़ाई जब होती है तो जो पक्ष लड़ाई शुरू करता है वो हमेशा दूसरे पक्ष से अधिक तैयार होता है लड़ने के लिए. उसके पास लड़ने का उद्देश्य है. लड़ कर क्या पाना है यह वो जानता है. उसके लिए उसकी तैयारियां है.

और उन तैयारियों में एक तैयारी यह भी होती है कि वार करने की जगह और समय वो हो जो शत्रु के लिए अनपेक्षित हो. कम से कम वो ऐसी जगह चुनता है जहां वो ज्यादा से ज्यादा नुकसान करे और खुद उसका नुकसान कम से कम हो.

लड़ाई में प्रचार और मनोविज्ञान का बड़ा योगदान होता है. हमला करने वाला पूरा दस्ता मारा भी जाये तो भी सफल है, अगर वो शत्रु का बड़ा नुकसान करे.

इससे दो काम होते हैं. अगर शत्रु पूरी ताकत से प्रतिशोध न लें तो उसे डरपोक प्रचारित कर सकते हैं, जिससे उसकी अपनी प्रजा में ही साख गिर सकती है, उसकी सत्ता कमजोर हो जाती है. और अगर वो पूरी ताकत से प्रतिशोध लें तो आप की नैतिक जीत है कि चींटी ने हाथी को परास्त कर दिया.

मिसाल के तौर पर पाकिस्तान-भारत देखें. पहले जब पाकिस्तान बहुत कुछ करता था और भारत केवल निषेध निंदा करता था तो निंदा भारत के मौनमोहन सरकार की ही होती थी.

चींटी-हाथी का हिसाब देखना है तो लादेन-अमेरिका देखिये. मर के भी लादेन हीरो है मुसलमानों में और अमेरिका विलेन.

कितने सद्दाम और ओसामा पैदा हुए यहाँ भारत के मुसलमानों में? मुस्लिम मुल्कों में तो गिनिएगा भी मत! और लादेन को मारकर भी क्या अमेरिका वाकई जीती वहाँ?

यह ज़रा ज़रूरी, किन्तु विषयांतर हो गया, मूल विषय पर आते हैं. लड़ाई शुरू करने वाले पक्ष का तय लक्ष्य है लड़ाई करना, उस से कुछ हासिल करना (क्या हासिल यह परिस्थिति के अनुसार) और उसके लिए वो पहले से तैयार है, उसे बस बहाने का इंतजार है.

लेकिन अगर उसे यह यकीन है कि surprise उसके साथ नहीं है, वो अपने उद्देश्य में सफल नहीं होगा और उसका ही नुकसान होगा, तब वो हमला नहीं करता.

यही बात व्यक्ति से ले कर राष्ट्र तक सत्य है. जिसको अपनी आँख भी फूटने की गारंटी है उसका हाथ दूसरे की आँख फोड़ने के लिए नहीं उठेगा यह संभावना अधिक होती है. और इस परिस्थिति में दुनिया अंधी होने की बात तो दूर, कोई काना भी नहीं होता.

यह वाक्य An eye for an eye makes the whole world blind को छूट से प्रयोग करने वालों को ध्यान से देखिये. कौन होते हैं ये?

या तो आँख फोड़ने की पहल करने वालों के ही समुदाय से होते हैं, या फिर और दो प्रकार के होते हैं. उनमें से पहला प्रकार है हमलावर से प्रभावित या पोषित. दूसरा है वो कायर, जो मौत के डर से बचना चाहता है, बचेंगे तो फिर लड़ेंगे वाला नहीं होता.

यही तीन प्रकार के लोग आप को कहते रहेंगे कि आप की एक आँख तो बची ही है, क्यों उसकी भी आँख फोड़ने निकले हो.

उनके लिए उत्तर में एक प्रसंग देता हूँ. एक जनाब मुझसे सऊदी न्यायप्रियता की डींगें हांक रहे थे कि वहाँ सभी समान हैं. मैंने कहा, क्यूंकि वहाँ सभी मुसलमान हैं. वहाँ मुसलमान ही बड़ा भाई, मुसलमान ही छोटा भाई. बड़े के कंधे पे बैठकर उसके कान में मूतना छोटे का हक़ नहीं माना जाता वहाँ. तगड़ी झापड़ मिलती है और उस पर कोई धरना ड्रामा नहीं करता. चोर के हाथ कटते हैं और संगीन गुनाह हो तो सर.

चोरी की भी पेशी हो तो कोर्ट में पचास जाली टोपियाँ जज पर मानसिक दबाव बनाने के लिए दिखती नहीं वहाँ. गुनाह के हिसाब से सख्त सजा हो तो मोर्चे नहीं निकलते, कोई टीवी पर हाय-तौबा नहीं मचाता. रेप केस में कोई माइनॉरिटि और नाबालिग होने का बहाना कर के किसी अरब लड़की को निर्भया नहीं कर सकता.

बुदबुदाते चले गए जनाब, लेकिन उम्मीद है कि मेरी बात आप समझ ही गए होंगे. आँख के बदले आँख से दुनिया अंधी नहीं होती, बल्कि कोई आप की आँख फोड़ने की हिम्मत नहीं करेगा. और अगर आप किसी की आँख फोड़ने की पहल नहीं करेंगे तो फिर दुनिया कहाँ से अंधी होगी?

चाहे तो इस लेख के लिंक को सुरक्षित (सेव) कर लीजिये. आइंदा कोई यह An eye for an eye makes the whole world blind वाली लाइन चिपका कर शर्मिंदा करना चाहे तो उसका जवाब आप के पास है.

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