भाजपा कैसे और क्यों, खुल के हिंदुत्व के लिए लड़े?

भाजपा भारत की एक मात्र ऐसी राजनीतिक पार्टी है जो हमेशा धर्म संकटों से घिरी रहती है. ये एकमात्र ऐसी पार्टी है जिससे बहुसंख्यक समुदाय हद से ज्यादा उम्मीदें लगा लेता है और 2014 में मोदी जी के आने के बाद से देश की हर छोटी-बड़ी समस्या यानी आपके नल में पानी नहीं आ रहा से लेकर पाकिस्तान और काश्मीर जैसी समस्या का समाधान भी लोग मोदी से चाहते हैं.

लोग कहते हैं कि भाजपा ने राम के नाम पर लोगों से वोट मांगे, लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ किया. 90 के दशक में भाजपा को यही लगा कि अगर वो अपने घोषणा पत्र के अनुसार काम करेगी तो हिन्दू उसे अपने सर पे बैठा लेंगे.

मुलायम सिंह की सरकार गिरी… कल्याण सिंह सत्ता पर आसीन हुए… आनन-फानन में अयोध्या में कारसेवा के लिए भूमि का अधिग्रहण का आदेश पारित हुआ. 6 दिसंबर को कारसेवा हुई. 5 घंटे में बाबरी ढांचा गिरा दिया गया.

50 हज़ार लोगों ने मिलकर ढांचा गिरा दिया, एक भी गोली सरकार की तरफ से नहीं चलाई गयी… पुलिस अधिकारी मूक दर्शक बने रहे… सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहलेना का दंश कल्याण सिंह सहित भाजपा को भुगतना पड़ा.

कल्याण सिंह को ना सिर्फ इस्तीफा देना पड़ा बल्कि उन्हें एक दिन जेल में रहना पड़ा… इसके बाद मध्य प्रदेश, राजस्थान सहित 5 राज्यों में भाजपा की सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया.

इस घटना के बाद भाजपा को लगा कि हमने इतनी बड़ी कुर्बानी दी है… हिन्दू समाज इसकी लाज रखेगा… लेकिन साहब हुआ उलटा, कई राज्यों में भाजपा की दोबारा सरकार नहीं बन पायी… उत्तर प्रदेश में तो भाजपा फिर पूर्ण बहुमत से कभी आ ही नहीं पाई.

मै पूछता हूँ कि भाजपा ने किसके लिए गिरवाया श्रीराम जन्मभूमि पर बना बाबरी ढांचा?… अपने लिए?

अरे चुनाव तो हम जीत ही चुके थे… क्या जरुरत थी ढांचा गिराने की? अगर भाजपा और कल्याण सिंह चाहते तो उत्तर प्रदेश चुनाव जीतने के बाद मंदिर बनाने का मुद्दा त्याग भी सकते थे… लेकिन उन्होंने अपना मुद्दा नहीं छोड़ा और ढांचा गिरा कर ही दम लिया…

लेकिन मिला क्या?… मुख्यमंत्री की कुर्सी भी गयी… जेल भी गए… और दुबारा चुनाव भी नहीं जीता…

तो साहब आप ही बताइए कि भाजपा कैसे और क्यों, खुल के हिंदुत्व के लिए लड़े?…. इसके बावजूद भाजपा ने इस बार यूपी विधानसभा चुनावों में एक भी मुस्लमान को टिकट नहीं दिया…

भाजपा जानती है कि मियां उसे वोट नहीं देंगे… आखिर कोई मुसलमान 1992 और 2002 की घटना भुला कर कैसे कमल का बटन दबा सकता है…

इसलिए अब भाजपा ने रणनीति में बदलाव किया है… और मुस्लिम महिलाओं के ऊपर अपना दांव लगाया है… तीन तलाक के मुद्दे पर भाजपा ने मुखर होकर अपनी आवाज़ उठाई है… और इसका फायदा भाजपा को मिल सकता है…

भाजपा के कट्टर वोटर ये भी कह रहे हैं कि वरुण गांधी और योगी जी को खुल कर बोलने नहीं दिया जा रहा… तो समझ लीजिये कि भाजपा में गांधी परिवार के किसी भी सदस्य के लिए कोई जगह नहीं है… चाहे वो वरुण गांधी ही क्यों ना हो…

योगी जी को खुल के ना प्रोजेक्ट कर पाने का कारण यही है कि हिन्दू समाज में ही लोग योगी जी का खुल कर विरोध करते हैं…

तो साहब, भाजपा आज भी हिंदूवादी पार्टी है लेकिन हमारी वजह से ही वो अपने असली रंग में नहीं आ पा रही… अतः पूरी शक्ति यानी तन मन धन से भाजपा का साथ दें… जय हिन्द.

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