चुप्पी सिर्फ शक पैदा करेगी, बोलना तो मूर्खता को सिद्ध कर देता है

0
36

तोतलों के विवाह की कथा, मैथिलि की प्रसिद्ध लोककथाओं में से एक है. पुराने ज़माने में ठग कर विवाह करवाने का भी प्रचलन था. यानि कि वर पक्ष को कन्या के बारे में कुछ झूठ बताया जाता, कन्या पक्ष को वर के बारे में कुछ झूठ बताया जाता था.

क़ानूनी तौर पर ऐसे धोखे में रखकर किये गए विवाह अमान्य हैं, लेकिन अभी भी तलाक या विवाह विच्छेद की प्रक्रिया इतनी दुरूह और खर्चीली है कि लोग चुप्पी साध लेते हैं. ऐसे मामले में तर्क दिया जाता है कि शादी ब्याह में आटे में नमक जितना झूठ चलता है.

तो ये विवाह भी कुछ ऐसा ही था. तीन भाइयों का विवाह तीन बहनों से होना था. समस्या ये थी कि तीनों भाई तोतले थे.

अगर शादी के फेरे, विधियाँ पूरी होने से पहले तीनों भाइयों में से कोई भी बोलता तो लोगों को फ़ौरन उनके तोतले होने का पता चल जाता. उसी वक्त बरात लौटा दी जाती.

तो लड़कों की माँ ने तीनो लडकों को बिठा कर अच्छी तरह, ठोक-पीट कर समझा दिया. चाहे कुछ भी हो जाए, कोई कुछ पूछे, कुछ भी बोले, हरगिज़ जवाब मत देना. शादी होने तक एक शब्द भी तुम तीनों को मुंह से नहीं निकालना है.

तो बरात चली, लड़कों ने जबान पर ताला भी लगा लिया. तीनों बिलकुल फेरों के समय तक चुप थे. कोई कुछ भी पूछे वो बस मुस्कुरा कर सर हिला देते.

कन्या पक्ष वालों ने भी हंस कर कहा, लड़के जरा शर्मीले स्वभाव के लगते हैं. खैर फेरों का मुहूर्त आया तो सब अग्नि के पास बैठे.

इतने में पास ही रखा एक सूप (जो बांस की बनी एक टोकरी जैसी चीज़ होती है), वो आग के ज्यादा पास रखी थी, उसमें आग लग गई.

अब सबसे बड़े भाई ने तो थोड़ी देर आग लगते देखकर भी खुद पर काबू रखा मगर आखिर चिल्ला पड़ा – “तूप दल्लौ! तूप दल्लौ!” (सूप जला, सूप जला).

उसे बोलते देखकर छोटा भाई बोला, माय ती तहने लाहो (माय की कहने रहो – माँ ने क्या कहा था)!

इस पर तीसरा भी बोल पड़ा, अम तितो बाजै ती? (हम किछो बाजै छी – मैं कुछ बोल रहा हूँ).

तीनों के तोतले होने की पोल खुल जाने पर क्या हुआ होगा, अंदाज़ लगाया जा सकता है.

खैर तो कहानी का लब्बोलुआब ये है कि हर मुद्दे पर आप जानकार हों ऐसा तो हो नहीं सकता ना?

विदेश नीति से लेकर समाज शास्त्र तक, सब पर ज्ञान बघारने की मज़बूरी तो है नहीं?

किराये की कलमों को सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखने के पैसे मिलते हैं. उनके पास टाइप करने के लिए भी स्टाफ होता है. उनके लिए मुद्दे पर रिसर्च करके भी देने की टीम बैठी है.

ऊपर से आपके कमेंट करते ही उनका पोस्ट आपके कई मित्रों की wall पर ‘xyz commented on’ के साथ दिखने लगेगा तो मुफ्त में उनका प्रचार भी हो जायेगा.

कई बार सटीक विरोध के तर्क ना होने पर लोग गाली भी दे बैठते हैं, तो किराये की कलमें कहेंगी, भैया भक्त तो गाली देते हैं.

आपके मालदा जैसे मुद्दों पर जैसे किराये की कलमों ने चुप्पी साध ली वैसे ही उनके मुद्दों पर चुप्पी साधना सीखिए.

बाकी जब कहा जाता है कि, चुप्पी सिर्फ शक पैदा करेगी, बोलना तो मूर्खता को सिद्ध कर देता है… तो गलत तो नहीं कहा जाता होगा ना ?

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY