आपकी शर्ट इतनी सफ़ेद क्यों, कि दूसरे में हीनभावना पैदा हो!

फेसबुक पर कई लोग कह रहे हैं कि संजय लीला भंसाली को पड़े थप्पड़ ने उन्हें शहीद का दर्जा दे दिया है अभिव्यक्ति की आजादी की दुनिया में.

कई और बेहतर रास्ते हो सकते थे… लेकिन क्या हो सकते थे, वह कोई बताने को तैयार नहीं, बस अनंत काल तक प्रतीक्षा करें.

ऐसे में परिस्थिति समझने के लिए कुछ सूझा तो लिखा है, उम्मीद है सबको समझ में आएगा.

एक व्यक्ति जो मेरे सफेद शर्ट की सफेदी से अत्यंत ही हीन भाव महसूस कर रहा था, वह मेरे शर्ट को खराब करने पर तुला था.

उसने अपनी मंशा जाहिर की तो मैंने शालीन प्रतिरोध प्रारंभ किया. मैंने उसे समझाया कि यह सफेद शर्ट मेरा स्वभाव है और आप चाहें तो आप भी अपने शर्ट को अपने चरित्र के साथ सुधार करके शुभ्र बना सकते हैं.

बदले में वह कीचड़ लेकर मेरी तरफ बढ़ा. वह मानने को तैयार ही नहीं था. मैंने फिर उसे समझाया.

कुछ बुद्धिजीवी लोग भी तमाशा देख रहे थे. उन्हें समझाने का प्रयास किया तो वह लोग मुझे ही समझाने लगे कि यह तो भेदभाव है. आप अपना शर्ट इतना सफेद नहीं रख सकते कि दूसरे को हीन भावना उत्पन्न हो.

यह सेक्युलर उत्साहवर्धन सुन कर वह व्यक्ति कुछ कदम और आगे आ गया.

मैंने उसे फिर चेतावनी दी, यह ठीक नहीं है आपको ऐसा नहीं करना चाहिए.

वह नहीं माना. अब वह मेरे बिल्कुल करीब था और उसने कीचड़ से भरा हाथ मेरी तरफ बढ़ा दिया मेरा शर्ट खराब करने के लिए.

तभी मेरा हाथ भी उठा और मैंने उसके उस हाथ को कस के पकड़ लिया और दूसरे हाथ से एक तमाचा उसके गाल पर जड़ दिया.

अब वह खुद को शहीद बताता हुआ घूमता फिर रहा है.

खैर! मुझे तो अपना शर्ट बचाने ले लिए जो बेहतर लगा मैंने वह किया, किसी और के पास कोई अच्छा विकल्प हो तो प्रस्तुत करें.

पर याद रखे हमारे यहाँ एक कहावत है कि –

‘किया वह काम, और जो भजा वह राम’

और बेहतर, और भी बेहतर विकल्प अक्सर असमय गर्भपात का शिकार हो जाते हैं.

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